New यॉर्क : चीन के कई हिस्सों में सरकारी अस्पतालों पर बढ़ते आर्थिक दबाव के कारण स्वास्थ्यकर्मियों के वेतन और प्रदर्शन आधारित बोनस में कटौती किए जाने की खबरें सामने आई हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ अस्पतालों में कर्मचारियों को पहले की तुलना में कम वेतन मिल रहा है, जबकि कुछ जगहों पर महीनों से भुगतान लंबित होने के दावे भी किए गए हैं।‘द एपोक टाइम्स’ की रिपोर्ट के अनुसार, कुछ मेडिकल कर्मचारियों ने दावा किया है कि उनकी मासिक बेसिक सैलरी 2,000 युआन से भी कम रह गई है। वहीं, कुछ कर्मचारियों ने अस्पतालों में बोनस बंद किए जाने और वेतन में कटौती की जानकारी दी है।
अस्पतालों पर बढ़ते वित्तीय दबाव का दावा
रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के कुछ सरकारी अस्पतालों में वित्तीय स्थिति को लेकर दबाव बढ़ रहा है। इसके चलते कर्मचारियों के वेतन ढांचे और प्रोत्साहन राशि में बदलाव किए जाने की बात कही गई है।स्वास्थ्य क्षेत्र के कर्मचारियों का कहना है कि अस्पतालों की आर्थिक स्थिति कमजोर होने का असर सीधे उनके वेतन और सुविधाओं पर पड़ रहा है।हालांकि, इन दावों पर चीनी अधिकारियों या संबंधित अस्पतालों की ओर से कोई व्यापक आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
हांगझोऊ में वेतन कटौती का दावा
रिपोर्ट में हांगझोऊ के एक सरकारी अस्पताल के कर्मचारी का हवाला दिया गया है, जिसने अपनी पहचान सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर जानकारी दी।कियान उपनाम वाले इस कर्मचारी के अनुसार, अगस्त में एक स्थानीय अस्पताल में नर्सों की मासिक बेसिक सैलरी को 2,750 युआन से घटाकर 2,200 युआन कर दिया गया। यह कटौती करीब 20 प्रतिशत बताई गई है।कर्मचारी के अनुसार, वेतन में इस बदलाव से अस्पताल के स्टाफ पर आर्थिक दबाव बढ़ा है।
सूझोऊ में भी वेतन घटने का दावा
रिपोर्ट में जियांग्सू प्रांत के सूझोऊ के एक निवासी का भी उल्लेख किया गया है। लिउ उपनाम वाले इस व्यक्ति ने दावा किया कि उनके परिवार का एक सदस्य नर्स के रूप में काम करता है और उसकी मासिक बेसिक सैलरी कोविड-19 महामारी से पहले लगभग 3,700 युआन थी।उनके अनुसार, अब यह राशि घटकर करीब 1,700 युआन रह गई है। उन्होंने यह भी दावा किया कि अस्पताल ने कर्मचारियों को मिलने वाला बोनस देना बंद कर दिया है।
कोविड के बाद बदली आर्थिक स्थिति
रिपोर्ट में स्वास्थ्य क्षेत्र की मौजूदा स्थिति को कोविड-19 महामारी के बाद बदले आर्थिक माहौल से जोड़कर देखा गया है। महामारी के दौरान अस्पतालों पर काम का दबाव काफी बढ़ गया था, लेकिन बाद के समय में कई संस्थानों के सामने वित्तीय चुनौतियां आने की बात कही जा रही है।कई देशों की तरह चीन में भी स्वास्थ्य क्षेत्र में खर्च, प्रशासनिक लागत और आय के संतुलन को लेकर चर्चा होती रही है।
कर्मचारियों ने जताई चिंता
रिपोर्ट के अनुसार, कुछ स्वास्थ्यकर्मियों ने वेतन कटौती और बोनस में कमी को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि बढ़ती महंगाई और रोजमर्रा के खर्चों के बीच आय में कमी से परेशानियां बढ़ रही हैं।कुछ कर्मचारियों ने अपनी पहचान छिपाते हुए अपनी स्थिति साझा की, क्योंकि उन्हें कथित तौर पर संभावित कार्रवाई का डर था।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर असर की आशंका
स्वास्थ्य क्षेत्र के जानकारों के अनुसार, अस्पतालों में कर्मचारियों का मनोबल स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है। यदि लंबे समय तक आर्थिक दबाव बना रहता है तो इसका असर स्वास्थ्यकर्मियों की कार्य परिस्थितियों पर पड़ सकता है।हालांकि, किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए अलग-अलग क्षेत्रों और अस्पतालों की स्थिति का विस्तृत आकलन जरूरी होगा।
चीन के स्वास्थ्य क्षेत्र पर नजर
चीन दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य प्रणालियों में से एक रखता है और वहां सरकारी अस्पतालों की भूमिका काफी महत्वपूर्ण है। ऐसे में अस्पतालों की वित्तीय स्थिति और कर्मचारियों के वेतन से जुड़े मुद्दे लगातार चर्चा का विषय बने रहते हैं।फिलहाल सामने आई रिपोर्टों में कुछ कर्मचारियों के अनुभवों का उल्लेख किया गया है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है, लेकिन वे चीन के कुछ सरकारी अस्पतालों के सामने मौजूद संभावित आर्थिक दबाव की ओर संकेत करते हैं।
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