ट्रंप सरकार का बड़ा एक्शन 1.75 लाख से ज्यादा वीजा रद्द

अमेरिकी विदेश विभाग का बड़ा खुलासा 1.75 लाख वीजा रद्द

Update: 2026-08-11 01:04 GMT
वॉशिंगटन: अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के दौरान आव्रजन और वीजा नियमों को लेकर सख्ती लगातार बढ़ती जा रही है। अमेरिकी विदेश विभाग ने बताया है कि ट्रंप के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद से अब तक 1.75 लाख से अधिक वीजा रद्द किए जा चुके हैं। विभाग के अनुसार, इन मामलों में बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है जिनका सामना अमेरिकी कानून-व्यवस्था से हुआ और जिन पर विभिन्न प्रकार की आपराधिक गतिविधियों के आरोप या मामले थे।
यह आंकड़ा ऐसे समय सामने आया है जब ट्रंप प्रशासन अमेरिका में प्रवेश, आव्रजन व्यवस्था और विदेशी नागरिकों की जांच को लेकर पहले की तुलना में ज्यादा सख्त नीति अपना रहा है। प्रशासन का कहना है कि अमेरिका में रहने या प्रवेश करने की अनुमति एक अधिकार नहीं, बल्कि नियमों और पात्रता के आधार पर मिलने वाली सुविधा है।
1.75 लाख से ज्यादा वीजा रद्द
अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक, ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत से अब तक 1,75,000 से अधिक वीजा रद्द किए गए हैं। जनवरी 2026 में विभाग ने बताया था कि 1 लाख से अधिक वीजा रद्द किए जा चुके थे। इसके बाद यह संख्या और बढ़ी है।
विदेश विभाग की ओर से बताया गया कि वीजा रद्द करने के पीछे कई तरह के कारण हैं। इनमें आपराधिक गतिविधियां, वीजा की शर्तों का उल्लंघन, आव्रजन व्यवस्था के दुरुपयोग, धोखाधड़ी और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े खतरे शामिल हैं। अमेरिकी प्रशासन ने साफ किया है कि वह ऐसे विदेशी नागरिकों के मामलों की समीक्षा जारी रखेगा जिनके बारे में अधिकारियों को लगता है कि वे अमेरिका की सार्वजनिक सुरक्षा या राष्ट्रीय हित के लिए जोखिम पैदा कर सकते हैं।
सबसे बड़ा कारण आपराधिक गतिविधियां
विदेश विभाग के अनुसार, ज्यादातर वीजा रद्द किए जाने के मामलों का संबंध कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों से है। इनमें मारपीट, चोरी, नशीली दवाओं से जुड़े अपराध और खतरनाक तरीके से वाहन चलाने जैसे मामले शामिल हैं। DUI यानी शराब या नशीले पदार्थों के प्रभाव में वाहन चलाना भी वीजा रद्द किए जाने का एक महत्वपूर्ण कारण रहा है।
अमेरिकी विदेश विभाग के मौजूदा नियमों के तहत भी कुछ परिस्थितियों में वीजा रद्द किया जा सकता है। आधिकारिक नियमों में ऐसे मामलों का उल्लेख है जिनमें व्यक्ति वीजा श्रेणी के लिए पात्र नहीं रह जाता या उसके खिलाफ DUI से संबंधित गिरफ्तारी या दोषसिद्धि जैसी जानकारी सामने आती है। यानी किसी व्यक्ति के पास पहले से अमेरिकी वीजा होना इस बात की गारंटी नहीं है कि वह भविष्य में हर परिस्थिति में अमेरिका में प्रवेश कर सकेगा।
गंभीर अपराधों के मामलों में भी कार्रवाई
रिपोर्टों के अनुसार, वीजा रद्द किए जाने वाले मामलों में केवल मामूली अपराध ही शामिल नहीं हैं। अमेरिकी प्रशासन ने बलात्कार, यौन उत्पीड़न, अपहरण, मानव तस्करी और नाबालिगों के यौन शोषण जैसे गंभीर मामलों से जुड़े व्यक्तियों के खिलाफ भी कार्रवाई का उल्लेख किया है। अमेरिकी सरकार का तर्क है कि ऐसे मामलों में कार्रवाई सार्वजनिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि अमेरिका में प्रवेश की अनुमति पाने वाले विदेशी नागरिकों को अमेरिकी कानूनों का पालन करना होगा।
वीजा नियमों का उल्लंघन भी बड़ी वजह
अमेरिका में वीजा अलग-अलग उद्देश्यों के लिए जारी किए जाते हैं। किसी व्यक्ति को पर्यटक, छात्र, कारोबारी या अन्य श्रेणी के तहत वीजा मिल सकता है। लेकिन वीजा की शर्तों का उल्लंघन होने पर उसे रद्द किया जा सकता है।
उदाहरण के लिए, यदि कोई व्यक्ति अपने वीजा की अनुमति से अलग गतिविधि करता है, तय अवधि से अधिक समय तक अमेरिका में रहता है या वीजा की शर्तों का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, वीजा रद्द करने की प्रक्रिया पात्रता और परिस्थितियों के आधार पर की जाती है। इसलिए नया आंकड़ा केवल आपराधिक मामलों तक सीमित नहीं है। वीजा नियमों के उल्लंघन और आव्रजन व्यवस्था के कथित दुरुपयोग को भी इसमें शामिल किया गया है।
इमिग्रेशन सिस्टम के दुरुपयोग पर भी नजर
ट्रंप प्रशासन ने आव्रजन व्यवस्था के दुरुपयोग को रोकने को अपनी प्राथमिकताओं में रखा है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि जो लोग गलत जानकारी देकर या धोखाधड़ी के जरिए अमेरिकी आव्रजन व्यवस्था का फायदा उठाने की कोशिश करते हैं, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। वीजा आवेदन में गलत जानकारी देना या किसी महत्वपूर्ण तथ्य को छिपाना भविष्य में वीजा पात्रता को प्रभावित कर सकता है। अमेरिकी विदेश विभाग की नीति के तहत धोखाधड़ी या गलत प्रस्तुतीकरण के मामलों में वीजा रद्द होने के साथ अन्य कानूनी परिणाम भी हो सकते हैं।
'बर्थ टूरिज्म' पर भी कार्रवाई
अमेरिकी प्रशासन ने तथाकथित बर्थ टूरिज्म यानी बच्चे को जन्म देने के उद्देश्य से अमेरिका की यात्रा करने वाले मामलों पर भी सख्ती की है। विदेश विभाग के अनुसार, उत्तरी अफ्रीका में एक अमेरिकी मिशन ने ऐसे 100 से अधिक मामलों में वीजा रद्द किए जिनका संबंध कथित बर्थ टूरिज्म से था। बर्थ टूरिज्म लंबे समय से अमेरिकी आव्रजन नीति में विवाद का विषय रहा है। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि वीजा प्रणाली का इस्तेमाल अमेरिकी आव्रजन कानूनों के उद्देश्य के खिलाफ नहीं किया जाना चाहिए।
हिंसा का समर्थन करने वाले बयानों पर भी नजर
वीजा कार्रवाई का दायरा केवल पारंपरिक आपराधिक मामलों तक सीमित नहीं दिखाई दे रहा है। अमेरिकी प्रशासन ने ऐसे लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की है जिनके बयानों या गतिविधियों को हिंसा के समर्थन से जोड़कर देखा गया। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, कुछ ऐसे लोगों के वीजा भी रद्द किए गए जिन पर अमेरिकी नागरिकों के खिलाफ हिंसा या हिंसक गतिविधियों के समर्थन से जुड़े आरोप थे। इससे यह संकेत मिलता है कि ट्रंप प्रशासन विदेशी नागरिकों की जांच में सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़े पहलुओं को अधिक महत्व दे रहा है।
राष्ट्रीय सुरक्षा सबसे अहम मुद्दा
वीजा रद्द करने के पीछे राष्ट्रीय सुरक्षा भी एक प्रमुख आधार बताया गया है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यदि किसी विदेशी नागरिक से राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा माना जाता है तो उसके वीजा की समीक्षा की जा सकती है। अमेरिका ने पिछले डेढ़ साल में वीजा स्क्रीनिंग और सुरक्षा जांच को व्यापक बनाने की दिशा में कई कदम उठाए हैं। विदेश विभाग ने भी अलग-अलग श्रेणियों के आवेदकों के लिए अतिरिक्त जांच और स्क्रीनिंग संबंधी नीतियां लागू की हैं।
छात्र और प्रोफेशनल भी सख्त जांच के दायरे में
ट्रंप प्रशासन की वीजा नीति का असर केवल पर्यटकों तक सीमित नहीं है। छात्र, प्रोफेशनल और अन्य गैर-आप्रवासी वीजा धारक भी जांच के दायरे में हैं। इससे पहले अमेरिकी अधिकारियों ने बड़ी संख्या में छात्र वीजा समेत अन्य वीजा रद्द किए थे। 2026 की शुरुआत में 1 लाख से अधिक वीजा रद्द होने की रिपोर्ट सामने आई थी। अमेरिकी सरकार की ओर से लगातार यह संदेश दिया जा रहा है कि वीजा धारकों को अमेरिकी कानून और अपने वीजा की शर्तों का पूरी तरह पालन करना होगा।
सोशल मीडिया स्क्रीनिंग भी बढ़ी
ट्रंप प्रशासन ने वीजा प्रक्रिया में सुरक्षा और पृष्ठभूमि जांच को और कड़ा किया है। सोशल मीडिया गतिविधियों की समीक्षा भी इस व्यापक स्क्रीनिंग व्यवस्था का हिस्सा बनी है। प्रशासन का तर्क है कि आवेदकों के सार्वजनिक बयानों और गतिविधियों को समझना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकता है। हालांकि, आलोचकों ने इस तरह की व्यापक जांच को लेकर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और निष्पक्षता से जुड़े सवाल भी उठाए हैं।
वीजा रद्द होना और अमेरिका से निर्वासन अलग-अलग चीजें
यह समझना जरूरी है कि वीजा रद्द होना और निर्वासन एक ही प्रक्रिया नहीं है। वीजा मुख्य रूप से अमेरिका की यात्रा और प्रवेश के लिए अनुमति से जुड़ा दस्तावेज है। किसी व्यक्ति का वीजा रद्द होने के बाद उसके अमेरिका में प्रवेश की स्थिति प्रभावित हो सकती है।
अमेरिकी विदेश विभाग के नियमों के अनुसार, वीजा रद्द करने के लिए निर्धारित कानूनी आधार और पात्रता संबंधी नियम लागू होते हैं। इसलिए 1.75 लाख वीजा रद्द होने के आंकड़े को सीधे 1.75 लाख लोगों के निर्वासन के आंकड़े के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
अमेरिका में वीजा एक 'विशेषाधिकार'
ट्रंप प्रशासन ने इस पूरी कार्रवाई के संदर्भ में यह संदेश दोहराया है कि अमेरिकी वीजा कोई स्थायी अधिकार नहीं है। विदेश विभाग का कहना है कि वीजा मिलने के बाद भी यदि परिस्थितियां बदलती हैं या व्यक्ति पात्रता की शर्तों को पूरा नहीं करता, तो वीजा रद्द किया जा सकता है। अमेरिकी कानून में भी कुछ विशेष परिस्थितियों में वीजा रद्द करने का प्रावधान है। विदेश विभाग के आधिकारिक नियमों के अनुसार, वीजा रद्द करने की शक्ति का इस्तेमाल कानूनी आधार और पात्रता के निर्धारण के अनुसार किया जाना चाहिए।
ट्रंप की 'अमेरिका फर्स्ट' नीति का हिस्सा
ट्रंप प्रशासन की आव्रजन नीति का केंद्रीय विचार अमेरिकी सीमाओं और नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देना रहा है। दूसरे कार्यकाल में यह नीति और अधिक सख्त रूप में दिखाई दे रही है। वीजा रद्द करने का नया आंकड़ा इसी व्यापक नीति का हिस्सा माना जा रहा है। प्रशासन अवैध आव्रजन, वीजा नियमों के उल्लंघन, आपराधिक गतिविधियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों पर सख्त रुख अपना रहा है। अमेरिकी सरकार का कहना है कि वह उन लोगों को अमेरिका में प्रवेश या रहने की अनुमति नहीं देना चाहती जो कानून का उल्लंघन करते हैं या देश की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं।
आलोचना भी तेज
हालांकि प्रशासन इस नीति को सार्वजनिक सुरक्षा और कानून के पालन से जोड़कर देख रहा है, लेकिन इसके आलोचक व्यापक वीजा रद्दीकरण और सख्त स्क्रीनिंग को लेकर सवाल उठा रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि वीजा कार्रवाई में पारदर्शिता, उचित प्रक्रिया और व्यक्तिगत मामलों की निष्पक्ष समीक्षा बेहद जरूरी है। खासकर उन मामलों में जहां किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी या आरोप को अंतिम दोषसिद्धि से अलग समझना आवश्यक हो सकता है। मानवाधिकार और प्रवासी अधिकार समूहों ने भी ट्रंप प्रशासन की कठोर आव्रजन नीतियों पर चिंता जताई है।
आगे और बढ़ सकती है संख्या
अमेरिकी विदेश विभाग के ताजा आंकड़ों से साफ है कि वीजा रद्द करने की प्रक्रिया अभी जारी है। जनवरी 2026 में जहां आंकड़ा 1 लाख से अधिक बताया गया था, वहीं अगस्त तक यह 1.75 लाख के पार पहुंच चुका है। यदि प्रशासन की मौजूदा नीति जारी रहती है तो आने वाले महीनों में वीजा रद्द किए जाने की संख्या और बढ़ सकती है। इससे अमेरिका जाने की योजना बना रहे विदेशी नागरिकों के लिए नियमों और दस्तावेजों की सही जानकारी रखना पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।
भारतीय आवेदकों के लिए क्या मायने?
अमेरिका की सख्त वीजा नीति का असर भारतीय नागरिकों पर भी अप्रत्यक्ष रूप से पड़ सकता है। भारत से बड़ी संख्या में छात्र, आईटी प्रोफेशनल, कारोबारी और पर्यटक अमेरिका जाते हैं। ऐसे में वीजा नियमों का पालन करना और आवेदन के दौरान सही जानकारी देना बेहद महत्वपूर्ण है। हालांकि उपलब्ध ताजा आंकड़ों में 1.75 लाख रद्द किए गए वीजा में भारतीय नागरिकों की कोई अलग संख्या नहीं बताई गई है। इसलिए इस आंकड़े को भारत के लिए सीधे लागू करना सही नहीं होगा। भारतीय आवेदकों को अपने वीजा की श्रेणी, अमेरिका में रहने की अनुमति और उससे जुड़ी शर्तों का पालन करना चाहिए। किसी भी आपराधिक मामले या वीजा उल्लंघन की स्थिति में भविष्य की अमेरिकी यात्रा प्रभावित हो सकती है।
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