काठमांडू : नेपाल में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचा दी है। नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 469 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि बड़ी संख्या में लोग अभी भी लापता हैं। राहत और बचाव टीमें मलबे में जिंदगी तलाशने में जुटी हैं। इस त्रासदी में नेपाल के अलावा विदेशी नागरिक भी प्रभावित हुए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, 30 से ज्यादा देशों के नागरिकों से संपर्क नहीं हो पाया है, जिनमें बड़ी संख्या में भारतीय भी शामिल हैं।

ग्लेशियर टूटने के बाद आई विनाशकारी बाढ़
विशेषज्ञों के शुरुआती आकलन के मुताबिक, यह आपदा हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर टूटने और उसके बाद आए मलबे के तेज बहाव से जुड़ी बताई जा रही है। पानी, बर्फ और चट्टानों के मिश्रण ने कई इलाकों में भारी नुकसान पहुंचाया। बाढ़ के तेज बहाव में कई गांव, सड़कें, पुल और अन्य बुनियादी ढांचे तबाह हो गए। कई इलाकों का संपर्क टूट गया है, जिससे राहत कार्यों में भी मुश्किलें आ रही हैं।
भारतीयों की तलाश जारी
नेपाल में फंसे भारतीय नागरिकों को लेकर भारत सरकार और दूतावास लगातार संपर्क में हैं। कई भारतीयों के सुरक्षित होने की जानकारी भी सामने आई है, लेकिन अब भी कई लोगों की तलाश जारी है। भारतीय एजेंसियां नेपाल प्रशासन के साथ मिलकर प्रभावित क्षेत्रों में सहायता और बचाव कार्यों में सहयोग कर रही हैं।
राहत अभियान में जुटी सेना और बचाव दल
नेपाल सेना, पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीमें हेलीकॉप्टर, खोजी दल और अन्य संसाधनों के जरिए बचाव अभियान चला रही हैं। दुर्गम पहाड़ी इलाकों में मलबा हटाकर लोगों को निकालने का काम लगातार जारी है। कई परिवार अब भी अपने लापता परिजनों की तलाश में जुटे हैं। अस्पतालों और राहत केंद्रों में प्रभावित लोगों की जानकारी जुटाई जा रही है।
फिर नई बाढ़ का खतरा
आपदा के बाद कुछ क्षेत्रों में दोबारा बाढ़ का खतरा भी बना हुआ है। मलबे से बनी झीलों और जलभराव को लेकर विशेषज्ञों ने चेतावनी जारी की है। प्रशासन संभावित खतरे वाले इलाकों पर नजर बनाए हुए है। नेपाल की यह त्रासदी हिमालयी क्षेत्रों में बढ़ते प्राकृतिक खतरों की गंभीर तस्वीर पेश कर रही है। फिलहाल प्राथमिकता मलबे में दबे लोगों को निकालने और प्रभावितों तक राहत पहुंचाने की है।
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