Brussels ब्रसेल्स: पाकिस्तान सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की बहन नूरीन नियाज़ी के हालिया इंटरव्यू में दिए गए बयानों की आलोचना करते हुए उन्हें राष्ट्रीय हितों के लिए नुकसानदेह बताया है। पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने नियाज़ी पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की छवि खराब करने का आरोप लगाया, जबकि मंत्री तारिक फज़ल चौधरी और तलाल चौधरी ने कहा कि ऐसे बयानों से वैश्विक मंच पर देश की विश्वसनीयता कम होती है।
इसके उलट, एक रिपोर्ट में बताया गया है कि इमरान खान की पूर्व पत्नी जेमिमा गोल्डस्मिथ ने अधिकारियों की आलोचना की है। उन्होंने इसे राजनीतिक बातचीत को अपराध की श्रेणी में लाने और सार्वजनिक चर्चा के लिए कम होती जगह के तौर पर देखा है।
खबरों के मुताबिक, सोशल मीडिया पर नूरीन नियाज़ी का इंटरव्यू बड़े पैमाने पर फैलने के बाद, पाकिस्तान की नेशनल साइबर क्राइम इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NCCIA) ने उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया। उन पर "गलत, अपमानजनक और भड़काऊ" जानकारी फैलाने का आरोप था।
ग्रीक वकील, लेखिका और पत्रकार दिमित्रा स्टाइकोउ ने 'यूरोपा वायर' में लिखा, "नूरीन नियाज़ी से जुड़ी एक ऑनलाइन राजनीतिक चर्चा पाकिस्तान में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े विवाद में बदल गई। अधिकारियों ने उन बयानों की जांच की जो उन्होंने कथित तौर पर अमेरिका, भारत, ईरान के साथ देश के संबंधों और अब्राहम समझौते के संभावित विस्तार के बारे में दिए थे। यह मामला इसलिए अहम नहीं है कि उन्होंने क्या राय रखी, बल्कि इसलिए अहम है कि सरकार ने राजनीतिक टिप्पणी को पाकिस्तान की कूटनीतिक विश्वसनीयता और राष्ट्रीय हितों के लिए संभावित खतरे के तौर पर देखा।"
स्टाइकोउ के अनुसार, इस मामले का महत्व नियाज़ी के बयानों की सामग्री से कम और इस बात से ज़्यादा है कि उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले के तौर पर कैसे पेश किया गया।
उन्होंने कहा, "सार्वजनिक राजनीतिक बयान का आपराधिक जांच के विषय में बदलना इस बात को दिखाता है कि देश जानकारी, राजनीतिक बातचीत और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच के रिश्ते को कैसे देखते हैं। जानकारी को अब सिर्फ़ जनमत बनाने के साधन के तौर पर नहीं देखा जाता; यह तेज़ी से एक रणनीतिक संसाधन बन गई है, जिसके सामाजिक एकता, अंतरराष्ट्रीय विश्वसनीयता और देश की कूटनीतिक स्थिति पर संभावित असर पड़ सकते हैं।"
रिपोर्ट में कहा गया है कि नियाज़ी का मामला घरेलू राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के दायरे से कहीं आगे का है। यह दिखाता है कि जानकारी पर नियंत्रण और उसका प्रबंधन राष्ट्रीय शक्ति के अहम तत्व बन गए हैं। इसमें कहा गया है, “चाहे व्यक्त किए गए विचारों में कितनी भी सच्चाई क्यों न हो, पाकिस्तानी अधिकारियों की प्रतिक्रिया यह दिखाती है कि इस तरह की घटनाओं को 'स्ट्रैटेजिक कम्युनिकेशन' (रणनीतिक संचार) की एक बड़ी रणनीति का हिस्सा बनाया जा सकता है। इस रणनीति के ज़रिए कोई देश एक ज़िम्मेदार और भरोसेमंद अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी के तौर पर अपनी छवि मज़बूत करने, अपनी संस्थागत वैधता बनाए रखने और उन नैरेटिव्स (धारणाओं) को संभालने की कोशिश करता है जो उसके राष्ट्रीय हितों पर असर डालते हैं।”
इसमें कहा गया कि नियाज़ी का मामला असल में आधुनिक भू-राजनीति (geopolitics) की एक बड़ी सच्चाई को दर्शाता है: “देश न केवल इलाक़े, रणनीतिक संसाधनों या सैन्य संतुलन पर नियंत्रण के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं, बल्कि उन नैरेटिव्स पर नियंत्रण के लिए भी होड़ करते हैं जो अंतरराष्ट्रीय वैधता, विश्वसनीयता और अंततः सत्ता के इस्तेमाल को आकार देते हैं।”