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लाल सागर में हूती हमलों पर कुवैत ने जताई कड़ी आपत्ति

Nil dhankar
26 July 2026 1:02 PM IST
लाल सागर में हूती हमलों पर कुवैत ने जताई कड़ी आपत्ति
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कुवैत। होर्मुज ईरान और अमेरिका के बीच बड़े विवाद की वजह है। खाड़ी क्षेत्र भी इसे लेकर संवेदनशील है। इन सब सवालों जवाबों के बीच ईरान ने ओमान से बात की। तेहरान का कहा है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के प्रबंधन को लेकर ओमान के साथ हुई वार्ता में सकारात्मक प्रगति हुई है। वहीं दूसरी ओर, लाल सागर में हूती विद्रोहियों द्वारा जहाजों पर किए गए हमलों की कुवैत ने कड़ी निंदा करते हुए सऊदी अरब के जवाबी कदमों का समर्थन किया है।

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने बताया कि ईरान और ओमान के उप-विदेश मंत्रियों के बीच शुक्रवार और शनिवार को तेहरान में होर्मुज के प्रबंधन को लेकर बातचीत हुई। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों ने दोनों तटीय देशों के संप्रभु अधिकारों का सम्मान करते हुए स्ट्रेट में सुरक्षित समुद्री यातायात सुनिश्चित करने के साझा सिद्धांतों और व्यावहारिक व्यवस्थाओं पर विचार-विमर्श किया। बाघेई के अनुसार, यह वार्ता उपयोगी रही और इसमें प्रगति हुई है। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच तकनीकी और राजनीतिक स्तर पर बातचीत अभी भी जारी है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही की स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ है। वहीं, कुवैत के विदेश मंत्रालय ने लाल सागर में जहाजों पर हूती विद्रोहियों के हमलों की कड़ी निंदा की है। मंत्रालय ने शनिवार को लाल सागर में सऊदी जहाज एनसीसी एमएएसए पर हुए हमले को अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन और समुद्री सुरक्षा, नौवहन की स्वतंत्रता तथा वैश्विक व्यापार के लिए सीधा खतरा बताया। कुवैत ने अपने बयान में सऊदी अरब के साथ पूर्ण एकजुटता व्यक्त करते हुए कहा कि वह अपनी संप्रभुता, सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए सऊदी अरब द्वारा उठाए गए सभी कदमों का समर्थन करता है। इस बीच, अमेरिकी सेना ने एक वीडियो जारी किया है, जिसमें उसके अनुसार अमेरिकी बल एक तेल टैंकर पर चढ़ते हुए और दूसरे टैंकर को निष्क्रिय करते हुए दिखाई दे रहे हैं। इन जहाजों पर ईरान के खिलाफ लगाए गए अमेरिकी नौसैनिक प्रतिबंधों का उल्लंघन करने की कोशिश का आरोप है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) का कहना है कि अब तक 12 वाणिज्यिक जहाजों का मार्ग बदलवाया गया है, जबकि आदेशों का पालन नहीं करने पर दो जहाजों को निष्क्रिय कर दिया गया।

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