बलूचिस्तान: पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में लोगों के जबरन गायब किए जाने की घटनाओं से मानवाधिकार और जवाबदेही को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। 'द बलूचिस्तान पोस्ट' की रिपोर्ट के अनुसार, हाल की घटनाओं में तीन लोग कथित तौर पर गायब हो गए हैं। वहीं, 13 साल से ज़्यादा समय पहले गायब हुए दो लोगों के परिवारों ने न्याय और उनके ठिकाने के बारे में जानकारी की मांग फिर से उठाई है।
'द बलूचिस्तान पोस्ट' (TBP) की रिपोर्ट के मुताबिक, 16 साल के छात्र आगा गुल और 27 साल के हफीज़ुल्ला बलूच को अलग-अलग घटनाओं में क्वेटा से कथित तौर पर ले जाया गया। वहीं, किसान रफीक बलूच और मज़दूर शाकिर बलूच को अवारान ज़िले में देर रात चलाए गए एक ऑपरेशन के दौरान हिरासत में लिया गया। परिवार वालों ने इन मामलों में पाकिस्तानी सुरक्षा और खुफिया कर्मियों के शामिल होने का आरोप लगाया है।
शाकिर बलूच और उनकी पत्नी गुल बानुक, जिनके गायब होने की भी खबर थी, 24 अगस्त को मिल गए। हालांकि, 'द बलूचिस्तान पोस्ट' ने 'वॉयस फॉर बलूच मिसिंग पर्सन्स' (VBMP) का हवाला देते हुए बताया कि रफीक बलूच का अभी भी कोई पता नहीं चला है। ये नए आरोप बलूचिस्तान में लोगों के जबरन गायब किए जाने को लेकर लंबे समय से चली आ रही चिंताओं के बीच सामने आए हैं। 'द बलूचिस्तान पोस्ट' के अनुसार, क्वेटा प्रेस क्लब के बाहर VBMP का विरोध प्रदर्शन कैंप 6,300 दिनों से ज़्यादा समय से चल रहा है।
'द बलूचिस्तान पोस्ट' की रिपोर्ट में दाद मोहम्मद मारी और सालेह मोहम्मद मारी के मामलों का भी ज़िक्र किया गया है, जिनके रिश्तेदारों ने विरोध प्रदर्शन के दौरान उनके ठिकाने के बारे में जानकारी की मांग फिर से उठाई।
उनके परिवारों के अनुसार, इन दोनों लोगों को मार्च 2013 में क्वेटा में कथित तौर पर हिरासत में लिया गया था और तब से वे लापता हैं।
'द बलूचिस्तान पोस्ट' के मुताबिक, VBMP के चेयरमैन नसरुल्ला बलूच ने लोगों को जबरन गायब करने को संवैधानिक अधिकारों और उचित कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन बताया। उन्होंने पाकिस्तानी अधिकारियों से हिरासत में लिए गए लोगों के ठिकाने बताने, उन्हें अदालत के सामने पेश करने और पारदर्शी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करने की अपील की।
इस बीच, बलूच अधिकार समूह 'पांक' (Paank) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर अवारान में आधी रात को हुई कथित छापेमारी की निंदा की। समूह ने पाकिस्तानी सरकारी बलों पर एक महिला समेत तीन बलूच लोगों को जबरन गायब करने का आरोप लगाया।
'पांक' ने पाकिस्तान से उनके ठिकाने का खुलासा करने और उनकी सुरक्षा व उचित कानूनी प्रक्रिया सुनिश्चित करने की मांग की। 'द बलूचिस्तान पोस्ट' की रिपोर्ट के अनुसार, हाल के मामलों ने बलूचिस्तान में मनमाने ढंग से हिरासत में लेने और लोगों के गायब होने के आरोपों पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं, और पीड़ित परिवार तथा मानवाधिकार समूह जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।