नई दिल्ली: भारत और फ्रांस के रणनीतिक संबंध अब पारंपरिक रक्षा खरीद से आगे बढ़कर संयुक्त अनुसंधान, तकनीक हस्तांतरण, सह-विकास और भारत में रक्षा उत्पादन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। राफेल लड़ाकू विमान, स्कॉर्पीन पनडुब्बियां, फाइटर जेट इंजन और भविष्य के अत्याधुनिक लड़ाकू विमान इस साझेदारी के प्रमुख स्तंभ बन रहे हैं। दोनों देशों के नेतृत्व ने 2026 में रक्षा प्लेटफॉर्म और उन्नत तकनीकों के co-design, co-development और co-production को और तेज करने पर सहमति जताई है।

भारत और फ्रांस की रक्षा साझेदारी दशकों पुरानी है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इसका दायरा तेजी से बढ़ा है। भारत के लिए फ्रांस एक महत्वपूर्ण रक्षा और रणनीतिक साझेदार के रूप में उभरा है। दोनों देशों के बीच सहयोग अब केवल हथियार खरीदने और बेचने तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत में उत्पादन और स्वदेशी रक्षा क्षमताओं के विकास पर जोर दिया जा रहा है।
भारतीय वायुसेना पहले से फ्रांस से खरीदे गए 36 राफेल लड़ाकू विमानों का संचालन कर रही है। इन विमानों की डिलीवरी 2022 में पूरी हो गई थी। इसके बाद राफेल प्लेटफॉर्म को लेकर सहयोग भारतीय नौसेना तक पहुंच गया। अप्रैल 2025 में भारत और फ्रांस ने भारतीय नौसेना के लिए 26 Rafale-Marine विमानों की खरीद के अंतर-सरकारी समझौते पर हस्ताक्षर किए। इनमें 22 सिंगल-सीटर और चार ट्विन-सीटर विमान शामिल हैं। इनकी डिलीवरी 2030 तक पूरी किए जाने की योजना है। राफेल-मरीन को भारतीय नौसेना के एयरक्राफ्ट कैरियर से संचालित किया जाएगा। इसकी एक बड़ी खासियत भारतीय वायुसेना में पहले से मौजूद राफेल विमानों के साथ समानता है। इससे प्रशिक्षण, लॉजिस्टिक्स और रखरखाव के मामले में भारतीय सशस्त्र बलों को फायदा मिलने की उम्मीद है।
राफेल-मरीन समझौते में आत्मनिर्भर भारत अभियान को भी जगह दी गई है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार इसमें भारत में स्वदेशी हथियारों के एकीकरण के लिए तकनीक हस्तांतरण के साथ राफेल फ्यूजलेज उत्पादन सुविधा तथा विमान के इंजन, सेंसर और हथियारों के लिए Maintenance, Repair and Overhaul सुविधाएं स्थापित करने का प्रावधान शामिल है।
114 अतिरिक्त राफेल पर भी बढ़ी हलचल
भारत की भविष्य की वायु शक्ति में राफेल की भूमिका और बड़ी हो सकती है। भारतीय वायुसेना के लिए 114 अतिरिक्त राफेल विमानों की संभावित खरीद की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। मई 2026 में भारत ने इसके लिए Letter of Request को अंतिम रूप दिया था। रिपोर्ट के मुताबिक प्रस्तावित 114 विमानों में करीब 90 का निर्माण भारत में किए जाने की योजना पर काम हो रहा है।
फ्रांस की सीनेट में जून के अंत में हुई चर्चा के दौरान भी 114 विमानों के प्रस्ताव और भारत में बड़ी संख्या में विमानों की फाइनल असेंबली की संभावना का उल्लेख किया गया। हालांकि यह प्रक्रिया अभी अंतिम अनुबंध तक नहीं पहुंची है, इसलिए 114 राफेल को पक्का सौदा मानना फिलहाल सही नहीं होगा। अगर प्रस्ताव अंतिम समझौते तक पहुंचता है तो यह भारतीय वायुसेना के आधुनिकीकरण के साथ देश के एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
स्कॉर्पीन ने मजबूत की समुद्री साझेदारी
भारत-फ्रांस रक्षा सहयोग का दूसरा बड़ा उदाहरण Project-75 Scorpene है। इस परियोजना के तहत छह कलवरी श्रेणी की स्कॉर्पीन पनडुब्बियों का निर्माण मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड में फ्रांसीसी सहयोग से किया गया। छठी पनडुब्बी जनवरी 2025 में भारतीय नौसेना में शामिल हुई।
इस परियोजना का महत्व केवल छह पनडुब्बियां हासिल करने तक सीमित नहीं है। इससे भारत में पनडुब्बी निर्माण की औद्योगिक क्षमता और तकनीकी अनुभव विकसित करने में भी मदद मिली है।
भारत और फ्रांस ने पनडुब्बियों के क्षेत्र में सहयोग जारी रखने की इच्छा भी जताई है। फरवरी 2026 के संयुक्त बयान में दोनों देशों के नेताओं ने भारत में बने स्कॉर्पीन कार्यक्रम की सफलता का उल्लेख करते हुए submarine cooperation जारी रखने का स्वागत किया। इससे पहले दोनों देश DRDO द्वारा विकसित Air Independent Propulsion यानी AIP प्रणाली को P75 स्कॉर्पीन पनडुब्बियों में एकीकृत करने से जुड़े काम और भविष्य की पनडुब्बियों में Integrated Combat System की संभावनाओं पर भी चर्चा कर चुके हैं।
फाइटर जेट इंजन तकनीक पर बड़ा फोकस
आधुनिक लड़ाकू विमान बनाने की सबसे कठिन तकनीकों में उनका इंजन शामिल है। भारत लंबे समय से स्वदेशी लड़ाकू विमान इंजन क्षमता विकसित करने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में फ्रांस के साथ इंजन क्षेत्र में बढ़ता सहयोग रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।
फरवरी 2026 में भारत और फ्रांस ने हेलीकॉप्टर और जेट इंजन में सहयोग आगे बढ़ाने पर चर्चा का स्वागत किया। दोनों देशों ने विशेष रूप से लड़ाकू विमान और combat aircraft engines के निर्माण में साझेदारी मजबूत करने की इच्छा जताई है। फ्रांसीसी कंपनी Safran और भारतीय संस्थाओं के बीच भी कई स्तर पर सहयोग बढ़ रहा है। Safran और HAL भारतीय Multi Role Helicopter के लिए इंजन क्षेत्र में साथ काम कर रहे हैं। इसके अलावा भारत में Rafale के M88 इंजन के लिए MRO सुविधा स्थापित करने की दिशा में भी काम हो रहा है।
अब नजर छठी पीढ़ी के फाइटर जेट पर
भारत-फ्रांस रक्षा संबंधों का सबसे महत्वाकांक्षी संभावित अध्याय छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान से जुड़ सकता है। जून 2026 की रिपोर्टों के मुताबिक दोनों देशों के बीच भविष्य के sixth-generation fighter aircraft पर संभावित संयुक्त परियोजना को लेकर बातचीत हुई है।
यह अभी शुरुआती चर्चा का विषय है, कोई अंतिम संयुक्त कार्यक्रम घोषित नहीं हुआ है। इसलिए इसे तय परियोजना के बजाय भविष्य की संभावित रणनीतिक साझेदारी के रूप में देखना चाहिए। छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान मौजूदा पांचवीं पीढ़ी के विमानों से आगे की तकनीक पर आधारित होंगे। दुनिया की प्रमुख सैन्य शक्तियां ऐसे प्लेटफॉर्म पर काम कर रही हैं, जिनमें अत्यधिक उन्नत स्टील्थ, नेटवर्क आधारित युद्ध क्षमता, मानव रहित प्रणालियों के साथ संचालन, उन्नत सेंसर और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी क्षमताओं की भूमिका बढ़ने की उम्मीद है। यदि भारत और फ्रांस भविष्य में इस स्तर के विमान पर औपचारिक रूप से साथ आते हैं तो यह भारत के लिए केवल नया विमान हासिल करने का मामला नहीं होगा। इसकी वास्तविक अहमियत डिजाइन, इंजन, सेंसर, इलेक्ट्रॉनिक्स और भविष्य की युद्ध तकनीक विकसित करने की क्षमता हासिल करने में होगी।
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