AI कितना पानी खा रहा है? नई स्टडी में चौंकाने वाले तथ्य

Update: 2025-12-24 15:34 GMT
Technology  ,टेक्नोलॉजी :आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को आमतौर पर डिजिटल दुनिया की तकनीक के रूप में देखा जाता है, लेकिन इसकी पर्यावरणीय लागत पर बहुत कम ध्यान दिया जाता है। हाल ही में प्रकाशित एक स्टडी में खुलासा हुआ है कि AI मॉडल और डेटासेंटर्स को चलाने में पानी की खपत बहुत अधिक होती है। इस अध्ययन ने तकनीकी दुनिया और पर्यावरण के बीच गहरे कनेक्शन को उजागर किया है।
AI मॉडल की ट्रेनिंग और ऑपरेशन के लिए बड़ी मात्रा में कंप्यूटिंग पावर की आवश्यकता होती है। इसके लिए डेटा सेंटर 24x7 चलते हैं और अत्यधिक बिजली के साथ-साथ भारी मात्रा में पानी का उपयोग भी करते हैं। पानी का इस्तेमाल मुख्य रूप से डेटा सेंटर की कूलिंग सिस्टम में होता है। सर्वरों को ठंडा रखने के लिए लाखों लीटर पानी हर साल खर्च होता है।
स्टडी में बताया गया है कि बड़े AI मॉडल जैसे GPT-4 या अन्य एनएलपी मॉडल्स की ट्रेनिंग के दौरान सिर्फ एक मॉडल को तैयार करने में हजारों लीटर पानी का इस्तेमाल हो सकता है। इसके अलावा, डेटा सेंटर में लगातार कंप्यूटिंग ऑपरेशन के कारण भी पानी की खपत लगातार होती रहती है। शोधकर्ताओं का कहना है कि यदि AI तकनीक की बढ़ती मांग को ध्यान में रखा जाए, तो आने वाले सालों में वैश्विक स्तर पर पानी की खपत में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल तकनीक का यह पक्ष अक्सर नजरअंदाज किया जाता है। लोगों को लगता है कि AI केवल सॉफ्टवेयर या क्लाउड तकनीक है, लेकिन इसके पीछे भारी मात्रा में भौतिक संसाधन खर्च होते हैं। केवल बिजली ही नहीं, बल्कि पानी, जमीन और कच्चे माल का भी इस्तेमाल होता है। स्टडी ने चेतावनी दी है कि अगर AI के विकास को बिना पर्यावरणीय योजना के बढ़ाया गया, तो यह जल संसाधनों पर दबाव डाल सकता है।
कुछ डेटा सेंटर जल उपयोग को कम करने के लिए नई तकनीक अपनाने लगे हैं। जै
से वॉटर-रेसाइक्लिंग सिस्टम, एयर
-कूलिंग तकनीक और ऊर्जा-कुशल सर्वर का उपयोग। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ये उपाय पर्याप्त नहीं हैं। वैश्विक स्तर पर AI के तेजी से बढ़ते उपयोग को देखते हुए, पानी की खपत और ऊर्जा का हिसाब किताब अभी भी चुनौती बना हुआ है।
स्टडी में यह भी बताया गया है कि AI की ट्रेनिंग के लिए इस्तेमाल होने वाले कंप्यूटर हार्डवेयर का निर्माण भी पर्यावरण पर असर डालता है। हार्डवेयर बनाने में धातु और अन्य संसाधनों की आवश्यकता होती है, जिससे पानी और ऊर्जा की खपत और बढ़ जाती है। यही वजह है कि तकनीकी कंपनियों को न केवल ऊर्जा बचत बल्कि पानी और संसाधनों की बचत के लिए भी योजनाएं बनानी होंगी।
विशेषज्ञों का सुझाव है कि AI विकास के साथ-साथ इसके पर्यावरणीय प्रभावों पर भी ध्यान देना आवश्यक है। कंपनियों को हरे और टिकाऊ डेटा सेंटर बनाने, पानी का पुनः उपयोग करने और AI मॉडल्स को कुशल बनाने पर जोर देना चाहिए। इसके अलावा आम लोगों और नीति निर्माताओं को भी AI के पर्यावरणीय प्रभाव की जानकारी रखना जरूरी है।
अंततः यह स्पष्ट हो गया है कि AI केवल डिजिटल दुनिया का सवाल नहीं है, बल्कि इसका संबंध प्राकृतिक संसाधनों और पर्यावरण से भी जुड़ा है। बड़े AI मॉडल और डेटा सेंटर जितना तकनीकी रूप से उन्नत हैं, उतना ही ये पानी और ऊर्जा पर दबाव डालते हैं। इस अध्ययन ने तकनीकी और पर्यावरणीय दुनिया के बीच संतुलन बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
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