iPhone यूजर्स की प्राइवेसी पर Tim Cook का बड़ा बयान

Update: 2026-08-02 10:09 GMT

नई दिल्ली। टेक्नोलॉजी की दुनिया में यूजर्स की प्राइवेसी को लेकर Apple ने कुछ साल पहले ऐसा कदम उठाया था, जिसने पूरी डिजिटल विज्ञापन इंडस्ट्री को प्रभावित कर दिया। Apple के CEO Tim Cook ने साफ किया था कि यूजर्स को यह अधिकार मिलना चाहिए कि उनका डेटा कौन इस्तेमाल करे और किस तरह इस्तेमाल किया जाए। इसी सोच के तहत कंपनी ने App Tracking Transparency यानी ATT फीचर पेश किया, जिसने Facebook जैसी बड़ी कंपनियों के डेटा ट्रैकिंग मॉडल को चुनौती दी।

साल 2020 में Tim Cook ने यूजर्स की ऑनलाइन प्राइवेसी को लेकर अपनी कंपनी की नीति स्पष्ट की थी। उन्होंने कहा था कि किसी भी कंपनी को यूजर की गतिविधियों को ट्रैक करने से पहले उसकी अनुमति लेना जरूरी होना चाहिए। Apple का कहना था कि यूजर की जानकारी और निजी डेटा पर सबसे पहला अधिकार खुद यूजर का होना चाहिए।

इसके बाद Apple ने iOS 14.5 अपडेट के साथ App Tracking Transparency फीचर को लागू किया। इस फीचर ने iPhone यूजर्स को यह नियंत्रण दिया कि वे किसी एप को अपनी ऑनलाइन गतिविधियों को ट्रैक करने की अनुमति देना चाहते हैं या नहीं।

ATT फीचर आने के बाद जब कोई एप यूजर की गतिविधियों को दूसरी एप्स या वेबसाइट्स पर ट्रैक करने की कोशिश करता है, तो iPhone पर एक पॉप-अप दिखाई देता है। इसमें यूजर के पास दो विकल्प होते हैं। पहला विकल्प होता है "Allow Tracking", जिसके जरिए यूजर एप को ट्रैकिंग की अनुमति दे सकता है। दूसरा विकल्प होता है "Ask App Not to Track", जिसके जरिए यूजर ट्रैकिंग को रोक सकता है।

अगर कोई यूजर ट्रैकिंग से इनकार करता है तो एप्स Apple के Identifier for Advertisers यानी IDFA का इस्तेमाल नहीं कर पाते। IDFA एक ऐसा सिस्टम था, जिसकी मदद से विज्ञापन कंपनियां यूजर की पसंद, ऑनलाइन व्यवहार और रुचियों के आधार पर विज्ञापन दिखाने के लिए डेटा जुटाती थीं।

Apple के इस कदम का सबसे ज्यादा असर Facebook जैसी कंपनियों पर पड़ा, जिनका बिजनेस बड़े पैमाने पर डिजिटल विज्ञापन और यूजर डेटा पर आधारित है। पहले कंपनियां यूजर्स की ऑनलाइन गतिविधियों को ट्रैक करके उनके लिए व्यक्तिगत विज्ञापन तैयार करती थीं, लेकिन ATT के बाद उन्हें यूजर की स्पष्ट अनुमति लेना अनिवार्य हो गया।

Facebook ने उस समय Apple के इस फैसले का विरोध भी किया था। कंपनी का कहना था कि इससे छोटे कारोबारों और विज्ञापनदाताओं को नुकसान हो सकता है, क्योंकि वे ग्राहकों तक पहुंचने के लिए व्यक्तिगत विज्ञापन का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि Apple ने अपनी नीति में बदलाव नहीं किया और कहा कि यूजर की निजता किसी भी व्यावसायिक मॉडल से ज्यादा महत्वपूर्ण है।

Tim Cook लगातार कई मौकों पर कह चुके हैं कि डेटा प्राइवेसी एक बुनियादी अधिकार है। Apple ने इसी नीति के तहत अपने डिवाइस और ऑपरेटिंग सिस्टम में कई ऐसे फीचर्स शामिल किए हैं, जिनका उद्देश्य यूजर्स को अपने डेटा पर अधिक नियंत्रण देना है।

ATT फीचर के आने के बाद डिजिटल विज्ञापन की दुनिया में बड़ा बदलाव देखने को मिला। विज्ञापन कंपनियों को अब नए तरीकों पर काम करना पड़ा और यूजर डेटा के इस्तेमाल को लेकर ज्यादा पारदर्शिता अपनानी पड़ी।

विशेषज्ञों के अनुसार, Apple का यह कदम टेक इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा संदेश था कि भविष्य में कंपनियों को यूजर्स की प्राइवेसी को प्राथमिकता देनी होगी। iPhone यूजर्स के लिए यह फीचर एक महत्वपूर्ण बदलाव साबित हुआ, क्योंकि इससे उन्हें यह तय करने का अधिकार मिला कि उनका डेटा किस हद तक इस्तेमाल किया जा सकता है।

आज भी Apple अपनी मार्केटिंग में प्राइवेसी को एक बड़ी खासियत के रूप में पेश करता है। Tim Cook का यह फैसला टेक जगत में एक ऐसे बदलाव के रूप में देखा जाता है, जिसने यूजर डेटा और डिजिटल विज्ञापन के बीच संतुलन को लेकर नई बहस शुरू कर दी।

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