तनिष्का कालभैरव ने जीता महिला एकल खिताब, अंडर-15 फाइनल में चूकीं तीसरी ट्रॉफी
बेंगलुरु। स्वर्गीय बीएम श्रीनिवासैया की स्मृति में आयोजित 5वें स्टेट-रैंकिंग टेबल टेनिस टूर्नामेंट में युवा खिलाड़ी तनिष्का कालभैरव के लिए दिन मिला-जुला रहा। 13 वर्षीय तनिष्का ने शानदार प्रदर्शन करते हुए विमेंस सिंगल्स का खिताब अपने नाम किया, लेकिन अंडर-15 गर्ल्स सिंगल्स के फाइनल में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इससे टूर्नामेंट में उनकी तीसरी विजेता ट्रॉफी जीतने की उम्मीद पूरी नहीं हो सकी।
तनिष्का ने इससे एक दिन पहले ही अंडर-17 गर्ल्स सिंगल्स का खिताब जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया था। लगातार मुकाबलों के बावजूद उन्होंने विमेंस सिंगल्स में भी शानदार खेल दिखाया और फाइनल में कड़ी चुनौती का सामना करते हुए जीत दर्ज की।
विमेंस सिंगल्स में रोमांचक मुकाबला
विमेंस सिंगल्स के फाइनल में तनिष्का का सामना देशना एम. वंशिका से हुआ। दोनों खिलाड़ियों के बीच मुकाबला काफी रोमांचक रहा और कई गेम में दोनों ने एक-दूसरे को कड़ी टक्कर दी।
तनिष्का ने मुकाबले की शुरुआत आक्रामक अंदाज में की और पहला गेम 11-5 से अपने नाम किया। हालांकि, देशना ने तुरंत वापसी करते हुए दूसरा गेम 11-8 से जीत लिया। इसके बाद तनिष्का ने तीसरे गेम में अपनी रणनीति बदली और 11-6 से बढ़त हासिल कर ली।
चौथे गेम में दोनों खिलाड़ियों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली। देशना ने दबाव के बावजूद धैर्य बनाए रखा और 12-10 से गेम जीतकर मुकाबले को बराबरी की ओर ला दिया। इसके बाद पांचवें गेम में भी देशना ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 11-8 से जीत दर्ज की और तनिष्का पर दबाव बढ़ा दिया।
निर्णायक गेम में तनिष्का ने दिखाया धैर्य
मुकाबला 2-3 से पिछड़ने के बाद तनिष्का के लिए चुनौतीपूर्ण स्थिति में पहुंच गया था। ऐसे समय में उन्होंने अपने खेल पर नियंत्रण बनाए रखा और छठे गेम में जोरदार वापसी की। उन्होंने 11-8 से गेम जीतकर मुकाबले को निर्णायक सातवें गेम तक पहुंचा दिया।
निर्णायक गेम में तनिष्का ने शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया। उन्होंने देशना को लय में आने का ज्यादा मौका नहीं दिया और लगातार अंक हासिल किए। अंततः तनिष्का ने सातवां गेम 11-3 से जीतकर फाइनल अपने नाम कर लिया।
इस तरह उन्होंने मैच 11-5, 8-11, 11-6, 10-12, 8-11, 11-8, 11-3 के स्कोर से जीता। सात गेम तक चले इस मुकाबले में तनिष्का ने दबाव में बेहतर प्रदर्शन करते हुए खिताब हासिल किया।
अंडर-17 खिताब के बाद एक और सफलता
तनिष्का के लिए यह टूर्नामेंट इसलिए भी खास रहा क्योंकि उन्होंने एक दिन पहले ही अंडर-17 सिंगल्स का खिताब जीता था। उम्र में अपने से बड़ी खिलाड़ियों के बीच प्रतिस्पर्धा करते हुए उन्होंने लगातार मजबूत प्रदर्शन किया।
अंडर-17 खिताब के बाद विमेंस सिंगल्स में जीत ने उनकी बहुमुखी प्रतिभा और फिटनेस को भी सामने रखा। लगातार मैच खेलने के बावजूद तनिष्का ने अपनी एकाग्रता बनाए रखी और निर्णायक मुकाबले में मानसिक मजबूती का प्रदर्शन किया।
महिला एकल के फाइनल में शुरुआती बढ़त गंवाने और फिर 2-3 से पिछड़ने के बाद जिस तरह उन्होंने वापसी की, वह उनके खेल कौशल के साथ-साथ दबाव से निपटने की क्षमता को भी दर्शाता है।
अंडर-15 फाइनल में सपना अधूरा
हालांकि, तनिष्का के लिए दिन पूरी तरह जीत से भरा नहीं रहा। अंडर-15 गर्ल्स सिंगल्स के फाइनल में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इस हार के साथ टूर्नामेंट में तीसरी विजेता ट्रॉफी हासिल करने की उनकी कोशिश सफल नहीं हो सकी।
अंडर-15 फाइनल में पहुंचकर उन्होंने निश्चित रूप से एक और मजबूत प्रदर्शन किया, लेकिन निर्णायक मुकाबले में वह खिताब अपने नाम नहीं कर सकीं। इसके बावजूद एक ही टूर्नामेंट में अंडर-17 और विमेंस सिंगल्स जैसे वर्गों में खिताब जीतना उनके लिए बड़ी उपलब्धि रही।
युवा प्रतिभा के रूप में उभर रहीं तनिष्का
महज 13 साल की उम्र में तनिष्का का सीनियर वर्ग की प्रतियोगिता में लगातार अच्छा प्रदर्शन करना कर्नाटक टेबल टेनिस के लिए सकारात्मक संकेत माना जा सकता है। वह अपने से अधिक उम्र और अनुभव वाली खिलाड़ियों के खिलाफ खेलते हुए भी मुकाबलों में दबाव बनाने में सफल रही हैं।
देशना एम. वंशिका के खिलाफ विमेंस सिंगल्स का फाइनल इसका उदाहरण रहा। पांचवें गेम तक पिछड़ने के बाद तनिष्का ने मैच में वापसी की और निर्णायक गेम में स्पष्ट बढ़त के साथ जीत दर्ज की।
इस प्रदर्शन से यह भी साफ हुआ कि तनिष्का केवल अपनी उम्र की खिलाड़ियों के खिलाफ ही नहीं, बल्कि सीनियर स्तर पर भी चुनौती पेश करने की क्षमता रखती हैं। लगातार मुकाबलों के बीच फिटनेस और मानसिक मजबूती बनाए रखना उनकी प्रमुख खूबियों में दिखाई दिया।
खिताबों के साथ बढ़ा आत्मविश्वास
अंडर-15 में खिताब से चूकने के बावजूद तनिष्का इस टूर्नामेंट से दो महत्वपूर्ण खिताब लेकर बाहर निकली हैं। अंडर-17 और विमेंस सिंगल्स में जीत ने उनके आत्मविश्वास को निश्चित तौर पर बढ़ाया होगा।
स्वर्गीय बीएम श्रीनिवासैया की स्मृति में आयोजित इस राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में उनका प्रदर्शन युवा खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणादायक रहा। एक ही प्रतियोगिता में अलग-अलग आयु वर्ग और सीनियर वर्ग में चुनौती स्वीकार करना और दो खिताब जीतना उनके बढ़ते कद को दर्शाता है।
विमेंस सिंगल्स के फाइनल में देशना एम. वंशिका के खिलाफ सात गेम की रोमांचक जीत ने टूर्नामेंट को यादगार बना दिया। हालांकि अंडर-15 फाइनल में तीसरी ट्रॉफी से वह चूक गईं, लेकिन दो खिताब के साथ तनिष्का ने प्रतियोगिता में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई और भविष्य के लिए उम्मीदें बढ़ा दीं।