सावन प्रदोष व्रत की खास तारीख, भौम प्रदोष पर सवा 2 घंटे का शुभ पूजा समय
Religion धर्म : सावन महीने का अंतिम प्रदोष व्रत इस बार बेहद खास संयोग में पड़ रहा है। श्रावण शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाने वाला यह प्रदोष व्रत मंगलवार के दिन होने के कारण भौम प्रदोष व्रत कहलाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भौम प्रदोष व्रत भगवान शिव और मंगल ग्रह की कृपा प्राप्ति के लिए विशेष फलदायी माना जाता है। इस दिन त्रिपुष्कर योग का भी निर्माण हो रहा है, जिससे इस व्रत और पूजा का महत्व और बढ़ गया है।
ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है। इस दिन विधि-विधान से शिवजी की पूजा, अभिषेक और मंत्र जाप करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। सावन का महीना वैसे भी भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे शुभ माना जाता है। ऐसे में सावन के अंतिम प्रदोष व्रत पर बनने वाले शुभ योग भक्तों के लिए विशेष अवसर लेकर आए हैं।
कब रखा जाएगा भौम प्रदोष व्रत
पंचांग के अनुसार सावन माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को अंतिम प्रदोष व्रत रखा जाएगा। इस बार त्रयोदशी तिथि मंगलवार के दिन पड़ रही है, इसलिए इसे भौम प्रदोष व्रत कहा जाएगा। मंगलवार का दिन भगवान शिव के साथ-साथ मंगल ग्रह से भी जुड़ा माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन शिव पूजा करने से मंगल दोष से जुड़े कष्टों में राहत मिलती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
त्रिपुष्कर योग का बन रहा शुभ संयोग
सावन के अंतिम प्रदोष व्रत पर त्रिपुष्कर योग का निर्माण हो रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार त्रिपुष्कर योग में किए गए शुभ कार्यों का फल कई गुना बढ़ जाता है। इस योग में पूजा-पाठ, दान-पुण्य और धार्मिक कार्य करने से विशेष लाभ मिलने की मान्यता है।
भक्त इस शुभ योग में भगवान शिव का जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और महामृत्युंजय मंत्र का जाप कर सकते हैं। माना जाता है कि त्रिपुष्कर योग में की गई शिव आराधना से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
पूजा के लिए मिलेगा 2 घंटे 13 मिनट का शुभ समय
भौम प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव की पूजा प्रदोष काल में करना सबसे शुभ माना जाता है। इस बार पूजा के लिए करीब 2 घंटे 13 मिनट का विशेष मुहूर्त प्राप्त होगा। इसी अवधि में शिव परिवार की पूजा, दीपदान, बेलपत्र अर्पण और शिव मंत्रों का जाप करना शुभ फलदायी माना जाता है।
प्रदोष काल सूर्यास्त के बाद का वह समय होता है, जिसे भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। इस दौरान भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से भक्तों को विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है।
भौम प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व
शास्त्रों में प्रदोष व्रत को सभी कष्टों को दूर करने वाला बताया गया है। मान्यता है कि इस व्रत को श्रद्धा और नियमों के साथ करने से आरोग्य, सुख, संपत्ति और संतान की प्राप्ति होती है। जिन लोगों के जीवन में आर्थिक परेशानियां, स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं या पारिवारिक तनाव चल रहा हो, उनके लिए यह व्रत लाभकारी माना जाता है।
भौम प्रदोष व्रत विशेष रूप से मंगल ग्रह से जुड़े दोषों को शांत करने वाला माना जाता है। इस दिन भगवान शिव के साथ हनुमान जी की पूजा का भी विशेष महत्व बताया गया है। भक्त शिव मंदिर जाकर भगवान भोलेनाथ को जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और फूल अर्पित करते हैं।
ऐसे करें भगवान शिव की पूजा
भौम प्रदोष व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लिया जाता है। पूरे दिन भगवान शिव का स्मरण किया जाता है। शाम के समय प्रदोष काल में शिवलिंग का अभिषेक कर भगवान शिव को बेलपत्र, फूल, फल और नैवेद्य अर्पित किया जाता है।
इसके बाद शिव मंत्रों का जाप, शिव चालीसा और प्रदोष व्रत कथा का पाठ किया जाता है। पूजा के अंत में भगवान शिव से परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की प्रार्थना की जाती है।
सावन के अंतिम प्रदोष व्रत का यह शुभ संयोग शिव भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है। त्रिपुष्कर योग और भौम प्रदोष का मिलन इस दिन को और भी फलदायी बना रहा है। श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा करने वाले भक्तों को भगवान शिव की कृपा प्राप्त होने की मान्यता है।