भगवान विष्णु ने क्यों लिया वराह अवतार जानें इसके पीछे की पौराणिक कहानी
विष्णु ने लिया था वराह अवतार जानें कहानी
Varaha Jayanti: हिंदू धर्म में वराह जयंती का विशेष धार्मिक महत्व है। यह पर्व भगवान विष्णु के वराह अवतार को समर्पित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु ने पृथ्वी को दैत्य हिरण्याक्ष के अत्याचार से बचाने के लिए वराह का रूप धारण किया था। वराह को भगवान विष्णु के प्रमुख अवतारों में गिना जाता है। इस दिन श्रद्धालु भगवान विष्णु के वराह स्वरूप की पूजा कर सुख-समृद्धि और संकटों से रक्षा की कामना करते हैं।
पौराणिक कथाओं के अनुसार हिरण्याक्ष और हिरण्यकशिपु दो शक्तिशाली दैत्य भाई थे। हिरण्याक्ष ने कठोर तपस्या कर वरदान प्राप्त किया और अपनी शक्ति के अहंकार में देवताओं तथा दूसरे जीवों को परेशान करना शुरू कर दिया। उसके बढ़ते अत्याचार से तीनों लोकों में भय फैल गया।
हिरण्याक्ष ने पृथ्वी को जल में डुबोया
प्रचलित पौराणिक कथा के अनुसार हिरण्याक्ष ने पृथ्वी को समुद्र अथवा ब्रह्मांडीय जल की गहराइयों में पहुंचा दिया। पृथ्वी के इस तरह जल में समा जाने से सृष्टि पर संकट खड़ा हो गया। तब देवताओं ने भगवान विष्णु से सहायता की प्रार्थना की।
सृष्टि की रक्षा और पृथ्वी को वापस उसके स्थान पर स्थापित करने के लिए भगवान विष्णु ने वराह यानी जंगली सूअर का रूप धारण किया। इस अवतार को अपार शक्ति वाला बताया गया है।
हिरण्याक्ष और वराह के बीच हुआ युद्ध
जब भगवान वराह पृथ्वी को जल से बाहर निकालने पहुंचे तो उनका सामना हिरण्याक्ष से हुआ। पौराणिक ग्रंथों में दोनों के बीच भीषण युद्ध का वर्णन मिलता है। हिरण्याक्ष अपनी शक्तियों के बल पर भगवान वराह को रोकने की कोशिश करता रहा।
लंबे संघर्ष के बाद भगवान वराह ने हिरण्याक्ष का वध कर दिया। इसके बाद उन्होंने अपने दांतों पर पृथ्वी को उठाया और उसे जल से बाहर निकालकर फिर उसके निर्धारित स्थान पर स्थापित किया। इसी कारण वराह अवतार को पृथ्वी के उद्धार और धर्म की रक्षा का प्रतीक माना जाता है।
वराह जयंती पर क्यों होती है पूजा?
धार्मिक मान्यता है कि वराह जयंती पर भगवान विष्णु के इस स्वरूप की आराधना करने से भक्तों के संकट दूर होते हैं और जीवन में सकारात्मकता आती है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, मंत्र जप और धार्मिक ग्रंथों का पाठ करने की परंपरा है।
कई श्रद्धालु व्रत रखते हैं और भगवान विष्णु को तुलसी दल, पीले फूल, फल और सात्विक प्रसाद अर्पित करते हैं। जरूरतमंदों को अन्न या अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करना भी शुभ माना जाता है।
पृथ्वी संरक्षण का भी देता है संदेश
वराह अवतार की कथा धार्मिक दृष्टि से पृथ्वी की रक्षा का संदेश भी देती है। भगवान विष्णु का पृथ्वी को जल से निकालना सृष्टि के संतुलन और संरक्षण के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।
वराह जयंती के दिन भक्त भगवान विष्णु से परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की प्रार्थना करते हैं। पूजा-विधि और मान्यताएं क्षेत्र तथा परंपरा के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं।