Pitru Paksha 2025: अपने पितरों को प्रसन्न करना है तो तर्पण और पिंडदान के अलावा और क्या करें

Update: 2025-08-30 01:11 GMT
Pitru Paksha 2025: हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का विशेष महत्व है। पितृ पक्ष पितरों को समर्पित होता है। वर्ष 2025 में पितृ पक्ष रविवार, 7 सितंबर से शुरू हो रहा है। हर साल पितृ पक्ष आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होकर अमावस्या को समाप्त होता है। मान्यता है कि पितृ पक्ष के दौरान हमारे पूर्वज धरती पर आते हैं और हम सभी का कर्तव्य है कि हम अपने पितरों को तृप्त करके ही विदा करें।
पितृ पक्ष में पितरों के पिंडदान और तर्पण का विशेष महत्व। इन दोनों कार्यों को करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है तथा उनकी कृपा बनी रहती है।
ब्राह्मण को भोजन
पितृ पक्ष के दौरान पितरों के नाम पर ब्राह्मण को भोजन अवश्य कराएं। पितृ पक्ष में ब्राह्मण को भोजन कराने और दान देने का विशेष महत्व है। इस दिन भोजन में ब्राह्मण को पूरी, सब्जी और खीर खिलाने का विशेष महत्व है।
उन्हें खाली हाथ न जाने दें
पितृ पक्ष के दौरान, पूर्वज किसी भी रूप में हमारे घर आ सकते हैं। पितृ पक्ष के दौरान घर आए किसी भी व्यक्ति को खाली हाथ न जाने दें। पितृ पक्ष के दौरान पूर्वजों का सम्मान और उनकी हर मनोकामना पूरी करने का विधान है।
गाय, कौवे और कुत्तों की सेवा
पितृ पक्ष के दौरान गाय, कौवे और कुत्तों को भोजन कराएँ और उनकी सेवा करें। कौवे पितरों के दूत माने जाते हैं और गाय और कुत्तों को भोजन कराने से पूर्वज प्रसन्न होते हैं। यह उपाय पारिवारिक समस्याओं को दूर करता है।
पितृ पक्ष के दौरान पितृ गायत्री मंत्र "ॐ देवता पितृभ्यो महायोगिनः महातेजः सर्व पाप विनाशाय नमः स्वधा" का 108 बार जाप करें।
पवित्र नदियों में स्नान
पितृ पक्ष के दौरान गंगा, यमुना या किसी भी पवित्र नदी में स्नान करने का विशेष महत्व है। यदि आप नहीं जा सकते हैं, तो घर के पानी में पवित्र नदी का जल मिलाकर स्नान करें।
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