शक संवत 1948, भाद्रपद, शुक्ल, चतुर्दशी, शुक्रवार, विक्रम संवत् 2083। तदनुसार अंग्रेजी तारीख 25 सितंबर सन् 2026 ई॰। सूर्य दक्षिणायन, शरद ऋतु। राहुकाल सुबह 10 बजकर 30 मिनट से दोपहर 12 बजकर 00 मिनट तक। चतुर्दशी तिथि रात्रि 11 बजकर 06 मिनट तक उपरांत पूर्णिमा तिथि का आरंभ।
शतभिषा नक्षत्र प्रातः 11 बजकर 22 मिनट तक उपरांत पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र का आरंभ। शूल योग दोपहर 02 बजकर 51 मिनट तक उपरांत गण्ड योग का आरंभ। गरज करण प्रातः 11 बजकर 17 मिनट तक उपरांत वणिज करण का आरंभ। चन्द्रमा अगले दिन तड़के 05 बजकर 33 मिनट तक कुंभ राशि पर उपरांत मीन राशि पर संचार करेगा।
सूर्य और चंद्रमा की स्थिति
सूर्योदय का समय: प्रातः 06:11 बजे
सूर्यास्त का समय: सायं 06:14 बजे
चंद्रोदय का समय: सायं 05:27 बजे
चंद्रास्त का समय: अगले दिन प्रातः 05:32 बजे (26 सितंबर)
सूर्य और चंद्रमा की राशियां
सूर्य देव: कन्या राशि में स्थित हैं
चन्द्र देव: कुंभ राशि में (अगले दिन तड़के 05:33 बजे तक), फिर मीन राशि में प्रवेश
आज का शुभ मुहूर्त 25 सितंबर 2026 :
अभिजीत मुहूर्त : दोपहर 11 बजकर 48 मिनट से 12 बजकर 37 मिनट तक रहेगा।
अमृत काल : अगले दिन तड़के 03 बजकर 28 मिनट से प्रातः 05 बजकर 05 मिनट (26 सितंबर) तक रहेगा।
अनंत चतुर्दशी पूजा मुहूर्त : सुबह 06 बजकर 11 मिनट से रात 11 बजकर 06 मिनट तक रहेगा।
आज का चौघड़िया मुहूर्त 25 सितंबर 2026 :
चर (सामान्य) : सुबह 06 बजकर 11 मिनट से 07 बजकर 41 मिनट तक।
लाभ (उन्नति) : सुबह 07 बजकर 41 मिनट से 09 बजकर 12 मिनट तक।
अमृत (सर्वोत्तम) : सुबह 09 बजकर 12 मिनट से 10 बजकर 42 मिनट तक।
काल (सामान्य) : सुबह 10 बजकर 42 मिनट से दोपहर 12 बजकर 13 मिनट तक।
आज का अशुभ मुहूर्त 25 सितंबर 2026 :
राहुकाल : सुबह 10 बजकर 30 मिनट से दोपहर 12 बजकर 00 मिनट तक रहेगा।
गुलिक काल : सुबह 07 बजकर 30 मिनट से 09 बजकर 00 मिनट तक रहेगा।
यमगंड : दोपहर 03 बजकर 30 मिनट से शाम 05 बजकर 00 मिनट तक रहेगा।
गणेश विसर्जन 2026
चतुर्दशी तिथि प्रारंभ: 24 सितंबर, रात 11:18 बजे
चतुर्दशी तिथि समाप्त: 25 सितंबर, रात 11:06 बजे
अनंत चतुर्दशी 2026
अनंत चतुर्दशी पूजा मुहूर्त: सुबह 06:11 से रात 11:06 बजे तक
चतुर्दशी तिथि प्रारंभ: 24 सितंबर, रात 11:18 बजे
चतुर्दशी तिथि समाप्त: 25 सितंबर, रात 11:06 बजे
आज का उपाय :आज शुक्रवार व अनंत चतुर्दशी के पावन अवसर पर भगवान श्री हरि विष्णु की पूजा करें, 14 गांठों वाला अनंत सूत्र धारण करें और गणेश जी का उत्तर पूजा के साथ विसर्जन करें।