Nirjala Ekadashi 2025 Paran : 7 जून, शनिवार को द्वादशी तिथि में निर्जला एकादशी का पारण किया जाएगा। यह पारण व्रत का सबसे महत्वपूर्ण और अंतिम चरण माना जाता है। यदि पारण सही विधि से नहीं किया गया, तो व्रत अधूरा माना जाता है और इसका फल भी कम होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो व्यक्ति पूरी विधि-विधान के साथ निर्जला एकादशी का व्रत रखता है और पारण करता है, उस पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष कृपा बनी रहती है।
इस व्रत को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए पारण का सही समय और विधि जानना बहुत जरूरी है। पारण के दौरान व्यक्ति हल्का और शुद्ध आहार ग्रहण करता है, जिससे व्रत का पूरा फल मिलता है। ऐसा माना जाता है कि पारण के बाद जीवन में कभी भी किसी वस्तु की कमी नहीं आती और मृत्यु के बाद वैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है। इसलिए निर्जला एकादशी का पारण श्रद्धा और नियम के साथ करना अत्यंत आवश्यक है।
निर्जला एकादशी पारण का महत्व:
निर्जला एकादशी का पारण वर्ष 2025 में अगले दिन, यानी द्वादशी तिथि को किया जाएगा। पारण व्रत का सबसे महत्वपूर्ण और अंतिम चरण होता है, जिसका अर्थ है उपवास का विधिपूर्वक समापन। एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि में सही समय, शुभता और श्रद्धा के साथ किया जाना आवश्यक है, तभी व्रत का पूरा फल मिलता है।
शास्त्रों के अनुसार, यदि पारण समय पर द्वादशी तिथि में नहीं किया जाता है तो व्रत अधूरा और निष्फल माना जाता है। भगवान विष्णु स्वयं कहते हैं कि द्वादशी को समय पर पारण न करने से व्रत का पुण्य खत्म हो जाता है। पारण करने से व्रती को व्रत का पूर्ण फल, पुण्य और ईश्वरीय आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसलिए, पारण को बड़ी श्रद्धा और नियमबद्ध तरीके से करना चाहिए।
निर्जला एकादशी पारण का समय:
द्वादशी तिथि 6 जून शाम 6 बजकर 33 मिनट से शुरू हो जाएगी। पारण का शुभ मुहूर्त 7 जून की सुबह 6 बजे से शुरू होकर दोपहर 1 बजकर 30 मिनट तक रहेगा। धार्मिक नियमों के अनुसार, पारण द्वादशी के दिन सूर्योदय के बाद करना चाहिए ताकि व्रत का सही फल प्राप्त हो सके।
निर्जला एकादशी पारण विधि:
ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि (7 जून, शनिवार 2025) को पारण करें।
सुबह स्नान करके साफ और शुद्ध वस्त्र पहनें।
भगवान विष्णु को प्रणाम करें और पारण की भावना बनाएं।
पीले फूल, तुलसी पत्र, चंदन, अक्षत और जल अर्पित करें।
फल, दूध, मिष्ठान्न और तुलसी पत्र के साथ भगवान विष्णु को भोग लगाएं।
तुलसी माला से ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र 108 बार जपें।
विष्णु सहस्रनाम और कनकधारा स्तोत्र का पाठ करें।
भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आरती करें और प्रणाम करें।
व्रत में हुई भूलों के लिए भगवान से क्षमा मांगें और व्रत स्वीकार करने की प्रार्थना करें।
किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद को जल, अन्न, वस्त्र, पंखा, छाता, शक्कर, दक्षिणा आदि दान करें।
विशेष रूप से जल से भरा हुआ कलश दान करना शुभ माना जाता है।
निर्जला एकादशी पारण में क्या खाएं:
निर्जला एकादशी पारण के समय भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का ध्यान लगाकर ‘ॐ विष्णवे नमः’ मंत्र का जप करें और तुलसी के पत्ते अपने मुँह पर रखें। इसके बाद गंगाजल पीना शुभ होता है। पारण के बाद हमेशा हल्का, सात्विक और शुद्ध भोजन ही करें ताकि व्रत का सही फल मिल सके।
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