भगवान विश्वकर्मा की पूजा का पर्व देशभर में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विश्वकर्मा को सृष्टि के प्रथम वास्तुकार और निर्माण कला का देवता माना जाता है। इस दिन उद्योगों, कारखानों, दुकानों और कार्यस्थलों पर मशीनों, औजारों और उपकरणों की पूजा की जाती है। विश्वकर्मा पूजा 2026 में शुभ योगों के संयोग के कारण विशेष मानी जा रही है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग का निर्माण हो रहा है, जिसे पूजा-पाठ और शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है।
औजारों और मशीनों की होती है पूजा
विश्वकर्मा पूजा के दिन लोग अपने काम में इस्तेमाल होने वाले औजारों, मशीनों और उपकरणों को साफ करके उनकी पूजा करते हैं। मान्यता है कि भगवान विश्वकर्मा की कृपा से कार्यों में सफलता, उन्नति और समृद्धि आती है।
कारखानों, वर्कशॉप, निर्माण स्थलों और तकनीकी संस्थानों में इस दिन विशेष आयोजन किए जाते हैं।
पूजा का शुभ मुहूर्त
पंडितों के अनुसार, विश्वकर्मा पूजा के दिन शुभ समय में पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होने की मान्यता है। भक्त सुबह स्नान कर पूजा स्थल को साफ करते हैं और भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित कर विधि-विधान से पूजा करते हैं।
पूजा में फूल, अक्षत, दीप, धूप, मिठाई और फल अर्पित किए जाते हैं। इसके बाद औजारों और मशीनों की आरती की जाती है।
सर्वार्थ सिद्धि और रवि योग का महत्व
ज्योतिष में सर्वार्थ सिद्धि योग को शुभ कार्यों की सफलता के लिए अनुकूल माना जाता है। वहीं रवि योग को भी धार्मिक कार्यों के लिए शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इन योगों में की गई पूजा और आराधना से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
देशभर में होंगे आयोजन
विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर देशभर में छोटे-बड़े उद्योगों और प्रतिष्ठानों में कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। लोग भगवान विश्वकर्मा से अपने काम में तरक्की और सुरक्षा की प्रार्थना करते हैं। यह पर्व मेहनत, कौशल और निर्माण कार्य से जुड़े लोगों के लिए विशेष महत्व रखता है।
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