Maa Saraswati Vandana : स्‍टूडेंट्स, शिक्षा, लेखन के क्षेत्र से जुड़े लोगों और कलाकारों के लिए बसंत पंचमी का दिन विशेष होता है. इस दिन विद्या की देवी मां सरस्‍वती की पूजा की जाती है. वीणावादन करती हुई धवल सफेद वस्‍त्र धारण किए हुए कमल पर विराजमान मां सरस्‍वती की पूजा करने से बुद्धि और एकाग्रता बढ़ती है. कला के क्षेत्र में सफलता मिलती है. इस साल 23 जनवरी 2026 को बसंत पंचमी मनाई जाएगी. इस दिन वासंती रंग यानी कि पीला रंग पहनना शुभ होता है. बसंत पंचमी की पूजा में मां सरस्‍वती को पीले फूल, बेसन की मिठाई अर्पित करने के साथ सरस्‍वती वंदना भी गाएं. तभी पूजा पूर्ण होती है. यहां पढ़ें सरस्‍वती वंदना और उसका हिंदी अर्थ|
सरस्‍वती वंदना हिंदी अर्थ सहित :
या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना।
या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा ॥1॥
जो विद्या की देवी भगवती सरस्वती कुन्द के फूल, चंद्रमा, हिमराशि और मोती के हार की तरह धवल वर्ण की है और जो श्वेत वस्त्र धारण करती है, जिनके हाथ में वीणा-दण्ड शोभायमान है, जिन्होंने श्वेत कमलों पर आसन ग्रहण किया है तथा ब्रह्मा विष्णु एवं शंकर आदि देवताओं द्वारा जो सदा पूजित हैं, वही संपूर्ण जड़ता और अज्ञान को दूर कर देने वाली सरस्वती हमारी रक्षा करें ॥1॥
शुक्लां ब्रह्मविचार सार परमामाद्यां जगद्व्यापिनीं
वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्‌।
हस्ते स्फाटिकमालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थिताम्‌
वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्‌॥2॥
शुक्लवर्ण वाली,संपूर्ण चराचर जगत्‌ में व्याप्त, आदिशक्ति, परब्रह्म के विषय में किए गए विचार एवं चिंतन के सार रूप परम उत्कर्ष को धारण करने वाली, सभी भयों से भयदान देने वाली, अज्ञान के अंधेरे को मिटाने वाली, हाथों में वीणा, पुस्तक और स्फटिक की माला धारण करने वाली और पद्मासन पर विराजमान्‌ बुद्धि प्रदान करने वाली, सर्वोच्च ऐश्वर्य से अलंकृत, भगवती शारदा (सरस्वती देवी) की मैं वंदना करता हूं ॥2॥
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