धर्म डेस्क: रामायण में हनुमान जी की भगवान श्रीराम के प्रति भक्ति, साहस और सेवा से जुड़ी अनेक कथाएं मिलती हैं। ऐसी ही एक प्रसिद्ध कथा सुंदरकांड में माता सीता और हनुमान जी की मुलाकात से जुड़ी है। लंका की अशोक वाटिका में जब हनुमान जी ने माता सीता को श्रीराम का संदेश सुनाया, तब प्रसन्न होकर माता ने उन्हें आशीर्वाद दिया। रामचरितमानस में इसका वर्णन “अजर अमर गुननिधि सुत होहू” के रूप में मिलता है।
अशोक वाटिका पहुंचे थे हनुमान
माता सीता की खोज करते हुए हनुमान जी समुद्र पार कर लंका पहुंचे। वहां काफी खोज के बाद उन्होंने अशोक वाटिका में माता सीता को देखा। रावण द्वारा हरण किए जाने के बाद माता सीता वहां श्रीराम के विरह में थीं।
हनुमान जी ने तुरंत सामने आने के बजाय पहले वृक्ष पर बैठकर भगवान राम की कथा और उनके गुणों का वर्णन किया। इसके बाद उन्होंने श्रीराम द्वारा दी गई अंगूठी माता सीता के सामने रखी। अंगूठी देखकर माता सीता को विश्वास हुआ कि हनुमान वास्तव में श्रीराम के दूत बनकर आए हैं।
सुनाया भगवान राम का संदेश
हनुमान जी ने माता सीता को बताया कि भगवान राम और लक्ष्मण उनकी खोज में हैं और उन्हें मुक्त कराने के लिए जल्द लंका पहुंचेंगे। उन्होंने श्रीराम का संदेश सुनाकर माता सीता को धैर्य रखने को कहा।
हनुमान जी की बातें सुनकर माता सीता को अत्यंत संतोष हुआ। श्रीराम के प्रति हनुमान की भक्ति और समर्पण देखकर वह प्रसन्न हुईं और उन्हें अपना आशीर्वाद दिया।
माता सीता ने दिया खास आशीर्वाद
गोस्वामी तुलसीदास रचित रामचरितमानस के सुंदरकांड में माता सीता हनुमान जी को आशीर्वाद देते हुए कहती हैं—
“अजर अमर गुननिधि सुत होहू।
करहुँ बहुत रघुनायक छोहू॥”
भावार्थ है कि माता सीता ने हनुमान जी को अजर-अमर और गुणों का भंडार होने का आशीर्वाद दिया तथा कामना की कि भगवान श्रीराम की कृपा उन पर सदैव बनी रहे।
इसके बाद वर्णन आता है कि श्रीराम की कृपा का आशीर्वाद सुनकर हनुमान जी प्रेम में मग्न हो गए। उनके लिए प्रभु श्रीराम की कृपा ही सबसे बड़ी उपलब्धि थी।
क्यों दिया अजर-अमर होने का आशीर्वाद?
धार्मिक मान्यता के अनुसार माता सीता हनुमान जी की निस्वार्थ सेवा, साहस और श्रीराम के प्रति अटूट भक्ति से अत्यंत प्रसन्न हुई थीं। हनुमान जी ने कठिन समुद्र पार किया, अनेक बाधाओं का सामना किया और अपनी जान की परवाह किए बिना माता सीता तक श्रीराम का संदेश पहुंचाया।
इसी सेवा भाव से प्रसन्न होकर माता सीता ने उन्हें अजर-अमर रहने का आशीर्वाद दिया। इसी आधार पर हिंदू परंपरा में हनुमान जी को चिरंजीवी माना जाता है।
आज भी जीवित माने जाते हैं हनुमान जी
धार्मिक मान्यताओं में हनुमान जी उन चिरंजीवियों में शामिल हैं जिनके आज भी पृथ्वी पर उपस्थित होने की आस्था है। भक्त मानते हैं कि जहां श्रद्धा और प्रेम से श्रीराम का नाम लिया जाता है, वहां हनुमान जी की कृपा रहती है।
इसी कारण मंगलवार और शनिवार को हनुमान जी की विशेष पूजा, हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ किया जाता है। सुंदरकांड की यह कथा भक्तों को संदेश देती है कि निस्वार्थ सेवा, साहस और ईश्वर के प्रति अटूट भक्ति का फल हमेशा विशेष होता है।
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