Jaya Ekadashi 2026: जया एकादशी पर किन मंत्रों का जाप होगा लाभकारी

Update: 2026-01-28 04:38 GMT
Jaya Ekadashi 2026: जया एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित व्रत है, जिसे अत्यंत शुभ माना जाता है। यह उपवास माघ महीने के शुक्ल पक्ष में रखा जाता है। इस दिन श्रीहरि की पूजा-अर्चना करने से समस्त पापों का नाश होता है और जीवन में कई अच्छे परिणाम मिलते हैं। हालांकि, इस शुभ दिन पर विष्णु जी को पीले फल और मिठाई का भोग लगाने से मोक्ष मिलता है। यही नहीं साधक पर प्रभु की विशेष कृपा भी बनी रहती हैं। शास्त्रों के मुताबिक, जया एकादशी पर कुछ खास मंत्रों का उच्चारण करने से पूर्व जन्मों के दोषों से लेकर साधक की मनोकामनाएं पूर्ण होने लगती है। साथ ही मानसिक शांति भी बनी रहती हैं। ऐसे में आइए इन शक्तिशाली मंत्रों को जानते हैं।
जया एकादशी 2026 तिथि और मुहूर्त:
माघ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 28 जनवरी 2026 को शाम 04 बजकर 35 मिनट से प्रारंभ हो रही है।
29 जनवरी 2026 को दोपहर 01 बजकर 55 मिनट पर तिथि समाप्त होगी।
जया एकादशी का व्रत 29 जनवरी 2026 को मान्य होगा।
सुबह 7 बजकर 11 मिनट से लेकर सुबह 8 बजकर 32 मिनट तक पूजा का शुभ मुहूर्त रहेगा।
व्रत का पारण 30 जनवरी 2026 को सुबह 6:41 से 8:56 तक कर सकते हैं।
श्री विष्णु मंत्र :
मंगलम भगवान विष्णुः, मंगलम गरुणध्वजः। मंगलम पुण्डरी काक्षः, मंगलाय तनो हरिः॥
ॐ श्री विष्णवे च विद्महे वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥
ॐ वासुदेवाय विघ्माहे वैधयाराजाया धीमहि तन्नो धन्वन्तरी प्रचोदयात् ||
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे अमृता कलसा हस्थाया धीमहि तन्नो धन्वन्तरी प्रचोदयात् |
लक्ष्मी जी को प्रसन्न करने का मंत्र:
ऊँ महालक्ष्म्यै नमो नमः । ऊँ विष्णुप्रियायै नमो नमः ।।
ऊँ धनप्रदायै नमो नमः । ऊँ विश्वजन्नयै नमो नमः ।।
सुख-समृद्धि के लिए मंत्र:
या रक्ताम्बुजवासिनी विलासिनी चण्डांशु तेजस्विनी।
या रक्ता रुधिराम्बरा हरिसखी या श्री मनोल्हादिनी ॥
या रत्नाकरमन्थनात्प्रगटिता विष्णोस्वया गेहिनी।
सा मां पातु मनोरमा भगवती लक्ष्मीश्च पद्मावती ॥
विष्णु स्तुति :
शान्ताकारं भुजंगशयनं पद्मनाभं सुरेशं
विश्वाधारं गगन सदृशं मेघवर्ण शुभांगम् ।
लक्ष्मीकांत कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यं
वन्दे विष्णु भवभयहरं सर्व लौकेक नाथम् ॥
यं ब्रह्मा वरुणैन्द्रु रुद्रमरुत: स्तुन्वानि दिव्यै स्तवैवेदे: ।
सांग पदक्रमोपनिषदै गार्यन्ति यं सामगा: ।
ध्यानावस्थित तद्गतेन मनसा पश्यति यं योगिनो
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