मां पार्वती को प्रसन्न करने के लिए कन्याओं को कराएं भोजन दें ये खास उपहार
कन्या पूजन मां पार्वती की कृपा पाने की है मान्यता
धर्म : सावन का पवित्र महीना भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। सावन के सोमवार को शिवलिंग का जलाभिषेक, बेलपत्र अर्पित करने और शिव-पार्वती की पूजा करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन के आखिरी सोमवार पर कन्याओं का सम्मान और अपनी सामर्थ्य के अनुसार सेवा-दान करना भी शुभ माना जाता है।
सनातन परंपरा में कन्याओं को देवी शक्ति का स्वरूप मानकर उनका सम्मान किया जाता है। नवरात्रि में कन्या पूजन की परंपरा सबसे प्रमुख है, जबकि अन्य शुभ अवसरों पर भी कन्याओं को भोजन कराने, वस्त्र या उपयोगी सामग्री देने जैसी परंपराएं अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में प्रचलित हैं।
सावन के आखिरी सोमवार पर सुबह स्नान के बाद भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जा सकती है। शिवलिंग पर स्वच्छ जल या गंगाजल अर्पित करते हुए ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें। इसके बाद बेलपत्र और पुष्प अर्पित कर माता पार्वती का स्मरण करें।
कन्याओं का सत्कार करना चाहते हैं तो उन्हें सम्मानपूर्वक घर आमंत्रित कर स्वच्छ और सात्विक भोजन कराया जा सकता है। भोजन में घर की परंपरा और सुविधा के अनुसार खीर, पूरी, हलवा, फल या अन्य व्यंजन रखे जा सकते हैं। इसमें किसी कठोर संख्या या सामग्री को अनिवार्य मानने की जरूरत नहीं है।
भोजन कराने के बाद कन्याओं को अपनी क्षमता के अनुसार फल, मिठाई, वस्त्र, स्टेशनरी या दक्षिणा दी जा सकती है। पढ़ने वाली बच्चियों को कॉपी, किताब, पेन या दूसरी उपयोगी शैक्षणिक सामग्री देना भी अच्छा विकल्प हो सकता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सत्कार दिखावे के बजाय सम्मान और सद्भाव के साथ किया जाए।
धार्मिक मान्यताओं में माता पार्वती को सौभाग्य, दांपत्य सुख और मातृत्व से जोड़ा जाता है। इसी कारण कई विवाहित महिलाएं सावन में शिव-पार्वती की पूजा कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। वहीं अविवाहित युवतियां भी मनचाहे जीवनसाथी की कामना से शिव-पार्वती की आराधना करती हैं।
पूजा के दौरान माता पार्वती को सुहाग से जुड़ी सामग्री अर्पित करने की परंपरा भी कई स्थानों पर प्रचलित है। विवाहित महिलाएं अपनी स्थानीय और पारिवारिक परंपरा के अनुसार श्रृंगार सामग्री अर्पित कर सकती हैं। हालांकि पूजा की विधियां क्षेत्र और संप्रदाय के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं।
सावन के आखिरी सोमवार को जरूरतमंद बच्चियों की मदद करना भी इस अवसर को सार्थक बनाने का एक तरीका है। किसी जरूरतमंद परिवार की बेटी की पढ़ाई में सहायता, स्कूल सामग्री उपलब्ध कराना या पौष्टिक भोजन देना धार्मिक भावना के साथ सामाजिक जिम्मेदारी को भी जोड़ता है।
धार्मिक आस्था के अनुसार भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा में श्रद्धा, संयम और अच्छे कर्मों को विशेष महत्व दिया जाता है। इसलिए केवल धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, बल्कि बच्चों और जरूरतमंद लोगों के प्रति सम्मानपूर्ण व्यवहार को भी इस दिन की भावना से जोड़ा जा सकता है।
सावन के आखिरी सोमवार पर शिव-पार्वती की पूजा के बाद कन्याओं का सम्मान, भोजन और यथाशक्ति दान किया जा सकता है। मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक किए गए ऐसे पुण्य कार्य से माता पार्वती प्रसन्न होती हैं और परिवार पर अपनी कृपा बनाए रखती हैं। यह धार्मिक मान्यता है, इसलिए इसे आस्था और अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार अपनाया जा सकता है।