तीज पर शिव पार्वती की आराधना का खास मौका सुबह इतने बजे से शुरू होगा मुहूर्त
नई दिल्ली। हिंदू धर्म में हरतालिका तीज का पर्व सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास माना जाता है। इस दिन महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना करती हैं और पति की लंबी उम्र, सुखी वैवाहिक जीवन और परिवार की खुशहाली की कामना करती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हरतालिका तीज का व्रत रखने से भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा प्राप्त होती है।
इस साल हरतालिका तीज के अवसर पर पूजा के लिए विशेष शुभ मुहूर्त बताया जा रहा है। ज्योतिष गणना के अनुसार, 14 सितंबर को सुबह 6 बजकर 5 मिनट से 7 बजकर 6 मिनट तक पूजा का शुभ समय रहेगा। इस दौरान शिव-पार्वती की आराधना करने से विशेष फल मिलने की मान्यता है।
सिर्फ 1 घंटा 1 मिनट का रहेगा शुभ समय
हरतालिका तीज पर पूजा के लिए शुभ मुहूर्त का विशेष महत्व माना जाता है। इस बार सुबह का समय पूजा के लिए बेहद शुभ बताया जा रहा है। सुबह 6:05 बजे से 7:06 बजे तक कुल 1 घंटा 1 मिनट का समय पूजा के लिए मिलेगा।
मान्यता है कि शुभ मुहूर्त में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है। हालांकि, श्रद्धालु अपनी सुविधा के अनुसार पूरे दिन भी भगवान की आराधना कर सकते हैं।
हरतालिका तीज का धार्मिक महत्व
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, हरतालिका तीज का संबंध माता पार्वती और भगवान शिव के विवाह से जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी।
माता पार्वती की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार किया। इसी कथा को याद करते हुए महिलाएं हरतालिका तीज का व्रत रखती हैं और शिव-पार्वती की पूजा करती हैं।
महिलाएं रखती हैं निर्जला व्रत
हरतालिका तीज के दिन कई महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं। इस दौरान अन्न और जल का त्याग कर भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की पूजा की जाती है।
व्रत रखने वाली महिलाएं सुबह स्नान के बाद नए वस्त्र धारण करती हैं और पूजा की तैयारी करती हैं। पूजा स्थल को सजाकर मिट्टी से भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की प्रतिमा बनाई जाती है।
पूजा सामग्री में शामिल होती हैं ये चीजें
हरतालिका तीज की पूजा में कई विशेष सामग्री का उपयोग किया जाता है। इसमें भगवान शिव और माता पार्वती को अर्पित करने के लिए फूल, फल, बेलपत्र, धूप, दीप, अक्षत, सिंदूर, चंदन और मिठाई आदि शामिल होते हैं।
महिलाएं माता पार्वती को सुहाग की सामग्री जैसे चूड़ी, बिंदी, सिंदूर और अन्य श्रृंगार की वस्तुएं अर्पित करती हैं। इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती की कथा सुनी जाती है।
रात में भी होती है विशेष पूजा
हरतालिका तीज पर दिन के साथ-साथ रात की पूजा का भी महत्व माना जाता है। कई स्थानों पर महिलाएं रातभर जागकर भजन-कीर्तन करती हैं और भगवान शिव-पार्वती की आराधना करती हैं।
धार्मिक मान्यता है कि रात में चार पहर पूजा करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है। हालांकि, पूजा की विधि और परंपराएं अलग-अलग क्षेत्रों में अलग हो सकती हैं।
कुंवारी लड़कियां भी रखती हैं व्रत
हरतालिका तीज का व्रत केवल सुहागिन महिलाएं ही नहीं, बल्कि कई जगहों पर कुंवारी लड़कियां भी रखती हैं। मान्यता है कि इस व्रत से उन्हें मनचाहा जीवनसाथी मिलने का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
माता पार्वती की तपस्या और भगवान शिव से विवाह की कथा को आदर्श मानते हुए कुंवारी कन्याएं भी इस दिन श्रद्धा के साथ पूजा करती हैं।
पूजा के दौरान रखें इन बातों का ध्यान
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हरतालिका तीज की पूजा में साफ-सफाई और श्रद्धा का विशेष ध्यान रखना चाहिए। पूजा के दौरान मन को शांत रखते हुए भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करना चाहिए।
व्रत रखने वाली महिलाओं को अपनी स्वास्थ्य स्थिति का भी ध्यान रखना चाहिए। लंबे समय तक निर्जला व्रत रखने से पहले अपनी क्षमता और स्वास्थ्य को ध्यान में रखना जरूरी है।
हरतालिका तीज का पर्व आस्था, प्रेम और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। इस दिन महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती से अपने परिवार की सुख-समृद्धि और वैवाहिक जीवन में खुशहाली की कामना करती हैं। 14 सितंबर को शुभ मुहूर्त में पूजा-अर्चना कर श्रद्धालु इस पावन पर्व को श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाएंगे।