असम के लोअर लैम्पी क्षेत्र में इस बार तीज उत्सव खास बन गया। यहां गोरखा समुदाय की महिलाओं ने पहली बार सार्वजनिक रूप से एक साथ मिलकर तीज का जश्न मनाया। पारंपरिक वेशभूषा, गीत-संगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ आयोजित इस समारोह ने समुदाय में एकता और सांस्कृतिक पहचान का संदेश दिया।
तीज पर्व गोरखा और नेपाली समुदाय की महिलाओं के लिए आस्था और परंपरा से जुड़ा महत्वपूर्ण त्योहार माना जाता है। इस अवसर पर महिलाएं व्रत रखती हैं, भगवान शिव-पार्वती की पूजा करती हैं और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।
पहली बार सार्वजनिक आयोजन से बढ़ा उत्साह
लोअर लैम्पी में आयोजित तीज समारोह में बड़ी संख्या में गोरखा महिलाएं शामिल हुईं। कई महिलाओं ने बताया कि इससे पहले वे अपने घरों या छोटे समूहों में ही यह पर्व मनाती थीं, लेकिन पहली बार सार्वजनिक स्तर पर आयोजन होने से उन्हें अपनी संस्कृति को साझा करने का अवसर मिला।
कार्यक्रम में महिलाओं ने पारंपरिक गीत गाए, नृत्य प्रस्तुत किए और एक-दूसरे के साथ त्योहार की खुशियां बांटीं।
संस्कृति और परंपरा को सहेजने की पहल
आयोजकों का कहना है कि इस तरह के कार्यक्रमों का उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ना है। सार्वजनिक आयोजन से समुदाय के लोगों को एक मंच मिलता है, जहां वे अपनी विरासत को आगे बढ़ा सकते हैं।
गोरखा समुदाय में तीज का विशेष महत्व है। यह पर्व महिलाओं के लिए सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि आपसी मेल-जोल और सामाजिक जुड़ाव का भी अवसर होता है।
महिलाओं ने दिखाया एकजुटता का संदेश
कार्यक्रम में शामिल महिलाओं ने पारंपरिक लाल पोशाक और आभूषण पहनकर उत्सव में भाग लिया। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन से महिलाओं को अपनी संस्कृति को बड़े स्तर पर मनाने और अपनी पहचान को मजबूत करने का मौका मिलता है।
स्थानीय लोगों ने भी इस पहल की सराहना की और कहा कि ऐसे सांस्कृतिक कार्यक्रम समाज में आपसी सहयोग और भाईचारे को बढ़ावा देते हैं।
आने वाले वर्षों में बड़े आयोजन की तैयारी
लोअर लैम्पी में पहली बार हुए इस सार्वजनिक तीज समारोह के बाद समुदाय के लोगों में उत्साह बढ़ा है। आयोजकों ने उम्मीद जताई है कि आने वाले वर्षों में इस आयोजन को और बड़े स्तर पर आयोजित किया जाएगा।
यह कार्यक्रम गोरखा समुदाय की महिलाओं के लिए एक यादगार अवसर बन गया, जहां उन्होंने अपनी परंपरा, संस्कृति और एकता का उत्सव मनाया।
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