कुंडली में बृहस्पति की स्थिति होगी मजबूत सावन के अंतिम सोमवार पर करें ये उपाय
सावन के आखिरी सोमवार पर करें ये खास उपाय
सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है और सोमवार का दिन भोलेनाथ को समर्पित है। ज्योतिषीय मान्यताओं में देवगुरु बृहस्पति यानी गुरु ग्रह को ज्ञान, शिक्षा, संतान, विवाह, धर्म, सम्मान और समृद्धि का कारक माना जाता है। ऐसे में सावन के सोमवार पर शिव आराधना के साथ गुरु से जुड़े कुछ पारंपरिक उपाय करने की मान्यता है। हालांकि ये उपाय धार्मिक और ज्योतिषीय आस्था पर आधारित हैं, इनके परिणाम की वैज्ञानिक गारंटी नहीं है।
ज्योतिष में बृहस्पति को शुभ ग्रहों में गिना जाता है। मान्यता है कि जन्म कुंडली में गुरु की अनुकूल स्थिति व्यक्ति को शिक्षा, विवेक, सामाजिक प्रतिष्ठा और आध्यात्मिकता के क्षेत्र में अच्छे परिणाम दे सकती है। वहीं गुरु की प्रतिकूल स्थिति होने पर ज्योतिषी कुंडली के अनुसार अलग-अलग उपाय बताते हैं। इसलिए किसी एक उपाय को हर व्यक्ति के लिए समान रूप से प्रभावी मानना उचित नहीं है।
सावन के सोमवार पर सुबह स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनकर भगवान शिव की पूजा की जा सकती है। शिवलिंग पर स्वच्छ जल या गंगाजल अर्पित करते हुए ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें। इसके बाद बेलपत्र अर्पित कर अपनी श्रद्धा के अनुसार पूजा करें। धार्मिक परंपरा में शिवलिंग के अभिषेक को भगवान शिव की आराधना का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है।
गुरु ग्रह से जुड़े उपायों में पीले रंग का विशेष महत्व माना जाता है। श्रद्धालु भगवान शिव की पूजा के बाद भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति का स्मरण कर सकते हैं। हल्दी, चने की दाल, पीले फल या पीले वस्त्र जैसी वस्तुओं का जरूरतमंद व्यक्ति को दान करने की भी परंपरा है। दान हमेशा अपनी आर्थिक क्षमता और श्रद्धा के अनुसार करना बेहतर माना जाता है।
देवगुरु बृहस्पति के लिए ‘ॐ बृं बृहस्पतये नमः’ मंत्र का जाप भी प्रचलित है। सावन सोमवार के दिन शिव मंत्र के साथ श्रद्धानुसार गुरु मंत्र का जाप किया जा सकता है। मंत्र जाप के दौरान शांत स्थान पर बैठने और मन को एकाग्र रखने की सलाह धार्मिक परंपराओं में दी जाती है।
भगवान शिव को बेलपत्र अर्पित करना भी सावन की प्रमुख परंपराओं में शामिल है। बेलपत्र साफ और अखंड हो तो बेहतर माना जाता है। इसे अर्पित करते समय भगवान शिव का ध्यान किया जा सकता है। इसके साथ ही मंदिर में दीपक जलाकर पूजा करने की भी परंपरा है।
गुरु को ज्ञान और शिक्षा का कारक माना जाता है, इसलिए इस दिन किसी विद्यार्थी को किताब, कॉपी या पढ़ाई से जुड़ी उपयोगी सामग्री देना भी एक सार्थक दान हो सकता है। धार्मिक दृष्टि से गुरुजनों, शिक्षकों और बुजुर्गों का सम्मान करना भी बृहस्पति से जोड़कर देखा जाता है।
अगर विवाह या संतान संबंधी कारणों से गुरु ग्रह के उपाय किए जा रहे हैं तो केवल सामान्य ज्योतिषीय उपायों के आधार पर बड़ा निर्णय नहीं लेना चाहिए। ज्योतिष में ग्रहों का फल पूरी जन्म कुंडली, भाव, राशि, दृष्टि और दशा जैसी स्थितियों को देखकर बताया जाता है। इसलिए व्यक्तिगत उपाय भी कुंडली के अनुसार अलग हो सकते हैं।
सावन के सोमवार पर सबसे सरल पूजा के रूप में भगवान शिव का जलाभिषेक, ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप और जरूरतमंद को अपनी क्षमता के अनुसार दान किया जा सकता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सच्ची श्रद्धा, संयम और अच्छे कर्मों के साथ की गई शिव आराधना विशेष फलदायी मानी जाती है।