Ekadashi Vrat : जानिए गलती से टूट जाए ‘जया एकादशी’ का व्रत तो क्या किया जाए

Update: 2026-01-29 02:13 GMT
Ekadashi Vrat :आज 29 जनवरी 2026 जया एकादशी का व्रत रखा जा रहा हैं। सनातन धर्म में एकादशी व्रत को अत्यंत पवित्र और फलदायी माना गया है। यह व्रत यदि पूर्ण नियमों के साथ किया जाए तो व्यक्ति के जीवन से कष्ट, दोष और बाधाएं दूर होती हैं। लेकिन कई बार अज्ञानवश, भूलवश या मजबूरी में एकादशी व्रत खंडित हो जाता है, जिससे मन में ग्लानि और चिंता होने लगती है।
ऐसे में शास्त्रों में भूलवश या किसी मजबूरी के कारण एकादशी व्रत खंडित हो जाने पर उससे उत्पन्न दोष से मुक्ति पाने के उपाय भी बताए गए हैं।
एकादशी व्रत खंडित हो जाने पर क्या करें:
भगवान विष्णु से क्षमा याचना करें:
यदि व्रत टूट जाए तो सबसे पहले शांत मन से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी से क्षमाप्रार्थना करें। यह मान्यता है कि सच्चे हृदय से मांगी गई क्षमा अवश्य स्वीकार होती है।
द्वादशी तिथि को पारण विधि सही रखें:
व्रत टूटने के बाद द्वादशी के दिन सही समय पर पारण करना बहुत आवश्यक होता है। पारण से पहले तुलसी दल भगवान विष्णु को अर्पित करें और फिर अन्न ग्रहण करें।
दोष शांति के लिए इस मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें—
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”
मंत्र जाप से व्रत दोष का प्रभाव कम होता है।
 ब्राह्मण या जरूरतमंद को दान दें:
व्रत भंग होने पर अन्न, वस्त्र, फल या दक्षिणा का दान करना विशेष फलदायी माना गया है। इससे व्रत से जुड़े दोष शांत होते हैं।
अगली एकादशी का व्रत पूर्ण श्रद्धा से करें:
शास्त्रों के अनुसार, यदि कोई एकादशी खंडित हो जाए तो अगली एकादशी का व्रत पूरी निष्ठा और नियमों के साथ करने से दोष समाप्त हो जाता है।
 व्रत कथा का पाठ करें:
जया एकादशी या विष्णु एकादशी व्रत कथा का पाठ करने से मानसिक शांति मिलती है और पुण्य की प्राप्ति होती है।
धर्मग्रंथों में कहा गया है कि भगवान विष्णु भाव के भूखे होते हैं, नियमों की कठोरता से अधिक वे भक्त की सच्ची श्रद्धा को महत्व देते हैं। इसलिए अनजाने में हुई भूल से घबराने की बजाय, सही उपाय अपनाकर पुनः भक्ति मार्ग पर आगे बढ़ना ही उत्तम माना गया है|
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