Shimla. शिमला। हिमाचल प्रदेश में बागबानों को सेब का समर्थन मूल्य देने का मामला कैबिनेट की बैठक में जाएगा। वैसे पिछली बार कैबिनेट के लिए यह प्रस्ताव तैयार किया गया था, मगर इससे पहले वित्त विभाग की मंजूरी नहीं मिल पाई थी। सूत्रों के अनुसार बागबानी विभाग की तरफ से यह मामला वित्त विभाग को भेजा गया था, जहां से मंजूरी का इंतजार है। इसके बाद मंत्रिमंडल निर्णय लेगा कि समर्थन मूल्य को बढ़ाया जाए या फिर पूर्व की भांति ही रखा जाए। वैसे 12 रुपए प्रति किलो की दर से सरकार बागबानों से सेब की खरीद कर रही है। सरकार की एजेंसियों एचपीएमसी व हिमफैड बागबानों से सेब खरीदती है और यह ऐसा सेब होता है, जिसको मार्केट में उतना अच्छा दाम नहीं मिलता। इस सेब की खरीद करके सरकारी एजेंसी इसका कंसंट्रेट बनाती हैं, मगर पिछले साल से वर्तमान सरकार ने इस सेब की भी गुणवत्ता पर ज्यादा ध्यान दिया है। पिछली बार सरकारी एजेंसियों ने गला-सड़ा सेब नहीं खरीदा था और इस बार भी ऐसा ही होगा। इससे पहले ऐसा होता आया है कि सरकारी एजेंसियों को बागबान ग्रेड-डी सेब बेचते थे।
जो रास्ते में ही सड़ जाता था, जिससे सरकारी एजेंसियों को काफी ज्यादा नुकसान उठाना पड़ता था। अभी कैबिनेट में जो मामला जाएगा, उसमें न केवल सेब के समर्थन मूल्य यानि एमआईएस में कितना सेब खरीदा जाना है, उसको तय किया जाएगा। वहीं सेब का समर्थन मूल्य कितना रखा जाएगा, इस पर भी फैसला होना है। हो सकता है कि इस बार सरकार सेब की ग्रेडिंग के हिसाब से समर्थन मूल्य रखे। इससे सरकारी एजेंसी को भी फायदा होगा। यहां बता दें कि एचपीएमसी ने अब पराला में एक नया यूनिट लगाया है और करोड़ों रुपए का आधुनिक संयंत्र यहां बनाया गया है। यहां पर क्वालिटी सेब की ही प्रोसेसिंग हो सकती है। पिछले साल सेब सीजन में करीब दो हजार टन एप्पल कंसंट्रेट तैयार किया गया था और इसे बेच भी दिया गया है। कंपनियों ने हिमाचली एप्पल कंसंट्रेट को अच्छा रुझान दिखाया था। हालांकि अभी ट्रंप टैरिफ का इंतजार किया जा रहा है जिससे पहले भाजपा ने दावा किया है कि विदेशी सेब महंगा आएगा। इस बार सरकार ने पूरी तरह से यूनिवर्सल कॉर्टन को लागू कर दिया है और मार्केट में सभी कंपनियां अब यूनिवर्सल कॉर्टन ही तैयार कर रही हैं।