बिहार :  बिहार में फर्जी शिक्षिका के नाम पर 98.12 लाख रुपये के वेतन भुगतान का मामला सामने आने के बाद वित्त विभाग ने राज्यभर में वेतन और भत्तों की शत-प्रतिशत जांच का निर्देश दिया है। वित्त विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार ने शिक्षा विभाग के सचिव को पत्र भेजकर पदाधिकारियों, शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मियों के भुगतान की जांच सुनिश्चित करने को कहा है। अगले माह का वेतन जारी करने से पहले यह जांच अनिवार्य रूप से पूरी करनी होगी। नौ अक्टूबर को जारी पत्र में एचआरएमएस पोर्टल से वेतन विपत्र तैयार किए जाने का भी उल्लेख किया गया है।
यह निर्देश जिला शिक्षा विभाग में सामने आए फर्जी भुगतान के मामले के बाद जारी हुआ है। फर्जी शिक्षिका के नाम पर 98.12 लाख रुपये का वेतन भुगतान होने की जानकारी ने भुगतान व्यवस्था की जांच को जरूरी बना दिया है। वित्त विभाग ने इसके बाद केवल संबंधित मामले तक जांच सीमित रखने के बजाय राज्यभर में पदाधिकारियों और कर्मचारियों के वेतन एवं भत्तों की पूरी जांच करने को कहा है। निर्देश के दायरे में शिक्षक और शिक्षकेत्तर कर्मी भी शामिल हैं।
प्रधान सचिव विनय कुमार की ओर से शिक्षा विभाग के सचिव को भेजे गए पत्र में जांच की समयसीमा स्पष्ट रखी गई है। अगले माह के वेतन भुगतान से पहले प्रक्रिया पूरी करना अनिवार्य होगा। इसका अर्थ है कि आगामी भुगतान की तैयारी के साथ ही वेतन और भत्तों से संबंधित विवरणों की जांच पूरी करनी है। पत्र में शत-प्रतिशत जांच का निर्देश दिया गया है, इसलिए इसे कुछ कर्मचारियों या चुनिंदा वेतन विपत्रों की जांच तक सीमित नहीं रखा जा सकता।
वित्त विभाग का यह कदम फर्जी नाम पर हुए भुगतान के बाद आया है। सामने आए मामले में 98.12 लाख रुपये की राशि का उल्लेख है। हालांकि यह भुगतान कितने समय में किया गया, संबंधित जिला कौन-सा है और भुगतान प्रक्रिया में किन लोगों की भूमिका थी, इसका विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं है। फिलहाल स्पष्ट जानकारी फर्जी शिक्षिका के नाम पर वेतन भुगतान और उसके बाद राज्यव्यापी जांच के आदेश से संबंधित है।
नौ अक्टूबर के पत्र में वित्त विभाग ने कहा है कि राज्यकर्मियों के वेतन विपत्र एचआरएमएस पोर्टल के माध्यम से तैयार किए जाते हैं। वेतन विपत्र तैयार करने की इस व्यवस्था का उल्लेख जांच के निर्देश के साथ किया गया है। हालांकि पोर्टल में दर्ज जानकारी की जांच किस तकनीकी प्रक्रिया से होगी अथवा किन दस्तावेजों का मिलान किया जाएगा, इसका विवरण दिए गए अंश में नहीं है। इसलिए जांच की कोई अतिरिक्त प्रक्रिया निर्धारित होने का दावा नहीं किया जा सकता।
पत्र में पदाधिकारियों, शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मियों, तीनों वर्गों को शामिल किया गया है। इससे जांच का दायरा केवल शिक्षकों के वेतन तक सीमित नहीं रहता। वेतन के साथ भत्तों की भी शत-प्रतिशत जांच करनी होगी। वित्त विभाग ने शिक्षा विभाग के सचिव को निर्देश देकर इस प्रक्रिया को अगले भुगतान से पहले पूरा करने की जिम्मेदारी सौंपी है। आदेश में तय समयसीमा आगामी माह के वेतन भुगतान से सीधे जुड़ी हुई है।
इस मामले का सबसे गंभीर पहलू किसी फर्जी शिक्षिका के नाम पर बड़ी राशि का भुगतान होना है। अब वित्त विभाग यह सुनिश्चित करने के लिए पूरी जांच चाहता है कि भुगतान संबंधी विवरणों की समीक्षा हो। हालांकि आदेश से यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि राज्यभर में सभी वेतन भुगतान में गड़बड़ी हुई है। जांच का निर्देश सभी संबंधित पदाधिकारियों और कर्मियों के लिए है, जबकि सामने आया फर्जी भुगतान एक विशिष्ट मामला है।
वेतन और भत्तों की जांच के लिए अगले माह के भुगतान से पहले की समयसीमा रखे जाने से शिक्षा विभाग को निर्धारित अवधि में प्रक्रिया पूरी करनी होगी। पत्र में जांच को अनिवार्य बताया गया है। उपलब्ध विवरण में वेतन रोकने, भुगतान की तारीख बदलने या किसी कर्मचारी वर्ग का भुगतान स्थगित करने का अलग आदेश नहीं दिया गया है। इसलिए निर्देश का मुख्य बिंदु आगामी वेतन भुगतान से पहले शत-प्रतिशत जांच पूरी करना है।
फर्जी शिक्षिका के नाम पर भुगतान के खुलासे के बाद अब राज्यभर की जांच के परिणाम महत्वपूर्ण होंगे। उनसे संबंधित वेतन और भत्तों के विवरण की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल जांच में किसी अन्य गड़बड़ी के मिलने की जानकारी नहीं है। साथ ही 98.12 लाख रुपये वाले मामले में राशि की वसूली, किसी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई या जिम्मेदारी तय किए जाने का विवरण भी नहीं दिया गया है।
वित्त विभाग के पत्र ने वेतन भुगतान की जांच को व्यापक दायरे में रखा है। इसमें सभी संबंधित पदाधिकारियों, शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के वेतन एवं भत्तों को शामिल किया गया है। एचआरएमएस पोर्टल के माध्यम से तैयार होने वाले वेतन विपत्रों की व्यवस्था के बीच यह निर्देश जारी हुआ है। अब शिक्षा विभाग को अगले माह के भुगतान से पहले जांच पूरी करनी है। सामने आए फर्जी भुगतान के मामले के बाद विभागीय स्तर पर जारी यह आदेश पूरे राज्य के लिए लागू जांच प्रक्रिया से संबंधित है।
फिलहाल नौ अक्टूबर को जारी पत्र के अनुसार, आगामी माह का वेतन भुगतान होने से पहले शत-प्रतिशत जांच अनिवार्य है। वित्त विभाग ने 98.12 लाख रुपये के फर्जी भुगतान के बाद यह निर्देश दिया है। जांच के निष्कर्ष सामने आने पर भुगतान संबंधी स्थिति और स्पष्ट होगी।
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