राज्यपाल ने युवाओं से संस्कृति से जुड़े रहने का किया आह्वान

Update: 2026-07-27 11:48 GMT
Chamba. चंबा। राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने आज चंबा के ऐतिहासिक अंतरराष्ट्रीय मिंजर मेले का शुभारंभ किया। उन्होंने इस अवसर पर चंबा और हिमाचल प्रदेश की जनता को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सदियों पुराना यह मेला प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, सांप्रदायिक सौहार्द और जीवंत लोक परंपराओं का प्रतीक है। राज्यपाल ने ऐतिहासिक चौगान में जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश ने अपनी समृद्ध परंपराओं, लोक-कलाओं, मेलों और त्योहारों को पीढ़ी-दर-पीढ़ी संजोकर रखा है। उन्होंने युवाओं से अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने तथा भारत की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करने का आह्वान किया। राज्यपाल ने कहा कि मिंजर जैसे मेले हमारी सांस्कृतिक परंपराओं को संरक्षित रखने के साथ-साथ एकता, भाईचारे और सामाजिक सद्भाव की भावना को भी मजबूत करते हैं। उन्होंने नशे की बढ़ती समस्या पर चिंता व्यक्त करते हुए समाज से नशे के खिलाफ जनजागरूकता अभियान में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित
करने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि नशे के विरूद्ध हमें मिलकर अपने युवाओं की रक्षा करनी होगी और नशामुक्त हिमाचल का निर्माण करना होगा। उन्होंने इस दिशा में चंबा पुलिस द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना भी की। राज्यपाल ने चंबा की विश्वप्रसिद्ध पारंपरिक हस्तकलाओं, जिनमें चंबा रूमाल, चंबा चप्पल और चंबा थाल शामिल हैं, का उल्लेख करते हुए उन शिल्पकारों की प्रशंसा की जो जिले की समृद्ध कलात्मक विरासत को संरक्षित रखने में महत्त्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। इससे पूर्व, कारगिल विजय दिवस के अवसर पर राज्यपाल ने चंबा के कारगिल शहीदों आशीष थापा, खेम राज और ओम प्रकाश को पुष्पांजलि अर्पित की तथा उपस्थित जनसमूह को राष्ट्र के वीर सैनिकों के आदर्शों और बलिदान को सदैव स्मरण रखने एवं उनका सम्मान करने की शपथ दिलाई। उन्होंने कारगिल युद्ध के वीर सैनिकों तथा वीरता पुरस्कार प्राप्त सैन्य कर्मियों के परिजनों को भी सम्मानित किया। इनमें सेवानिवृत्त कर्नल रवि वैद्य, विद्या देवी, मुशरबू देवी, सेवानिवृत्त सूबेदार मेजर अशोक कुमार, हवलदार मिलाप सिंह, हेम राज, हवलदार सुशील कुमार, हवलदार करण सिंह, अश्वनी कुमार तथा हवलदार धर्मपाल शामिल थे। राज्यपाल ने मिंजर ध्वज फहराकर मेले का विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर अजीत भट्ट एवं उनकी मंडली ने पारंपरिक कुंजड़ी-मल्हार की प्रस्तुति दी। यह मंडली पिछले 32 वर्षों से इस विशिष्ट सांस्कृतिक परंपरा का निर्वहन कर रही है।
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