गांधीनगर: गुजरात में बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों पर अदालतें सख्ती से कार्रवाई कर रही हैं। राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार, 2022 से अगस्त 2026 के बीच पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज मामलों में अदालतों ने 1,785 फैसले सुनाए हैं। इनमें 908 आरोपियों को उम्रकैद और 16 को मौत की सजा दी गई है।
पुलिस की जांच की रफ्तार भी तेज हुई है। ज्यादातर पॉक्सो मामलों में 45 दिन के अंदर चार्जशीट दाखिल की जा रही है और फास्ट-ट्रैक कोर्ट में जल्द सुनवाई शुरू हो रही है। हाल ही में कलोल के एक मामले में स्पेशल पॉक्सो कोर्ट ने 15 साल की लड़की के अपहरण और यौन शोषण के मामले में 42 साल के एक व्यक्ति को चार्जशीट दाखिल होने के सिर्फ 72 घंटे के भीतर उम्रकैद की सजा सुनाई। उसे अपनी पूरी जिंदगी जेल में ही बितानी होगी।
आंकड़ों के मुताबिक, फैसलों की संख्या लगातार बढ़ी है। साल 2022 में 194 फैसले आए थे, जो 2025 में बढ़कर 499 हो गए। वहीं 2026 के पहले 8 महीनों में ही अदालतें 346 फैसले सुना चुकी हैं, जिनमें 241 उम्रकैद और 2 मौत की सजा शामिल है।
उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने कहा कि राज्य ने बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों पर जीरो-टॉलरेंस की नीति अपनाई है। सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि पीड़ितों और उनके परिवारों को सालों तक इंसाफ का इंतजार न करना पड़े।
हर्ष संघवी ने कहा, "गुजरात में बच्चियों पर बुरी नजर डालने वालों के लिए कोई रहम या नरमी नहीं हो सकती। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में राज्य सरकार ने पॉक्सो मामलों के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट और मजबूत कानूनी ढांचा बनाया है। नतीजा यह है कि पीड़ितों और उनके परिवारों को अब महीनों या सालों में नहीं बल्कि कुछ ही दिनों में तेजी से न्याय मिल रहा है।"
कलोल केस का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि चार्जशीट दाखिल होने के 72 घंटे के भीतर फैसला आना गुजरात पुलिस की बेहतरीन जांच और न्यायपालिका के सख्त रवैये को दिखाता है। उन्होंने कहा, "सिर्फ 72 घंटे में फैसला आना गुजरात पुलिस की वैज्ञानिक जांच और न्यायपालिका के सख्त और सराहनीय दृष्टिकोण का नतीजा है। मैं गुजरात पुलिस और न्यायपालिका को दिल से बधाई देता हूं। हमारा स्पष्ट संकल्प है कि ऐसे अपराधियों को सख्त से सख्त सजा मिले ताकि समाज में एक मजबूत उदाहरण पेश हो।"
पुलिस महानिदेशक जी.एस. मलिक ने कहा कि पॉक्सो मामलों की जांच संवेदनशीलता के साथ की जा रही है, लेकिन साथ ही गति और सख्ती भी बनी हुई है। उन्होंने कहा, "पीड़ितों और उनके परिवारों को तेजी से न्याय दिलाने के लिए पुलिस जांच प्रक्रिया के दौरान 'गहन जांच, सख्त कार्रवाई और त्वरित न्याय' के तीन पहलुओं पर खास ध्यान दे रही है।"
पुलिस के अनुसार, हर पॉक्सो केस की निगरानी की जा रही है ताकि चार्जशीट जल्दी दाखिल हो और बिना देरी के केस फास्ट-ट्रैक कोर्ट में भेजा जाए। पिछले पांच सालों में 140 मामलों में 1 से 15 दिन के भीतर चार्जशीट दाखिल की गई जबकि 1,339 मामलों में जांच 16 से 30 दिन में पूरी कर ली गई। वहीं 5,463 मामलों में 31 से 45 दिन के अंदर चार्जशीट फाइल हुई। आंकड़ों के मुताबिक, ज्यादातर पॉक्सो जांच 45 दिन के भीतर पूरी हो रही है, जिससे ट्रायल जल्दी शुरू हो रहा है और अदालतें तेज गति से फैसले सुना रही हैं।
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