नई दिल्ली: मुंबई-गोवा हाईवे के चौड़ीकरण में लगातार हो रही देरी को लेकर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने नाराजगी जताई है। बुधवार को पणजी में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि इस परियोजना में देरी को लेकर उन्हें शर्मिंदगी महसूस होती है। गडकरी ने यह भी कहा कि हाईवे का काम पूरा होने के बाद होने वाले उद्घाटन कार्यक्रम में वह खुद शामिल नहीं होंगे।
2016 तक पूरा होना था काम
गडकरी ने कहा कि मुंबई-गोवा हाईवे के चौड़ीकरण का काम 2016 तक पूरा हो जाना चाहिए था, लेकिन करीब 15 साल बाद भी परियोजना पूरी तरह खत्म नहीं हो पाई है। उनके मुताबिक अब तक करीब 94 फीसदी काम पूरा हुआ है। उन्होंने ठेकेदारों की कार्यप्रणाली पर भी सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि वह ऐसे ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट करने का रिकॉर्ड बनाना चाहते हैं, जिनकी वजह से सड़क परियोजनाओं में लगातार देरी या गुणवत्ता से जुड़ी समस्याएं सामने आती हैं।
गडकरी की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब मुंबई-गोवा हाईवे का बड़ा हिस्सा तैयार होने के बावजूद यात्रियों को कई जगह सड़क की स्थिति, ट्रैफिक और जलभराव जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
15 साल से जारी है चौड़ीकरण का काम
मुंबई-गोवा हाईवे के चौड़ीकरण की प्रक्रिया 2011 में शुरू हुई थी। करीब 440 किलोमीटर लंबे हिस्से में निर्माण कार्य के बावजूद कई स्थानों पर सड़क पर गड्ढे, पानी जमा होने और मरम्मत की जरूरत जैसी शिकायतें सामने आती रही हैं।
हाईवे के कुछ हिस्सों में यातायात का दबाव भी बना रहता है। परियोजना के कुछ हिस्सों में निर्माण और सुधार का काम अभी भी जारी बताया गया है। मई में खारपाड़ा टोल प्लाजा पर टोल वसूली शुरू कर दी गई थी, लेकिन इसके बाद भी परियोजना के सभी हिस्सों में काम पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
बंदरों के लिए बनाया गया ओवरपास भी ढहा
इस हाईवे परियोजना से जुड़ी एक और घटना ने निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े किए थे। बंदरों को सुरक्षित तरीके से सड़क पार कराने के लिए 2021 में बनाया गया एक ओवरपास बाद में ढह गया था।
इस घटना के बाद सड़क निर्माण की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों को लेकर सवाल उठे थे। हाईवे जैसे बड़े प्रोजेक्ट में केवल सड़क तैयार करना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि लंबे समय तक उसकी मजबूती और यात्रियों की सुरक्षा भी अहम होती है।
जमीन अधिग्रहण और ठेकेदारों की परेशानी बनी वजह
मुंबई-गोवा हाईवे परियोजना में देरी के पीछे कई कारण बताए गए हैं। इनमें जमीन अधिग्रहण, निर्माण शुरू करने से पहले जरूरी मंजूरियों में लगने वाला समय और ठेकेदारों से जुड़ी समस्याएं प्रमुख हैं।
केंद्र सरकार ने 2024 में संसद में भी बताया था कि जमीन अधिग्रहण और कुछ ठेकेदारों की आर्थिक परेशानियों के कारण परियोजना की रफ्तार प्रभावित हुई। अलग-अलग हिस्सों में काम अलग-अलग समय पर आगे बढ़ने की वजह से भी पूरी परियोजना को समय पर पूरा करना चुनौतीपूर्ण रहा।
103 ठेकेदारों पर हुई कार्रवाई
गडकरी ने ठेकेदारों की गुणवत्ता को लेकर सरकार की कार्रवाई का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि पिछले तीन वर्षों में राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण में खराब गुणवत्ता वाले काम के मामले में 103 ठेकेदारों और कंपनियों को ब्लैकलिस्ट किया गया है। इन पर जुर्माना भी लगाया गया।
गडकरी का कहना है कि सड़क निर्माण में गुणवत्ता से समझौता नहीं किया जा सकता। उनका सख्त रुख इस बात का संकेत है कि मंत्रालय परियोजनाओं में देरी और खराब निर्माण को लेकर ठेकेदारों की जवाबदेही तय करना चाहता है।
मुंबई से गोवा को जोड़ने वाला अहम मार्ग
मुंबई-गोवा हाईवे महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्र से होकर मुंबई को गोवा से जोड़ता है। इसका महाराष्ट्र वाला हिस्सा करीब 460 किलोमीटर बताया जाता है। पर्यटन के साथ-साथ यह मार्ग स्थानीय कारोबार और क्षेत्रीय परिवहन के लिए भी महत्वपूर्ण है।
इसी वजह से परियोजना के समय पर पूरा होने की उम्मीद लंबे समय से की जा रही है। अब गडकरी के बयान के बाद एक बार फिर इस हाईवे के काम की गति, गुणवत्ता और इसे पूरी तरह कब तक पूरा किया जाएगा, इस पर ध्यान केंद्रित हो गया है।
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