ओडिशा : मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने संयुक्त अरब अमीरात के कैबिनेट सदस्य और अर्थव्यवस्था एवं पर्यटन मंत्री अब्दुल्ला बिन तौक अल मारी से मुलाकात कर आर्थिक सहयोग और निवेश संबंधों को मजबूत करने पर विस्तार से चर्चा की। बैठक का मुख्य उद्देश्य यूएई के निवेशकों को ओडिशा के तेजी से विकसित हो रहे औद्योगिक और व्यावसायिक इकोसिस्टम से जोड़ना तथा दोनों पक्षों के बीच दीर्घकालीन आर्थिक साझेदारी की संभावनाओं को तलाशना रहा।
मुख्यमंत्री माझी ने बैठक के दौरान राज्य में मौजूद प्राकृतिक संसाधनों, आधुनिक औद्योगिक बुनियादी ढांचे, कुशल मानव संसाधन और निवेशकों के लिए बनाई गई अनुकूल नीतियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ओडिशा अब केवल खनिज और धातु उद्योग तक सीमित राज्य नहीं है, बल्कि वह विनिर्माण, पेट्रोकेमिकल्स, नवीकरणीय ऊर्जा, सूचना प्रौद्योगिकी, पर्यटन, खाद्य प्रसंस्करण, लॉजिस्टिक्स और निर्यात आधारित उद्योगों के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर रहा है।
मुख्यमंत्री ने यूएई के निवेशकों और औद्योगिक समूहों को राज्य में उपलब्ध व्यावसायिक अवसरों का अध्ययन करने और नई परियोजनाएं स्थापित करने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार संभावित निवेशकों को जमीन की उपलब्धता, जरूरी मंजूरी, आधारभूत सुविधाओं और प्रशासनिक सहयोग से संबंधित हरसंभव सहायता प्रदान करेगी। सरकार का प्रयास निवेश प्रस्तावों को जल्द से जल्द धरातल पर उतारने और उद्योगों की स्थापना की प्रक्रिया को सरल बनाने पर केंद्रित है।
माझी ने कहा कि ओडिशा सरकार उद्योगों के लिए पारदर्शी और समयबद्ध स्वीकृति प्रणाली विकसित कर रही है। निवेशकों को विभिन्न विभागों से अनुमति लेने में परेशानी न हो, इसके लिए एकल खिड़की व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है। राज्य में बंदरगाहों, औद्योगिक गलियारों, राजमार्गों, रेलवे नेटवर्क और ऊर्जा आपूर्ति की बेहतर व्यवस्था को निवेश की बड़ी ताकत के रूप में प्रस्तुत किया गया।
बैठक में दोनों नेताओं ने व्यापारिक प्रतिनिधिमंडलों के आदान-प्रदान, उद्योगों के बीच साझेदारी और निवेशकों के साथ नियमित संवाद बनाए रखने की जरूरत पर भी विचार किया। चर्चा में यह बात सामने आई कि यूएई के पास वैश्विक पूंजी, आधुनिक तकनीक, पर्यटन विकास और लॉजिस्टिक्स प्रबंधन का व्यापक अनुभव है। वहीं, ओडिशा के पास प्राकृतिक संसाधन, लंबा समुद्री तट, बड़े बंदरगाह और औद्योगिक विकास की अपार संभावनाएं हैं। इन क्षमताओं को जोड़कर दोनों पक्ष लाभकारी आर्थिक साझेदारी विकसित कर सकते हैं।
ओडिशा सरकार विशेष रूप से गैर-खनिज क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने का प्रयास कर रही है। इसके तहत इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर, हरित ऊर्जा, वस्त्र एवं परिधान, समुद्री उत्पाद, कृषि आधारित उद्योग और पर्यटन परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जा रही है। राज्य सरकार का मानना है कि अलग-अलग क्षेत्रों में निवेश आने से अर्थव्यवस्था में विविधता आएगी और बड़ी संख्या में स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
पर्यटन क्षेत्र को भी बैठक का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया। ओडिशा में समुद्री तटों, मंदिरों, वन्यजीव क्षेत्रों, जनजातीय संस्कृति, बौद्ध विरासत और इको-टूरिज्म की व्यापक संभावनाएं हैं। मुख्यमंत्री ने पर्यटन से जुड़ी आधारभूत सुविधाओं, होटल परियोजनाओं, रिसॉर्ट, कन्वेंशन सेंटर और अंतरराष्ट्रीय स्तर की सेवाओं के विकास में यूएई की कंपनियों की भागीदारी का आह्वान किया। यूएई को पर्यटन और आतिथ्य उद्योग के क्षेत्र में वैश्विक अनुभव रखने वाला महत्वपूर्ण भागीदार माना जाता है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार की प्राथमिकता केवल बड़े निवेश प्रस्ताव हासिल करना नहीं, बल्कि ऐसे उद्योग स्थापित कराना भी है जिनसे स्थानीय स्तर पर रोजगार और छोटे व्यवसायों को बढ़ावा मिले। नई परियोजनाओं के साथ कौशल विकास केंद्र स्थापित करने, युवाओं को उद्योगों की जरूरत के अनुसार प्रशिक्षण देने और स्थानीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को आपूर्ति श्रृंखला से जोड़ने पर भी जोर दिया जा रहा है।
यूएई भारत के लिए एक महत्वपूर्ण आर्थिक और व्यापारिक भागीदार है। वहां मौजूद निवेश संस्थान, निजी औद्योगिक समूह और सॉवरेन वेल्थ फंड दुनिया के अनेक देशों में बुनियादी ढांचे, ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स, प्रौद्योगिकी और पर्यटन परियोजनाओं में निवेश करते हैं। इसी कारण कई भारतीय राज्य यूएई के निवेशकों के साथ सीधे संबंध स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं। एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार ओडिशा सहित कई राज्य यूएई की कंपनियों, फैमिली ऑफिस और निवेश कोषों के सामने क्षेत्र-विशेष के अवसर प्रस्तुत कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री माझी का यह संवाद उनके तीन दिवसीय यूएई निवेश अभियान का हिस्सा है। यात्रा का उद्देश्य वैश्विक निवेशकों के सामने ओडिशा की औद्योगिक क्षमताओं को प्रस्तुत करना और राज्य की अंतरराष्ट्रीय आर्थिक भागीदारी का विस्तार करना है। मुख्यमंत्री के अबू धाबी पहुंचने के साथ ही बैठकों और निवेश संवादों का सिलसिला शुरू हुआ था। टाइम्स ऑफ इंडिया
बैठक को राज्य सरकार की वैश्विक निवेश रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब आगे यह देखना होगा कि यूएई के निवेशकों के साथ हुई बातचीत कितने ठोस प्रस्तावों, समझौतों और परियोजनाओं में बदलती है। यदि प्रस्तावित साझेदारी जमीन पर उतरती है तो इससे औद्योगिक विकास, निर्यात, पर्यटन, आधारभूत ढांचे और रोजगार सृजन को नई गति मिल सकती है।