बसपा में इस्तीफों का दौर धर्म सिंह ने आकाश आनंद के समर्थन में छोड़ी पार्टी
लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी में आकाश आनंद को लेकर शुरू हुआ विवाद अब संगठन के भीतर नई हलचल पैदा करता दिखाई दे रहा है। बसपा प्रमुख मायावती द्वारा अपने भतीजे और पूर्व राष्ट्रीय समन्वयक आकाश आनंद को पार्टी से पूरी तरह मुक्त किए जाने के बाद उनके समर्थकों की प्रतिक्रिया सामने आने लगी है। इसी कड़ी में बसपा से जुड़े धर्म सिंह के इस्तीफे की चर्चा तेज है। इसे आकाश आनंद के समर्थन और मायावती के फैसले के विरोध से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि धर्म सिंह की संगठनात्मक जिम्मेदारी और इस्तीफे के पूरे विवरण की स्वतंत्र पुष्टि अभी स्पष्ट नहीं है।
आकाश आनंद को लेकर घटनाक्रम गुरुवार सुबह तेजी से बदला। मायावती ने सोशल मीडिया पर लंबी पोस्ट जारी करते हुए कहा कि जिस तरह 3 सितंबर को आकाश को राष्ट्रीय समन्वयक पद की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों से मुक्त किया गया था, उसी तरह अब उन्हें पार्टी से भी पूरी तरह मुक्त कर दिया जाए। मायावती ने आकाश पर पार्टी और बहुजन आंदोलन की तुलना में पारिवारिक रिश्तों को ज्यादा महत्व देने का आरोप भी लगाया।
इस फैसले के कुछ ही घंटों बाद BSP के अंदर आकाश के समर्थकों की नाराजगी की चर्चाएं शुरू हो गईं। धर्म सिंह के इस्तीफे को इसी घटनाक्रम की पहली राजनीतिक प्रतिक्रियाओं में गिना जा रहा है। अगर आकाश के समर्थन में अन्य पदाधिकारी भी इसी तरह पार्टी छोड़ते हैं तो 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रही BSP के लिए संगठनात्मक चुनौती बढ़ सकती है।
आकाश को लेकर अचानक क्यों बदला मायावती का रुख?
आकाश आनंद पिछले कुछ वर्षों में BSP के सबसे चर्चित युवा चेहरों में शामिल रहे हैं। मायावती ने उन्हें पार्टी में बड़ी जिम्मेदारियां दी थीं और एक समय उन्हें अपने राजनीतिक उत्तराधिकारी के रूप में भी आगे बढ़ाया था।
लेकिन आकाश और पार्टी नेतृत्व के रिश्तों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिला।
हालिया विवाद की जड़ आकाश आनंद के ससुर और पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ से जुड़ी है। मायावती ने अशोक सिद्धार्थ पर निजी स्वार्थ और राजनीतिक महत्वाकांक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाए थे।
9 सितंबर को मायावती ने कहा था कि अगर अशोक सिद्धार्थ अपने दामाद आकाश आनंद का राजनीतिक भविष्य बेहतर देखना चाहते हैं तो उन्हें राजनीति से पूरी तरह संन्यास ले लेना चाहिए। मायावती ने यह संकेत भी दिया था कि ऐसा होने पर आकाश को दोबारा जिम्मेदारी देने पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जा सकता है।
इसके बाद अशोक सिद्धार्थ ने 10 सितंबर की सुबह राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा कर दी।
उन्होंने मायावती के प्रति अपनी निष्ठा जताई और कहा कि बहुजन मिशन के लिए उन्होंने करीब 35 वर्षों तक काम किया है। साथ ही उन आरोपों को खारिज किया कि वह आकाश को प्रभावित या गुमराह कर रहे हैं।
ससुर ने लिया संन्यास फिर भी बाहर हुए आकाश
अशोक सिद्धार्थ के संन्यास लेने के बाद शुरुआत में ऐसा लग रहा था कि आकाश आनंद की BSP में मजबूत वापसी का रास्ता खुल सकता है।
लेकिन कुछ ही घंटों में पूरा राजनीतिक समीकरण पलट गया।
मायावती ने अशोक सिद्धार्थ के संन्यास को सही लेकिन बहुत देर से उठाया गया कदम बताया। इसके बाद उन्होंने आकाश आनंद के व्यवहार पर सवाल उठाए।
मायावती ने खास तौर पर इस बात का उल्लेख किया कि आकाश ने अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से संन्यास से संबंधित उनकी पिछली पोस्ट को रीपोस्ट तक नहीं किया, जबकि इससे पहले वह उनकी पोस्ट रीपोस्ट करके अपनी निष्ठा दिखाते रहे थे।
मायावती ने इसे आकाश के अपने ससुर और पारिवारिक संबंधों के प्रति ज्यादा लगाव से जोड़ा।
इसके बाद उन्होंने सवाल किया कि अगर कोई नेता पार्टी, आंदोलन और अपने राजनीतिक करियर की तुलना में रिश्तों को ज्यादा प्राथमिकता देगा तो वह ‘डबल माइंड’ होकर संगठन के हित में प्रभावी तरीके से कैसे काम कर सकेगा।
यहीं से आकाश की पार्टी से विदाई का रास्ता साफ हो गया।
आकाश को पार्टी से किया पूरी तरह मुक्त
मायावती ने अपनी पोस्ट में कहा कि आकाश को जिस तरह राष्ट्रीय समन्वयक की जिम्मेदारी से मुक्त किया गया था, अब उसी तरह पार्टी से भी पूरी तरह मुक्त कर देना बेहतर है।
हालांकि मायावती ने अपनी पोस्ट में परंपरागत तरीके से ‘निष्कासित’ शब्द का इस्तेमाल नहीं किया। उन्होंने आकाश को पार्टी से ‘पूरी तरह फ्री’ करने की बात कही। पार्टी सूत्रों के हवाले से प्रकाशित रिपोर्टों ने इसे निष्कासन के रूप में बताया है।
इस फैसले ने BSP की अंदरूनी राजनीति को एक बार फिर गरमा दिया।
आकाश पहले भी दो बार ऐसी कार्रवाई का सामना कर चुके हैं और बाद में उनकी पार्टी में वापसी हुई थी। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक यह तीसरी बार है जब उन्हें पार्टी से बाहर किया गया है।
लेकिन इस बार घटनाक्रम ज्यादा गंभीर दिखाई दे रहा है क्योंकि पार्टी में उनके छोटे भाई ईशान आनंद का कद भी बढ़ रहा है।
छोटे भाई ईशान ने मायावती का दिया साथ
आकाश आनंद को पार्टी से मुक्त करने की घोषणा के बाद उनके छोटे भाई ईशान आनंद का रुख भी चर्चा में आ गया।
ईशान ने मायावती की उस पोस्ट को रीपोस्ट किया जिसमें आकाश को पार्टी से पूरी तरह मुक्त करने की बात कही गई थी।
यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण माना गया क्योंकि आकाश के खिलाफ मायावती की नाराजगी की एक वजह उनका पिछली पोस्ट को रीपोस्ट नहीं करना भी बताया गया था।
दूसरी तरफ ईशान लगातार मायावती और BSP की संगठनात्मक लाइन के साथ दिखाई दे रहे हैं।
ईशान को हाल ही में मुख्य सेक्टर प्रभारी की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है और करीब 15 राज्यों में पार्टी के काम की समीक्षा से जोड़ा गया है। वह BSP के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और अपने पिता आनंद कुमार को रिपोर्ट करेंगे।
ऐसे में एक भाई के पार्टी से बाहर होने और दूसरे का संगठन में कद बढ़ने ने BSP की अंदरूनी राजनीति को और दिलचस्प बना दिया है।
अब धर्म सिंह के इस्तीफे से नई चर्चा
इसी राजनीतिक माहौल के बीच धर्म सिंह के BSP छोड़ने की खबर सामने आने से आकाश समर्थक खेमे को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
इस्तीफे को अगर आकाश आनंद के समर्थन से जोड़ा जाता है तो इसका राजनीतिक संदेश महत्वपूर्ण हो सकता है। यह संकेत देगा कि आकाश की BSP से विदाई केवल मायावती और उनके परिवार के बीच का मामला नहीं रह गई है बल्कि संगठन के कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं की भावनाएं भी इससे जुड़ी हुई हैं।
हालांकि किसी एक नेता के इस्तीफे के आधार पर BSP में बड़े पैमाने पर टूट की बात कहना फिलहाल जल्दबाजी होगी।
यह देखना जरूरी होगा कि आने वाले दिनों में कितने अन्य नेता या पदाधिकारी आकाश के समर्थन में सार्वजनिक रूप से सामने आते हैं।
अगर इस्तीफों का सिलसिला आगे नहीं बढ़ता तो इसे सीमित असंतोष माना जा सकता है। लेकिन अगर अलग-अलग जिलों और संगठनात्मक इकाइयों से नेता आकाश के समर्थन में पार्टी छोड़ने लगते हैं तो मायावती के लिए यह बड़ी चुनौती बन सकती है।
आकाश का अगला कदम सबसे बड़ा सवाल
पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे बड़ा सस्पेंस खुद आकाश आनंद के अगले राजनीतिक कदम को लेकर बना हुआ है।
उन्होंने अभी किसी दूसरी राजनीतिक पार्टी में शामिल होने की घोषणा नहीं की है।
हालांकि उनके BSP से अलग होते ही समाजवादी पार्टी में जाने की अटकलें शुरू हो गईं। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से भी आकाश को पार्टी में लेने के बारे में सवाल किया गया है।
आकाश पिछले कुछ समय से BSP में अपनी स्थिति को लेकर संकेत देते रहे थे। कुछ दिन पहले उन्होंने सोशल मीडिया प्रोफाइल पर अपनी पहचान बदलकर खुद को ‘BSP Supporter’ लिखा था। इससे पहले राष्ट्रीय समन्वयक पद हटने के बाद उन्होंने खुद को पार्टी कार्यकर्ता बताया था।
अब पार्टी से पूरी तरह मुक्त किए जाने के बाद उनके सामने नया राजनीतिक रास्ता चुनने का सवाल है।
क्या अलग राजनीतिक रास्ता चुनेंगे आकाश?
आकाश के पास मोटे तौर पर कई राजनीतिक विकल्प हो सकते हैं।
वह कुछ समय के लिए सक्रिय राजनीति से दूरी बना सकते हैं, किसी दूसरी पार्टी में जा सकते हैं या भविष्य में स्वतंत्र राजनीतिक मंच तैयार करने की कोशिश कर सकते हैं।
लेकिन फिलहाल इनमें से किसी विकल्प की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
आकाश युवा नेता हैं और BSP में रहते हुए उन्हें देश के कई हिस्सों में संगठनात्मक तथा चुनावी जिम्मेदारियां मिली थीं। इससे उन्होंने अपना अलग समर्थक वर्ग तैयार करने की कोशिश की।
यही वजह है कि उनके BSP से बाहर होने के बाद उनके समर्थकों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।
मायावती के लिए 2027 सबसे बड़ी प्राथमिकता
मायावती ने आकाश को लेकर जारी अपनी पोस्ट में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों का भी उल्लेख किया।
उन्होंने BSP कार्यकर्ताओं से निजी और पारिवारिक हितों से ऊपर उठकर पार्टी तथा बहुजन आंदोलन के लिए काम करने की अपील की। साथ ही उत्तर प्रदेश में एक बार फिर पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने के लक्ष्य के साथ जुटने को कहा।
इससे साफ है कि मायावती आकाश प्रकरण को पार्टी अनुशासन और आगामी चुनाव की रणनीति से जोड़कर देख रही हैं।
उनकी कोशिश संगठन को यह संदेश देने की है कि BSP में व्यक्तिगत रिश्तों से ऊपर पार्टी और आंदोलन रहेगा।
लेकिन यही फैसला अगर नेताओं के इस्तीफे का कारण बनता है तो चुनाव से पहले संगठन को नुकसान भी हो सकता है।
BSP के सामने संगठन बचाने की चुनौती
उत्तर प्रदेश की राजनीति में BSP लंबे समय से दलित राजनीति की एक प्रमुख ताकत रही है। पार्टी का सबसे मजबूत आधार उसका अनुशासित कैडर और मायावती का केंद्रीकृत नेतृत्व रहा है।
आकाश आनंद को युवा नेतृत्व के रूप में आगे बढ़ाने का उद्देश्य नई पीढ़ी के मतदाताओं और कार्यकर्ताओं को BSP से जोड़ना भी माना जाता था।
लेकिन उनकी बार-बार नियुक्ति, पद से हटाया जाना और फिर वापसी संगठन में असमंजस पैदा कर सकती है।
अब आकाश को पूरी तरह मुक्त करने के बाद पार्टी को यह स्पष्ट करना होगा कि अगली पीढ़ी में उसका प्रमुख चेहरा कौन होगा।
ईशान आनंद को बढ़ती जिम्मेदारी मिलना इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण है। रिपोर्टों के मुताबिक उन्हें उत्तर भारत के कई क्षेत्रों में बड़ी संगठनात्मक भूमिका दी गई है।
एक इस्तीफे से ज्यादा अहम होंगे अगले कुछ दिन
धर्म सिंह का इस्तीफा राजनीतिक रूप से चर्चा जरूर पैदा करता है, लेकिन BSP में वास्तविक असर का अंदाजा अगले कुछ दिनों की गतिविधियों से ही लगाया जा सकेगा।
अगर आकाश आनंद खुलकर अपने समर्थकों को कोई राजनीतिक संदेश देते हैं तो स्थिति तेजी से बदल सकती है।
दूसरी तरफ अगर वह चुप रहते हैं और BSP के अधिकांश पदाधिकारी मायावती के फैसले के साथ खड़े रहते हैं तो पार्टी नेतृत्व इस विवाद को नियंत्रित करने में सफल हो सकता है।
फिलहाल इतना तय है कि 10 सितंबर का दिन BSP की अंदरूनी राजनीति के लिए बड़ा मोड़ बन गया है। सुबह अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति से संन्यास लिया, उसके बाद मायावती ने आकाश आनंद को पार्टी से पूरी तरह मुक्त कर दिया और छोटे भाई ईशान आनंद ने मायावती की पोस्ट को रीपोस्ट कर संगठन के साथ खड़े होने का संकेत दिया।
अब आकाश समर्थक नेताओं के संभावित इस्तीफों की चर्चा ने इस कहानी को नया मोड़ दे दिया है।
अगर धर्म सिंह के बाद और नेता आकाश के समर्थन में BSP छोड़ते हैं तो मायावती के सामने 2027 चुनाव से पहले संगठन को एकजुट रखने की बड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है। लेकिन अभी इसे ‘बसपा में भगदड़’ या बड़े पैमाने की टूट कहना तथ्यात्मक रूप से जल्दबाजी होगी।
अगला बड़ा सवाल यही है—**आकाश आनंद अब क्या करेंगे और उनके साथ BSP के कितने नेता खड़े होते हैं?**