उत्तर प्रदेश

आकाश आनंद की सपा में एंट्री पर अखिलेश ने तोड़ी चुप्पी

Ratna Netam
10 Sept 2026 4:49 PM IST
आकाश आनंद की सपा में एंट्री पर अखिलेश ने तोड़ी चुप्पी
x
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले एक बार फिर बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने अपने भतीजे और पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय समन्वयक आकाश आनंद को BSP से पूरी तरह मुक्त करने का ऐलान कर दिया है। मायावती के इस फैसले के बाद राजनीतिक गलियारों में आकाश आनंद के अगले कदम को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। इसी बीच जब समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव से पूछा गया कि अगर आकाश आनंद सपा में आते हैं तो क्या उन्हें पार्टी में लिया जाएगा, अखिलेश ने साफ कहा कि जो भी समाजवादी पार्टी की विचारधारा और सिद्धांतों के साथ आना चाहता है, उसका स्वागत है।
अखिलेश यादव का यह बयान ऐसे समय आया है जब कुछ ही सप्ताह पहले आकाश आनंद और समाजवादी पार्टी के बीच तीखी बयानबाजी देखने को मिली थी। आकाश ने चुनावी मंच से अखिलेश यादव को ‘अंकल’ कहकर संबोधित किया था और सपा के PDA फॉर्मूले पर सवाल उठाए थे। इसके बावजूद अब बदले हुए राजनीतिक हालात में अखिलेश का स्वागत वाला बयान यूपी की राजनीति में नई अटकलों को जन्म दे रहा है।
आकाश आनंद को लेकर अखिलेश से पूछा गया सवाल
मायावती के फैसले के बाद अखिलेश यादव से सीधे सवाल किया गया कि अगर आकाश आनंद समाजवादी पार्टी में शामिल होना चाहें तो क्या सपा उन्हें अपने साथ लेगी?
अखिलेश ने किसी व्यक्ति विशेष को लेकर लंबी टिप्पणी करने के बजाय अपनी पार्टी की सामान्य नीति स्पष्ट की। उन्होंने संकेत दिया कि जो लोग समाजवादी पार्टी की विचारधारा, नीतियों और सिद्धांतों को स्वीकार करके साथ आना चाहते हैं, उनके लिए पार्टी के दरवाजे खुले हैं।
इस बयान को आकाश आनंद के लिए सीधे औपचारिक निमंत्रण के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। अभी तक न तो अखिलेश यादव ने यह कहा है कि आकाश आनंद से सपा की कोई बातचीत चल रही है और न ही आकाश आनंद ने समाजवादी पार्टी में शामिल होने का ऐलान किया है।
इसलिए फिलहाल मामला राजनीतिक संभावनाओं और अटकलों तक सीमित है।
मायावती ने आकाश को BSP से किया मुक्त
गुरुवार को BSP प्रमुख मायावती ने आकाश आनंद को लेकर बड़ा फैसला लिया। उन्होंने कहा कि आकाश को पार्टी से पूरी तरह मुक्त किया जाना चाहिए।
इससे पहले 3 सितंबर को आकाश आनंद को राष्ट्रीय समन्वयक समेत महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों से हटा दिया गया था। अब उन्हें पार्टी से भी पूरी तरह अलग करने की घोषणा कर दी गई है।
मायावती ने अपने बयान में आकाश आनंद के राजनीतिक भविष्य और पारिवारिक संबंधों का भी जिक्र किया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब कोई व्यक्ति परिवार और राजनीतिक जिम्मेदारियों के बीच ‘डबल माइंड’ की स्थिति में हो तो वह पार्टी और आंदोलन के लिए पूरी तरह समर्पित होकर कैसे काम कर सकता है।
इस फैसले के साथ ही BSP में आकाश आनंद का मौजूदा राजनीतिक अध्याय एक बार फिर रुक गया है।
ससुर अशोक सिद्धार्थ ने लिया राजनीति से संन्यास
आकाश आनंद से जुड़े पूरे घटनाक्रम में उनके ससुर और पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ की भूमिका भी चर्चा में है।
अशोक सिद्धार्थ ने गुरुवार को सक्रिय राजनीति से संन्यास लेने का ऐलान किया। इससे पहले मायावती ने संकेत दिया था कि उनका राजनीति से अलग होना आकाश आनंद के राजनीतिक भविष्य के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
अशोक सिद्धार्थ ने संन्यास की घोषणा करते हुए मायावती के प्रति अपनी निष्ठा जताई और उन आरोपों से इनकार किया कि वह आकाश आनंद को प्रभावित या गुमराह कर रहे थे।
लेकिन उनके संन्यास के कुछ समय बाद ही मायावती ने आकाश आनंद को पार्टी से पूरी तरह मुक्त करने का ऐलान कर दिया।
इस घटनाक्रम ने राजनीतिक हलकों को चौंका दिया क्योंकि पहले यह माना जा रहा था कि अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से हटने के बाद आकाश के लिए BSP में वापसी या बड़ी जिम्मेदारी का रास्ता खुल सकता है।
हुआ इसका उल्टा और आकाश खुद पार्टी से बाहर हो गए।
कौन हैं आकाश आनंद?
आकाश आनंद BSP प्रमुख मायावती के भतीजे और उनके भाई आनंद कुमार के बेटे हैं। उन्होंने विदेश में पढ़ाई की है और पिछले कुछ वर्षों में BSP की राजनीति में तेजी से उभरे।
मायावती ने उन्हें पार्टी के राष्ट्रीय समन्वयक जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी और एक समय उन्हें अपने राजनीतिक उत्तराधिकारी के रूप में भी आगे बढ़ाया गया।
हालांकि आकाश का BSP में सफर लगातार उतार-चढ़ाव वाला रहा है।
उन्हें कई बार महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गईं और बाद में पदों से हटाया गया। पार्टी नेतृत्व की ओर से उनके राजनीतिक अनुभव और परिपक्वता को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं।
अब 2026 में एक बार फिर उन्हें BSP से पूरी तरह अलग कर दिया गया है।
कुछ दिन पहले अखिलेश को कहा था ‘अंकल’
आकाश आनंद और अखिलेश यादव के रिश्तों में एक दिलचस्प पहलू हाल की राजनीतिक बयानबाजी भी है।
अगस्त में हाथरस के सादाबाद में आयोजित BSP की जनसभा में आकाश आनंद ने अखिलेश यादव को ‘अंकल’ कहकर संबोधित किया था।
आकाश ने अपनी उम्र का जिक्र करते हुए अखिलेश पर राजनीतिक तंज कसा था। इसके अलावा उन्होंने समाजवादी पार्टी के PDA फॉर्मूले पर भी सवाल उठाए थे।
उस समय अखिलेश यादव ने इस ‘अंकल’ वाली बहस को ज्यादा महत्व नहीं दिया था और कहा था कि गंभीर राजनीतिक मुद्दों पर बात होनी चाहिए।
लेकिन आकाश यहीं नहीं रुके थे।
PDA पर भी किया था हमला
कुछ ही दिन बाद आकाश आनंद ने समाजवादी पार्टी के PDA फॉर्मूले पर बड़ा हमला बोला था।
अखिलेश यादव के PDA में ‘P’ को ‘पंडित’ से जोड़ने के बाद BSP और सपा के बीच जुबानी जंग तेज हो गई थी। आकाश ने तंज कसते हुए PDA को ‘पब्लिक डराओ अभियान’ तक कहा था और दावा किया था कि समाजवादी पार्टी को सबसे ज्यादा डर BSP से लगता है।
ऐसे में कुछ सप्ताह पहले तक अखिलेश यादव पर तीखे हमले करने वाले आकाश आनंद को लेकर अब यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि BSP से अलग होने के बाद उनका अगला राजनीतिक ठिकाना क्या होगा।
क्या सच में सपा में जा सकते हैं आकाश?
फिलहाल इसका जवाब साफ है—**अभी कोई पुष्टि नहीं हुई है।**
आकाश आनंद ने समाजवादी पार्टी में शामिल होने की घोषणा नहीं की है। समाजवादी पार्टी ने भी यह नहीं बताया है कि उसके नेताओं और आकाश के बीच कोई औपचारिक बातचीत चल रही है।
अखिलेश यादव का बयान केवल इतना संकेत देता है कि सपा अपनी विचारधारा स्वीकार करने वाले नेताओं के लिए दरवाजे बंद नहीं कर रही है।
राजनीति में परिस्थितियां तेजी से बदलती हैं और उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव भी करीब हैं। इसलिए आकाश के अगले कदम को लेकर अटकलें जारी रहने की संभावना है।
आकाश आए तो सपा को क्या फायदा?
अगर भविष्य में आकाश आनंद समाजवादी पार्टी में जाने का फैसला करते हैं तो इसके राजनीतिक मायने काफी बड़े हो सकते हैं।
अखिलेश यादव 2027 विधानसभा चुनाव के लिए PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक सामाजिक समीकरण को मजबूत करने में जुटे हैं।
आकाश आनंद युवा दलित चेहरे के रूप में राजनीति में अपनी पहचान बनाने की कोशिश करते रहे हैं। BSP में रहते हुए उन्हें खासकर युवा कार्यकर्ताओं और दलित मतदाताओं के बीच सक्रिय करने की रणनीति बनाई गई थी।
ऐसे में अगर वह सपा के साथ जाते हैं तो समाजवादी पार्टी इसे अपने PDA अभियान में दलित प्रतिनिधित्व बढ़ाने के तौर पर पेश कर सकती है।
हालांकि किसी एक नेता के पार्टी बदलने से किसी पूरे सामाजिक समूह का वोट अपने आप स्थानांतरित हो जाएगा, ऐसा मानना राजनीतिक रूप से सही नहीं होगा।
BSP का पारंपरिक वोट आधार मायावती के नेतृत्व और पार्टी के लंबे सामाजिक आंदोलन से जुड़ा है।
सपा-BSP के रिश्तों का पुराना इतिहास
उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी का रिश्ता बेहद उतार-चढ़ाव भरा रहा है।
दोनों दल कभी एक-दूसरे के कट्टर राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी रहे तो कभी भाजपा को रोकने के लिए साथ भी आए।
1993 में मुलायम सिंह यादव और कांशीराम ने गठबंधन किया था। बाद में दोनों दलों के रिश्ते बिगड़ गए।
2019 के लोकसभा चुनाव में मायावती और अखिलेश यादव ने एक बार फिर गठबंधन किया, लेकिन चुनाव के बाद यह साथ ज्यादा समय नहीं चला।
अब 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सपा और BSP फिर अलग-अलग राजनीतिक रणनीतियों पर काम कर रहे हैं।
आकाश आनंद पिछले कुछ महीनों में सपा पर लगातार हमलावर रहे थे। इसलिए अगर भविष्य में वह समाजवादी पार्टी में जाते हैं तो यह यूपी की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम होगा।
मायावती के फैसले से BSP में भी नई चर्चा
आकाश आनंद को पूरी तरह पार्टी से अलग किए जाने के बाद BSP में नेतृत्व के भविष्य को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
आकाश के छोटे भाई ईशान आनंद को पार्टी में सक्रिय भूमिका दी गई है। उन्हें उत्तर भारत के कई क्षेत्रों में संगठनात्मक जिम्मेदारियां मिलने के बाद यह चर्चा तेज हुई है कि क्या भविष्य में मायावती उन्हें और बड़ी भूमिका दे सकती हैं।
हालांकि BSP की तरफ से ईशान को औपचारिक उत्तराधिकारी घोषित नहीं किया गया है।
फिर भी आकाश की विदाई और ईशान की बढ़ती संगठनात्मक सक्रियता को एक साथ देखकर राजनीतिक विश्लेषक BSP के अंदर संभावित नेतृत्व बदलाव के संकेत तलाश रहे हैं।
2027 चुनाव से पहले बढ़ी हलचल
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अब ज्यादा समय नहीं बचा है। सपा पहले से ही अपने PDA फॉर्मूले को विस्तार देने की कोशिश कर रही है, जबकि BSP अपने पारंपरिक दलित आधार के साथ सर्वसमाज को जोड़ने की रणनीति पर काम कर रही है।
ऐसे में आकाश आनंद का BSP से बाहर होना महज पार्टी का आंतरिक मामला नहीं माना जा रहा।
अगर वह सक्रिय राजनीति जारी रखते हैं तो उनके सामने नई पार्टी में शामिल होने से लेकर अपना अलग राजनीतिक रास्ता चुनने तक कई विकल्प हो सकते हैं।
सबसे ज्यादा चर्चा फिलहाल समाजवादी पार्टी को लेकर है क्योंकि अखिलेश यादव ने उनके संभावित प्रवेश पर दरवाजा पूरी तरह बंद नहीं किया है।
अखिलेश ने गेंद आकाश के पाले में डाली
अखिलेश यादव के बयान का राजनीतिक संदेश साफ है। उन्होंने आकाश आनंद को सीधे पार्टी में आने का निमंत्रण नहीं दिया, लेकिन यह भी नहीं कहा कि सपा उन्हें स्वीकार नहीं करेगी।
उन्होंने इसे पार्टी की विचारधारा और सिद्धांतों से जोड़ दिया।
यानी अगर कोई नेता सपा की नीतियों और विचारधारा के साथ आना चाहता है तो पार्टी उसका स्वागत करने के लिए तैयार है।
अब अगला कदम आकाश आनंद को तय करना है।
वह BSP से अलग होने के बाद क्या राजनीतिक फैसला लेते हैं, क्या मायावती के साथ रिश्तों में भविष्य में फिर बदलाव आता है, क्या वह कुछ समय के लिए सक्रिय राजनीति से दूरी बनाते हैं या किसी दूसरी पार्टी का दामन थामते हैं—इन सभी सवालों के जवाब अभी बाकी हैं।
फिलहाल इतना साफ है कि मायावती के बड़े फैसले ने 2027 विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। और अखिलेश यादव के जवाब ने आकाश आनंद के संभावित अगले राजनीतिक कदम को लेकर सस्पेंस और बढ़ा दिया है।
Next Story