लखनऊ : अपराध की जांच को वैज्ञानिक और अधिक मजबूत बनाने के लिए पुलिस अब फॉरेंसिक तकनीक पर अपना फोकस बढ़ा रही है। इसी दिशा में ‘स्पेशल-32’ टीम को विशेष फॉरेंसिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण का उद्देश्य घटनास्थल से महत्वपूर्ण साक्ष्यों को सुरक्षित तरीके से जुटाना, उनका संरक्षण करना और जांच में वैज्ञानिक तरीकों का बेहतर इस्तेमाल करना है। इससे गंभीर आपराधिक मामलों की जांच में पुलिस को अहम मदद मिलने की उम्मीद है।

आपराधिक वारदातों की जांच में घटनास्थल से मिलने वाले छोटे से छोटे सबूत की अहम भूमिका होती है। कई बार फिंगरप्रिंट, खून के नमूने, बाल, कपड़े, हथियार, डिजिटल उपकरण और दूसरी वस्तुएं आरोपी तक पहुंचने में महत्वपूर्ण कड़ी साबित होती हैं। ऐसे में साक्ष्यों को सही तरीके से एकत्र नहीं करने या उनके दूषित होने पर जांच प्रभावित हो सकती है। इसी वजह से पुलिसकर्मियों को फॉरेंसिक जांच की बारीकियों से परिचित कराया जा रहा है।
‘स्पेशल-32’ के सदस्यों को घटनास्थल की सुरक्षा, साक्ष्यों की पहचान, फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी और वैज्ञानिक तरीके से नमूने एकत्र करने की प्रक्रिया की जानकारी दी जा रही है। इसके साथ ही उन्हें यह भी बताया जा रहा है कि अलग-अलग तरह के साक्ष्यों को किस प्रकार पैक और सुरक्षित किया जाए, ताकि प्रयोगशाला में जांच के दौरान उनकी प्रमाणिकता बरकरार रहे।
फॉरेंसिक प्रशिक्षण के दौरान आधुनिक तकनीकों और उपकरणों के इस्तेमाल पर भी जोर दिया जा रहा है। अपराध के बदलते तरीकों को देखते हुए जांच एजेंसियों के सामने नई चुनौतियां सामने आ रही हैं। साइबर अपराध और डिजिटल उपकरणों से जुड़े मामलों में मोबाइल फोन, कंप्यूटर, सीसीटीवी फुटेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। ऐसे मामलों में तकनीकी जानकारी जांच को आगे बढ़ाने में मदद करती है।
वैज्ञानिक साक्ष्यों के इस्तेमाल से पुलिस को न केवल आरोपी की पहचान करने में मदद मिल सकती है, बल्कि अदालत में मामले को मजबूती से रखने के लिए भी महत्वपूर्ण प्रमाण उपलब्ध होते हैं। खासकर हत्या, लूट, चोरी और अन्य गंभीर अपराधों में फॉरेंसिक जांच कई बार अहम भूमिका निभाती है।
विशेष प्रशिक्षण के बाद ‘स्पेशल-32’ के सदस्य घटनास्थल पर पहुंचकर शुरुआती स्तर पर साक्ष्यों को सुरक्षित करने और जांच की दिशा तय करने में सहयोग कर सकेंगे। इससे जांच प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने के साथ अपराधियों तक पहुंचने में लगने वाले समय को कम करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।

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