देहरादून। देहरादून के जौलीग्रांट एयरपोर्ट और अमृतसर एयरपोर्ट पर विमानों के लिए बर्ड अटैक यानी पक्षियों से टकराव का खतरा चिंता का विषय बना हुआ है। भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) के अध्ययन में एयरपोर्ट क्षेत्रों में कुल 57 पक्षी प्रजातियां दर्ज की गई हैं। इनमें टिटहरी, चील और कबूतर समेत 13 प्रजातियों को विमानों के लिए अधिक जोखिम वाली श्रेणी में रखा गया है। अध्ययन के निष्कर्ष हवाई अड्डों के आसपास पक्षियों की गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी और उनके प्रबंधन की जरूरत की ओर इशारा करते हैं।

विमानों के लिए बर्ड स्ट्राइक एक महत्वपूर्ण सुरक्षा चुनौती मानी जाती है। खासकर उड़ान भरने और लैंडिंग के दौरान विमान अपेक्षाकृत कम ऊंचाई पर होते हैं। ऐसे में एयरपोर्ट के आसपास बड़ी संख्या में पक्षियों की मौजूदगी विमान से टकराव की आशंका बढ़ा सकती है। यही वजह है कि एयरपोर्ट परिसर और उसके आसपास पक्षियों की गतिविधियों का नियमित अध्ययन किया जाता है।

अध्ययन में मिलीं 57 पक्षी प्रजातियां

भारतीय वन्यजीव संस्थान के अध्ययन में जौलीग्रांट और अमृतसर एयरपोर्ट क्षेत्र में पक्षियों की विभिन्न प्रजातियों की मौजूदगी का आकलन किया गया। इस दौरान कुल 57 प्रजातियां दर्ज की गईं। अध्ययन का उद्देश्य यह समझना था कि कौन-सी प्रजातियां विमान संचालन के लिहाज से ज्यादा जोखिम पैदा कर सकती हैं।

इनमें 13 पक्षी प्रजातियों को उच्च जोखिम वाली श्रेणी में रखा गया है। टिटहरी, चील और कबूतर जैसी प्रजातियां इस सूची में शामिल हैं। इन पक्षियों के व्यवहार, उड़ान की ऊंचाई, संख्या और एयरपोर्ट क्षेत्र में उनकी गतिविधियों जैसे पहलुओं के आधार पर जोखिम का आकलन किया जाता है।

टेकऑफ और लैंडिंग के समय ज्यादा खतरा

बर्ड स्ट्राइक की आशंका विमान के टेकऑफ और लैंडिंग के दौरान विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो जाती है। एयरपोर्ट के आसपास उड़ रहे पक्षी विमान के इंजन, विंडस्क्रीन या अन्य हिस्सों से टकरा सकते हैं। कई बार छोटे पक्षी भी तेज गति से उड़ रहे विमान से टकराने पर नुकसान पहुंचा सकते हैं।

यदि कोई पक्षी विमान के इंजन में चला जाए तो तकनीकी समस्या उत्पन्न होने की आशंका रहती है। इसी कारण विमानन क्षेत्र में बर्ड स्ट्राइक की घटनाओं को गंभीरता से लिया जाता है और एयरपोर्ट पर पक्षियों को रनवे से दूर रखने के लिए विभिन्न उपाय किए जाते हैं।

चील और कबूतर पर विशेष नजर

चील जैसे बड़े आकार के पक्षियों का विमान से टकराव अधिक गंभीर हो सकता है। वहीं कबूतर जैसे पक्षी अक्सर समूह में उड़ते हैं, इसलिए उनकी मौजूदगी भी विमान संचालन के लिए चुनौती बन सकती है। टिटहरी सहित कुछ पक्षी खुले मैदान और एयरपोर्ट के आसपास उपलब्ध अनुकूल स्थानों की ओर आकर्षित हो सकते हैं।

एयरपोर्ट का बड़ा खुला क्षेत्र, घास, जलस्रोत और आसपास भोजन की उपलब्धता पक्षियों को आकर्षित कर सकती है। इसके अलावा एयरपोर्ट की सीमा से बाहर कचरे के ढेर, जलभराव और खुले में खाद्य पदार्थों के अवशेष भी कुछ प्रजातियों की संख्या बढ़ाने का कारण बन सकते हैं।

एयरपोर्ट के आसपास निगरानी जरूरी

अध्ययन के बाद एयरपोर्ट के आसपास पक्षियों की नियमित निगरानी का महत्व बढ़ जाता है। केवल एयरपोर्ट परिसर में पक्षियों को नियंत्रित करना पर्याप्त नहीं होता। आसपास के कई किलोमीटर क्षेत्र में मौजूद कूड़ा निस्तारण स्थल, जलाशय, खुले नाले, खेत और अन्य स्थान भी पक्षियों की गतिविधियों को प्रभावित कर सकते हैं।

विशेषज्ञों के लिए यह जानना जरूरी होता है कि कौन-से मौसम में किन पक्षियों की संख्या बढ़ती है और वे दिन के किस समय एयरपोर्ट के आसपास अधिक सक्रिय रहते हैं। इस जानकारी के आधार पर विमान संचालन और वन्यजीव प्रबंधन से जुड़ी रणनीति तैयार की जा सकती है।

पक्षियों को नुकसान पहुंचाए बिना प्रबंधन चुनौती

एयरपोर्ट पर बर्ड स्ट्राइक रोकने के उपायों में सुरक्षा के साथ वन्यजीव संरक्षण का संतुलन बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है। पक्षियों को नुकसान पहुंचाने के बजाय उन्हें रनवे और विमान संचालन वाले संवेदनशील क्षेत्रों से दूर रखने के लिए वैज्ञानिक तरीकों की जरूरत होती है।

इसके लिए एयरपोर्ट परिसर में घास की ऊंचाई का प्रबंधन, भोजन के स्रोतों को नियंत्रित करना, जलभराव रोकना और कचरे का उचित निस्तारण जैसे उपाय किए जा सकते हैं। आवश्यकता के अनुसार प्रशिक्षित टीमों और विभिन्न डराने वाले उपकरणों की मदद से भी पक्षियों को संवेदनशील क्षेत्र से दूर रखा जाता है।

आसपास के क्षेत्रों की भूमिका भी अहम

बर्ड स्ट्राइक का जोखिम केवल एयरपोर्ट की चारदीवारी तक सीमित नहीं रहता। यदि आसपास खुले में कचरा डाला जाता है या ऐसी गतिविधियां होती हैं जिनसे पक्षियों को भोजन आसानी से मिलता है, तो वे एयरपोर्ट क्षेत्र की ओर आकर्षित हो सकते हैं। इसलिए स्थानीय प्रशासन, एयरपोर्ट प्रबंधन और संबंधित विभागों के बीच समन्वय जरूरी माना जाता है।

जौलीग्रांट और अमृतसर जैसे व्यस्त एयरपोर्ट पर नियमित उड़ानों के कारण इस तरह के अध्ययन विमान सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। अध्ययन में दर्ज पक्षियों की संख्या और उच्च जोखिम वाली 13 प्रजातियों की पहचान के आधार पर संबंधित एजेंसियों को निगरानी और प्रबंधन की रणनीति बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।

बर्ड स्ट्राइक रोकने में अध्ययन होगा मददगार

भारतीय वन्यजीव संस्थान का यह अध्ययन पक्षियों और विमान संचालन के बीच संभावित जोखिम को वैज्ञानिक तरीके से समझने में उपयोगी हो सकता है। अलग-अलग प्रजातियों की गतिविधियों का रिकॉर्ड उपलब्ध होने से एयरपोर्ट प्रबंधन जोखिम वाले स्थानों और समय की पहचान कर सकता है।

फिलहाल 57 प्रजातियों में से 13 को अधिक जोखिम वाली श्रेणी में रखे जाने के बाद जौलीग्रांट और अमृतसर एयरपोर्ट के आसपास पक्षियों की गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी की जरूरत सामने आई है। वैज्ञानिक प्रबंधन और संबंधित एजेंसियों के बेहतर समन्वय से बर्ड स्ट्राइक के जोखिम को कम करने की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं।

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