रुद्रप्रयाग। सोशल मीडिया पर ऑनलाइन गेम खेलकर आसानी से पैसे कमाने की चाहत उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग निवासी कमल सिंह को भारी पड़ गई। सोशल मीडिया पर कथित ‘केबीसी ऑनलाइन गेम’ के नाम से चल रहे ‘चेहरा पहचानो’ गेम के झांसे में आकर वह साइबर ठगों के जाल में फंस गए। आरोप है कि ठगों ने इनाम और कमाई का लालच देकर उनसे एक-दो बार नहीं बल्कि कुल 57 बार रकम ट्रांसफर कराई। इस तरह कमल सिंह करीब डेढ़ करोड़ रुपये गंवा बैठे।

मामला ऑनलाइन गेम और सोशल मीडिया के जरिए होने वाली साइबर ठगी के खतरों को उजागर करता है। साइबर अपराधी लोगों को बड़ी रकम जीतने, इनाम मिलने या ऑनलाइन गेम से मोटी कमाई होने का लालच देकर पहले छोटी रकम जमा कराने के लिए कहते हैं। इसके बाद अलग-अलग शुल्क और भुगतान के नाम पर लगातार पैसे मांगे जाते हैं।

‘चेहरा पहचानो’ गेम से शुरू हुआ जाल

जानकारी के मुताबिक, कमल सिंह सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते थे। इसी दौरान उनकी नजर कथित केबीसी ऑनलाइन गेम से जुड़े ‘चेहरा पहचानो’ गेम पर पड़ी। इसमें लोगों को किसी व्यक्ति का चेहरा पहचानकर जवाब देने और बदले में इनाम जीतने का लालच दिया जा रहा था।

कमल सिंह भी इस गेम से जुड़ गए। शुरुआत में उन्हें लगा कि सामान्य सवाल का जवाब देकर या चेहरा पहचानकर वह इनाम हासिल कर सकते हैं। लेकिन यही प्रक्रिया धीरे-धीरे उन्हें साइबर ठगों के जाल में ले गई।

आरोप है कि ठगों ने कमल सिंह से संपर्क किया और उन्हें बड़ी रकम मिलने का भरोसा दिलाया। इसके बाद इनाम हासिल करने के लिए अलग-अलग मदों में पैसे जमा करने को कहा गया।

एक-दो नहीं 57 बार भेजे पैसे

साइबर ठगों ने कथित तौर पर कमल सिंह को अलग-अलग कारण बताते हुए लगातार रकम जमा करने के लिए कहा। बड़ी रकम मिलने की उम्मीद में वह बार-बार पैसे ट्रांसफर करते रहे। इस दौरान कुल 57 बार रकम भेजे जाने की बात सामने आई है।

हर भुगतान के बाद उन्हें अगली प्रक्रिया पूरी करने या किसी अन्य शुल्क के नाम पर फिर रकम भेजने को कहा जाता रहा। इसी तरह भुगतान का सिलसिला चलता गया और कुल रकम करीब डेढ़ करोड़ रुपये तक पहुंच गई।

जब इतनी बड़ी रकम देने के बाद भी उन्हें कथित इनाम या कमाई की राशि नहीं मिली, तब उन्हें ठगी का एहसास हुआ। इतनी बड़ी धनराशि गंवाने के बाद मामला साइबर अपराध से जुड़ा होने की बात सामने आई।

अलग-अलग बहानों से रकम मांगते हैं ठग

इस तरह की ऑनलाइन ठगी में साइबर अपराधी आमतौर पर पीड़ित को पहले विश्वास में लेते हैं। किसी प्रतियोगिता, गेम या लॉटरी में बड़ी रकम जीतने की बात कहने के बाद प्रोसेसिंग फीस, टैक्स, जीएसटी, रजिस्ट्रेशन, सिक्योरिटी डिपॉजिट या रकम जारी करने के शुल्क जैसे अलग-अलग बहाने बनाए जा सकते हैं।

पीड़ित जब पहली बार पैसे भेज देता है तो ठग यह दावा कर सकते हैं कि भुगतान की एक और प्रक्रिया बाकी है। कई मामलों में पीड़ित पहले से जमा की गई रकम वापस पाने या बड़ा इनाम हासिल करने की उम्मीद में और पैसे भेजता चला जाता है।

कमल सिंह के मामले में भी 57 बार रकम ट्रांसफर किए जाने की बात बताती है कि कथित ठगों ने लंबे समय तक उन्हें अपने जाल में फंसाए रखा।

डेढ़ करोड़ रुपये तक पहुंच गया नुकसान

ऑनलाइन गेम के जरिए शुरू हुआ मामला आखिरकार करीब डेढ़ करोड़ रुपये की ठगी तक पहुंच गया। इतनी बड़ी रकम का नुकसान होने से यह मामला गंभीर साइबर फ्रॉड की श्रेणी में आता है।

अब जांच में यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि रकम किन बैंक खातों या डिजिटल माध्यमों में भेजी गई, पैसे आगे किन खातों में ट्रांसफर किए गए और इस पूरे नेटवर्क को कौन संचालित कर रहा था। साइबर ठगी के मामलों में अपराधी अक्सर रकम को तेजी से कई खातों में भेज देते हैं, जिससे उसकी ट्रेल का पता लगाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

सोशल मीडिया के फर्जी गेम से रहें सावधान

यह मामला उन लोगों के लिए चेतावनी है जो सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाले गेम, लॉटरी या इनाम से जुड़े विज्ञापनों और पोस्ट पर आसानी से भरोसा कर लेते हैं। किसी प्रसिद्ध टीवी कार्यक्रम, कंपनी या व्यक्ति के नाम और तस्वीर का इस्तेमाल होने भर से कोई ऑनलाइन प्रतियोगिता आधिकारिक नहीं हो जाती।

किसी गेम में इनाम मिलने के नाम पर यदि पहले पैसे मांगे जाएं तो विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। अनजान व्यक्ति को बैंक खाते, ओटीपी, यूपीआई पिन, कार्ड विवरण या अन्य वित्तीय जानकारी नहीं देनी चाहिए।

इसी तरह सोशल मीडिया पर मिले किसी अनजान लिंक पर क्लिक करने या मोबाइल में संदिग्ध ऐप डाउनलोड करने से भी बचना चाहिए।

ठगी होने पर तुरंत करें शिकायत

साइबर ठगी के मामलों में समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। अगर किसी व्यक्ति के बैंक खाते या यूपीआई से धोखाधड़ी के जरिए रकम चली जाती है तो उसे तत्काल अपने बैंक और आधिकारिक साइबर अपराध शिकायत व्यवस्था को सूचना देनी चाहिए। जल्दी सूचना मिलने पर संबंधित खातों में रकम रोकने की संभावना बढ़ सकती है।

भारत में साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर की जा सकती है। साथ ही राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के जरिए भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

कमल सिंह का मामला बताता है कि ऑनलाइन बड़ी कमाई या इनाम का लालच कितनी बड़ी आर्थिक क्षति का कारण बन सकता है। सोशल मीडिया पर किसी भी गेम या इनाम योजना में पैसे लगाने से पहले उसकी आधिकारिकता की पुष्टि करना और संदिग्ध भुगतान से बचना ही साइबर ठगी से सुरक्षा का सबसे महत्वपूर्ण तरीका है।

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