Delhi दिल्ली: UPI से जुड़े नए शुल्क को लेकर देश में राजनीतिक बहस शुरू हो गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बुधवार को इस फैसले पर सवाल उठाते हुए सरकार से इसे वापस लेने की मांग की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर करीब 39 सेकेंड का एक वीडियो साझा किया और दावा किया कि नए शुल्क की व्यवस्था से अमेरिका को फायदा पहुंच सकता है। सरकार की ओर से मंगलवार को जारी आदेश के मुताबिक, 15 अक्टूबर 2026 से 2,000 रुपये से अधिक के कुछ मर्चेंट UPI पेमेंट पर 0.4 प्रतिशत MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट लगाया जाएगा। हालांकि, हर ट्रांजैक्शन पर इसकी अधिकतम रकम 300 रुपये तय की गई है। इस रकम की जिम्मेदारी दुकानदार या मर्चेंट की होगी, ग्राहक से सीधे यह शुल्क नहीं लिया जाएगा।
किन UPI पेमेंट पर लगेगा शुल्क?
नए नियम के तहत 2,000 रुपये तक के मर्चेंट पेमेंट पर MDR नहीं लगेगा। इसी तरह दो लोगों के बीच होने वाले UPI ट्रांसफर यानी P2P लेन-देन को भी शुल्क के दायरे से बाहर रखा गया है। सरकार का कहना है कि इस बदलाव का असर UPI के ज्यादातर मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर नहीं पड़ेगा। उसके मुताबिक लगभग 96 प्रतिशत मर्चेंट UPI लेन-देन इस शुल्क से बाहर रहेंगे। इस बदलाव का मुख्य असर 2,000 रुपये से ज्यादा के उन चुनिंदा भुगतानों पर होगा, जिन्हें मर्चेंट कैटेगरी में रखा गया है। शुल्क ग्राहक के खाते से काटने के बजाय संबंधित व्यापारी पक्ष से लिया जाएगा।
नितिन कामथ ने ब्रोकिंग को लेकर उठाया सवाल
UPI शुल्क के मुद्दे पर जिरोधा के फाउंडर और CEO नितिन कामथ ने भी अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा कि UPI का इस्तेमाल बहुत बड़े स्तर पर पहुंच चुका है, इसलिए MDR की जरूरत पर चर्चा हो सकती है। लेकिन उनका कहना है कि सभी कारोबार के लिए एक जैसा नियम लागू करना व्यावहारिक नहीं हो सकता। कामथ ने सामान्य दुकानदार और शेयर ब्रोकर के कारोबार का अंतर समझाया। उनके मुताबिक, किसी दुकान पर 20 हजार रुपये का UPI भुगतान होने पर वह रकम सीधे सामान की बिक्री से जुड़ी होती है। दूसरी तरफ कोई व्यक्ति ब्रोकर के ट्रेडिंग अकाउंट में 2 लाख रुपये UPI के जरिए जमा कर सकता है और उस दिन कोई शेयर खरीदना जरूरी नहीं है। ऐसे मामले में ब्रोकर को उस भुगतान से तुरंत ट्रेडिंग कमाई नहीं होती, लेकिन MDR का खर्च उसके ऊपर आ सकता है। कामथ ने इसी अंतर को ध्यान में रखते हुए मौजूदा व्यवस्था पर सवाल उठाया है।
विपक्षी नेताओं ने भी जताई आपत्ति
राहुल गांधी के अलावा विपक्ष के कुछ नेताओं ने भी नए शुल्क को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने दावा किया कि इसका असर छोटे कारोबारियों और डिजिटल भुगतान करने वाले लोगों पर पड़ सकता है। उन्होंने इसे महंगाई से जोड़कर भी सवाल उठाए। RJD सांसद मनोज झा ने भी सरकार के फैसले की आलोचना की। उन्होंने इसे अमेरिका से जुड़े व्यापक आर्थिक प्रभावों के संदर्भ में देखा और कहा कि पहले लोगों को डिजिटल लेन-देन अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया, जबकि अब शुल्क की व्यवस्था लाई जा रही है।
UPI को बढ़ावा देने के लिए पहले मिला इंसेंटिव
UPI के इस्तेमाल को बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने 2021-22 से एक प्रोत्साहन योजना शुरू की थी। इसके तहत छोटे दुकानदारों को किए जाने वाले 2,000 रुपये तक के UPI भुगतान के लिए 0.15 प्रतिशत इंसेंटिव दिया जाता था। सरकारी योजना के तहत 2024-25 तक कुल 8,276 करोड़ रुपये का इंसेंटिव दिए जाने की जानकारी दी गई है। वहीं जून 2026 तक देश में UPI इस्तेमाल करने वालों की संख्या करीब 55.5 करोड़ बताई गई है।
UPI के जरिए भुगतान करने के लिए यूजर को अपने बैंक खाते से जुड़ा वर्चुअल पेमेंट एड्रेस बनाना होता है। इसके बाद पैसे भेजने के लिए बैंक खाता नंबर और IFSC जैसी जानकारी हर बार डालने की जरूरत नहीं पड़ती। इसी वजह से UPI देश में रोजमर्रा के डिजिटल भुगतान का बड़ा माध्यम बन चुका है। अब 15 अक्टूबर से लागू होने वाली MDR व्यवस्था को लेकर सरकार के फैसले और विपक्ष की आपत्तियों के बीच बहस आगे बढ़ने की संभावना है।
Tags: