New York. न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र में भारत ने अफगानिस्तान से जुड़े मानवीय मुद्दों को लेकर चिंता जताई है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पार्थसारथी हरीश ने कहा कि अफगान नागरिकों की वापसी स्वैच्छिक, सुरक्षित और सम्मानजनक होनी चाहिए। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में अपने संबोधन के दौरान अफगानिस्तान में मानवीय स्थिति का जिक्र किया और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से प्रभावित लोगों के पुनर्वास और सहायता के लिए लगातार सहयोग की अपील की।
अफगान लौटने वालों की स्थिति पर चिंता
पार्थसारथी हरीश ने कहा कि बड़ी संख्या में अफगान नागरिकों को वापस लौटना पड़ा है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासचिव की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 2025 में करीब 29 लाख अफगान नागरिक लौटे, जबकि इस वर्ष 22 अगस्त तक लगभग 11.5 लाख और लोगों की वापसी हुई। उन्होंने कहा कि इनमें से बड़ी संख्या में वापसी स्वैच्छिक नहीं थी, जिससे मानवीय चुनौतियां बढ़ी हैं।
सुरक्षित और सम्मानजनक वापसी पर जोर
भारत ने कहा कि किसी भी व्यक्ति की वापसी ऐसी होनी चाहिए जो सुरक्षित, सम्मानजनक और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हो। हरीश ने कहा कि लौटने वाले लोगों के पुनर्वास और समाज में दोबारा शामिल होने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार समर्थन की आवश्यकता है।
अफगानिस्तान के व्यापार और आवागमन का मुद्दा
भारतीय प्रतिनिधि ने अफगानिस्तान से जुड़े व्यापार और ट्रांजिट मुद्दों पर भी बात रखी। उन्होंने कहा कि भूमि से घिरे विकासशील देशों से जुड़े संयुक्त राष्ट्र घोषणाओं, विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के प्रावधानों का पालन किया जाना चाहिए। उन्होंने मानवीय मूल्यों को ध्यान में रखते हुए अफगानिस्तान के लोगों की मदद की आवश्यकता पर जोर दिया।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग की अपील
भारत ने संयुक्त राष्ट्र मंच से कहा कि अफगान नागरिकों की समस्याओं के समाधान के लिए वैश्विक समुदाय को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि मानवीय सहायता, पुनर्वास और बेहतर भविष्य के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन जरूरी है।