भारतीय हॉकी टीम की भगवा जर्सी पर राजनीतिक सियासत तेज

Update: 2026-07-30 08:15 GMT
New Delhi. नई दिल्ली। भारतीय पुरुष और महिला हॉकी टीम की जर्सी का पारंपरिक नीला रंग बदलकर भगवा (ऑरेंज) किए जाने के फैसले ने खेल जगत के साथ-साथ राजनीतिक गलियारों में भी बहस छेड़ दी है। हॉकी इंडिया के इस फैसले को लेकर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने केंद्र सरकार और सत्तारूढ़ विचारधारा पर निशाना साधा है, जबकि भारतीय टीम के पूर्व कप्तान वीरेन रस्किन्हा ने भी इसे टीम की ऐतिहासिक पहचान से जुड़ा मुद्दा बताते हुए फैसले पर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर हॉकी इंडिया और उसके अध्यक्ष दिलीप कुमार तिर्की ने स्पष्ट किया है कि जर्सी का रंग बदलने का निर्णय पूरी तरह तकनीकी कारणों और खिलाड़ियों की राय के आधार पर लिया गया है, इसमें किसी प्रकार की राजनीतिक मंशा नहीं है।
नई जर्सी में भारतीय टीम अगले महीने नीदरलैंड्स और बेल्जियम में आयोजित होने वाले एफआईएच हॉकी वर्ल्ड कप में मैदान पर उतरेगी। यह प्रतिष्ठित टूर्नामेंट 15 अगस्त से 30 अगस्त तक खेला जाएगा। पहली बार भारतीय टीम पारंपरिक नीली जर्सी की जगह भगवा रंग की जर्सी पहनकर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में हिस्सा लेगी। जैसे ही नई जर्सी की तस्वीरें सामने आईं, सोशल मीडिया पर इसे लेकर व्यापक चर्चा शुरू हो गई और कुछ ही समय में यह राष्ट्रीय राजनीतिक बहस का विषय बन गया। कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने इस बदलाव पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि केवल जर्सी का रंग बदलने से देश की पहचान नहीं बदल सकती। उन्होंने कहा कि जिस तरह शिक्षा नीति के जरिए इतिहास बदलने की कोशिश की जा रही है, उसी तरह अब राष्ट्रीय प्रतीकों और पहचान से जुड़े विषयों में भी बदलाव किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश की जनता सब कुछ देख रही है और समझ भी रही है।
प्रियंका गांधी ने जंतर-मंतर पर जुटे युवाओं का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी आवाज पूरे देश की आवाज है। उन्होंने कहा कि भारत की आजादी की लड़ाई सत्य, अहिंसा और लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित थी। उनके अनुसार इस स्वतंत्रता आंदोलन का नेतृत्व महात्मा गांधी और कांग्रेस ने किया था तथा इसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की कोई भूमिका नहीं रही। उन्होंने कहा कि भारत की असली ताकत भाईचारा, प्रेम, एकता और सामाजिक सद्भाव में निहित है, जिसे कोई भी विचारधारा समाप्त नहीं कर सकती। उन्होंने यह भी कहा कि चाहे कितनी भी नफरत फैलाई जाए या हिंसा का माहौल बनाया जाए, देश की मूल पहचान और लोकतांत्रिक मूल्यों को खत्म नहीं किया जा सकता। प्रियंका गांधी ने अपने बयान के दौरान राहुल गांधी द्वारा दिखाए गए एक युवक के शरीर पर मिले छर्रों का भी उल्लेख किया और सवाल उठाया कि आखिर वे छर्रे वहां कैसे पहुंचे। उनके इस बयान ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया तथा विपक्ष ने इसे सरकार की नीतियों से जोड़कर आलोचना शुरू कर दी।
इस विवाद में भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान वीरेन रस्किन्हा भी खुलकर सामने आए। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि हॉकी इंडिया ने पिछले कुछ वर्षों में भारतीय हॉकी को आगे बढ़ाने के लिए कई सराहनीय कार्य किए हैं, लेकिन जर्सी का रंग बदलने का फैसला उन्हें निराश करता है। उन्होंने कहा कि भारतीय हॉकी टीम की पहचान दशकों से नीले रंग की जर्सी रही है और उन्होंने स्वयं कई वर्षों तक गर्व के साथ नीली जर्सी पहनकर देश का प्रतिनिधित्व किया है। उनके अनुसार देश और दुनिया भर के हॉकी प्रशंसक भारतीय टीम को नीले रंग में देखने के आदी हैं तथा भगवा रंग अपनाने का कोई ठोस कारण सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं देता। हालांकि हॉकी इंडिया ने इन सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जर्सी का रंग बदलने के पीछे केवल तकनीकी और खेल संबंधी कारण हैं। संस्था के अनुसार अंतरराष्ट्रीय हॉकी के अधिकांश मैदानों की सतह नीले रंग की होती है। ऐसे में खिलाड़ियों की नीली जर्सी कई बार मैदान के रंग से मिल जाती थी, जिससे खिलाड़ियों की पहचान करने में कोच, दर्शकों और प्रसारण टीम को कठिनाई होती थी। इसी कारण खिलाड़ियों, कोच और सपोर्ट स्टाफ ने वैकल्पिक रंग अपनाने का सुझाव दिया था।
हॉकी इंडिया ने बताया कि इस विषय पर कई दौर की चर्चा हुई, जिसमें पीले और भगवा रंग पर विचार किया गया। अंततः भगवा रंग को अंतिम रूप दिया गया क्योंकि यह मैदान पर स्पष्ट दिखाई देता है और खिलाड़ियों की दृश्यता बेहतर बनाता है। संस्था ने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय टीम की जर्सी पहली बार नहीं बदली गई है। इससे पहले 2014 हॉकी वर्ल्ड कप में भारतीय टीम ने पीले रंग की जर्सी पहनी थी, जबकि 2018 वर्ल्ड कप में आसमानी नीली जर्सी का इस्तेमाल किया गया था। इसलिए जर्सी के रंग में बदलाव कोई नई परंपरा नहीं है। नई जर्सी के डिजाइन को लेकर भी हॉकी इंडिया ने विस्तृत जानकारी दी। संस्था के अनुसार भगवा रंग साहस, बलिदान, ऊर्जा और विजय का प्रतीक माना जाता है। जर्सी पर बना मंडाला डिजाइन भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता है, जबकि नेवी ब्लू रंग के हिस्से अशोक चक्र से प्रेरित हैं। जर्सी के अगले हिस्से पर देवनागरी लिपि में "इंडिया" लिखा गया है, जिसका उद्देश्य भारतीय भाषाई और सांस्कृतिक विविधता को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करना है।
इस पूरे विवाद के बीच हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप कुमार तिर्की ने भी सफाई दी। उन्होंने कहा कि यह निर्णय किसी राजनीतिक दबाव में नहीं बल्कि खिलाड़ियों, दोनों टीमों के कप्तानों, कोच और सपोर्ट स्टाफ की सामूहिक राय के आधार पर लिया गया है। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों को मैदान पर बेहतर दृश्यता मिले, यही इस बदलाव का प्रमुख उद्देश्य है। तिर्की ने यह भी कहा कि यदि एफआईएच हॉकी वर्ल्ड कप के बाद खिलाड़ियों को नई जर्सी पसंद नहीं आती या भविष्य में इसकी आवश्यकता महसूस नहीं होती है तो
हॉकी इंडिया
इस फैसले की समीक्षा करने और जर्सी के रंग में फिर बदलाव करने के लिए भी तैयार है। फिलहाल जर्सी को लेकर जारी विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक ओर विपक्ष इसे राष्ट्रीय पहचान और राजनीति से जोड़कर सवाल उठा रहा है, तो दूसरी ओर हॉकी इंडिया लगातार यह दोहरा रही है कि उसका उद्देश्य केवल खिलाड़ियों के प्रदर्शन और तकनीकी सुविधा को बेहतर बनाना है। अब सबकी नजर इस बात पर होगी कि वर्ल्ड कप में भारतीय टीम नई जर्सी के साथ कैसा प्रदर्शन करती है और टूर्नामेंट के बाद इस विवाद का क्या परिणाम निकलता है।
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