Bhubaneswar भुवनेश्वर: भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) की एक रिपोर्ट के अनुसार, ओडिशा में लघु सिंचाई (MI) परियोजनाओं को लागू करने में बड़ी गड़बड़ियां पाई गई हैं। कई परियोजनाएं बीच में ही छोड़ दी गईं और करोड़ों रुपये बेकार चले गए।
विधानसभा में पेश की गई इस रिपोर्ट में 2021-22 से 2023-24 की अवधि के दौरान परियोजना को लागू करने के विभिन्न चरणों - जैसे योजना बनाना, ज़मीन अधिग्रहण, वन विभाग से मंज़ूरी, टेंडरिंग, काम पूरा करना, क्वालिटी कंट्रोल और वित्तीय प्रबंधन - में गड़बड़ियां पाई गईं। ऑडिट में पाया गया कि परियोजना के प्रस्ताव बिना सही सर्वे, जांच और व्यवहार्यता अध्ययन (feasibility studies) के तैयार किए गए थे। नतीजतन, सात MI परियोजनाओं को छोड़ना पड़ा क्योंकि या तो ज़मीन का अधिग्रहण नहीं हो सका या ज़रूरी वन मंज़ूरी नहीं मिल पाई। ग्रामीण बुनियादी ढांचा विकास कोष (RIDF) के तहत मंज़ूर की गई 40 MI परियोजनाओं में से तीन अपने मकसद को पूरा नहीं कर सकीं, क्योंकि साइट चुनने, सर्वे, जांच और डिज़ाइन ड्रॉइंग में कमियां थीं।
ऑडिट में यह भी देखा गया कि किसानों को इन परियोजनाओं से बहुत उम्मीदें थीं, लेकिन पानी आखिरी छोर के खेतों तक नहीं पहुंच पाया। CAG ने 'मुख्यमंत्री आदिबंध तैयारी योजना' को लागू करने में भी कथित गड़बड़ियां पाईं। सात मामलों में, चेक डैम ऐसी जगहों पर बनाए गए जहां पहले से ही ऐसे ढांचे मौजूद थे। जियो-स्पेशियल एनालिसिस से पता चला कि जब कॉन्ट्रैक्ट दिए गए, तब उन जगहों पर पहले से ही चेक डैम मौजूद थे। ऑडिट में पाया गया कि पहले से मौजूद ढांचों के बावजूद सात नए चेक डैम बनाने पर 4.26 करोड़ रुपये खर्च किए गए। CAG के अनुसार, जांचे गए 311 परियोजना प्रस्तावों में से 271 (यानी 87%) को उच्च-स्तरीय समिति से मंज़ूरी नहीं मिली थी। 38 परियोजनाओं पर काम बिना ज़रूरी मंज़ूरी के ही शुरू कर दिया गया था।
ऑडिट में यह भी पाया गया कि 38 MI परियोजनाओं पर काम ज़मीन अधिग्रहण और वन मंज़ूरी के बिना ही शुरू हो गया था। चूंकि पानी वितरण प्रणाली और अन्य हिस्से पूरे नहीं हो सके, इसलिए इन परियोजनाओं पर किया गया 91.57 करोड़ रुपये का खर्च बेकार चला गया। रिपोर्ट के मुताबिक, 2021 और 2024 के बीच, बजट के गलत अनुमानों और फंड का पूरा इस्तेमाल न हो पाने की वजह से 520.60 करोड़ रुपये सरेंडर करने पड़े।
CAG ने ओडिशा कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (OCCL) से जुड़ी गड़बड़ियों की ओर भी इशारा किया। अंडरग्राउंड पाइपलाइन के काम के लिए ऐसे खर्चों का भुगतान किए जाने के बाद कॉर्पोरेशन को 6.49 करोड़ रुपये का अनुचित लाभ मिला, जिनके लिए भुगतान नहीं किया जाना चाहिए था। रिपोर्ट में कहा गया है कि ओडिशा पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट (OPWD) कोड और ई-प्रोक्योरमेंट गाइडलाइंस का उल्लंघन करते हुए, 7 करोड़ रुपये तक के काम वाले टेंडरों के लिए बोली लगाने वालों की योग्यता शर्तों में भी ढील दी गई थी। अंडरग्राउंड पाइपलाइन के कुल 64 काम — RIDF के तहत 21 और राज्य की योजनाओं के तहत 43 — 18 महीने तक की देरी से पूरे हुए। CAG के अनुसार, इसका नतीजा यह हुआ कि 99,190.049 हेक्टेयर ज़मीन तक सिंचाई की सुविधा नहीं पहुंचाई जा सकी।
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