चिक्कोड़ी : एक रेवेन्यू अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोपों को लेकर अधिकारियों ने बुधवार सुबह कई ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। कार्रवाई के दौरान अधिकारी से जुड़े घर, रिश्तेदारों की संपत्ति और तहसीलदार कार्यालय सहित तीन स्थानों पर एक साथ जांच की गई। यह कार्रवाई शिकायतों और मिली जानकारियों के आधार पर शुरू की गई, जिनमें आरोप लगाया गया था कि संबंधित अधिकारी ने अपनी ज्ञात आय से अधिक संपत्ति अर्जित की है।
तलाशी अभियान सुबह-सुबह शुरू किया गया। जांच टीमों ने बेलागावी जिले के अथानी शहर में अधिकारी से जुड़े एक मकान पर पहुंचकर दस्तावेजों और संपत्ति से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की। इसके अलावा मुदलागी में अधिकारी के करीबी रिश्तेदारों से जुड़ी एक संपत्ति पर भी टीम ने तलाशी ली। तीसरी कार्रवाई निप्पानी स्थित तहसीलदार कार्यालय में की गई, जहां अधिकारी से जुड़े सरकारी रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की जांच की गई।
जानकारी के अनुसार, अधिकारियों को कुछ समय से शिकायतें और सूचनाएं मिल रही थीं कि संबंधित रेवेन्यू अधिकारी ने कथित तौर पर गैर-कानूनी तरीकों से बड़ी मात्रा में संपत्ति जमा की है। इन्हीं शिकायतों के आधार पर प्रारंभिक स्तर पर जानकारी जुटाई गई और इसके बाद तलाशी अभियान शुरू किया गया। कार्रवाई के दौरान टीमों ने संपत्ति से जुड़े दस्तावेज, वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य जरूरी कागजात की जांच की।
अथानी स्थित मकान पर पहुंची टीम ने सुबह से ही परिसर में जांच शुरू कर दी। बताया गया कि इस मकान का संबंध संबंधित अधिकारी से है। टीम ने वहां मौजूद दस्तावेजों को खंगाला और यह जानने की कोशिश की कि संपत्तियों और आय के बीच किसी तरह का अंतर है या नहीं। हालांकि तलाशी के दौरान क्या-क्या मिला है, इसकी पूरी जानकारी तत्काल सामने नहीं आई।
इसी तरह मुदलागी में अधिकारी के करीबी रिश्तेदारों से जुड़ी संपत्ति पर भी जांच की गई। माना जा रहा है कि जांच टीम यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कहीं संपत्ति किसी रिश्तेदार या परिचित के नाम पर तो नहीं खरीदी गई। जांच के दौरान प्रॉपर्टी से जुड़े कागजात और लेन-देन से संबंधित दस्तावेजों की भी पड़ताल किए जाने की बात सामने आई है।
निप्पानी स्थित तहसीलदार कार्यालय में भी अधिकारियों ने तलाशी ली। सरकारी कार्यालय में हुई इस कार्रवाई के दौरान दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच की गई। टीम ने संबंधित अधिकारी के कार्यकाल और उससे जुड़े प्रशासनिक दस्तावेजों को भी खंगाला। यह जांच इस बात को समझने के लिए की जा रही है कि अधिकारी की आय और उसके नाम या उससे जुड़े लोगों की संपत्तियों के बीच कितना अंतर है।
आय से अधिक संपत्ति के मामलों में आम तौर पर जांच एजेंसियां अधिकारी की वैध आय, वेतन, निवेश, बैंक खाते, संपत्ति और अन्य वित्तीय विवरणों की तुलना करती हैं। इस मामले में भी शिकायतों के आधार पर इसी तरह की जांच की जा रही है। हालांकि अभी यह साफ नहीं हुआ है कि कथित तौर पर कितनी संपत्ति जांच के दायरे में है और अधिकारियों को तलाशी के दौरान कौन-कौन से महत्वपूर्ण दस्तावेज मिले हैं।
इस पूरी कार्रवाई को लेकर स्थानीय स्तर पर भी चर्चा बनी रही। सुबह अचानक कई स्थानों पर जांच टीम पहुंचने के बाद आसपास के लोगों में हलचल देखी गई। खास तौर पर तहसीलदार कार्यालय में हुई तलाशी के कारण कर्मचारियों और वहां आने वाले लोगों के बीच भी कार्रवाई को लेकर चर्चा होती रही।
जांच से जुड़े अधिकारियों ने फिलहाल पूरे मामले में विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। माना जा रहा है कि तलाशी पूरी होने और दस्तावेजों की जांच के बाद आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकती है। जब्त या जांच में लिए गए रिकॉर्ड का मिलान अधिकारी की घोषित आय और संपत्ति से किया जाएगा। इसके बाद ही यह तय होगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और आगे कोई कानूनी कार्रवाई की जरूरत है या नहीं।
शिकायतों में आरोप लगाया गया था कि संबंधित अधिकारी ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए कथित रूप से बड़ी मात्रा में गैर-कानूनी संपत्ति अर्जित की है। इन आरोपों की पुष्टि के लिए ही तीन अलग-अलग स्थानों पर एक साथ कार्रवाई की गई। अधिकारियों का फोकस इस बात पर है कि संपत्ति किस अवधि में अर्जित की गई और उसके लिए धन का स्रोत क्या था।
फिलहाल मामला जांच के स्तर पर है और अधिकारी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि नहीं हुई है। तलाशी में मिले दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। अगर जांच में आय और संपत्ति के बीच बड़ा अंतर पाया जाता है तो संबंधित अधिकारी से इस संबंध में जवाब मांगा जा सकता है।
बेलागावी जिले के अथानी, मुदलागी और निप्पानी में हुई इस कार्रवाई ने भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति के मामलों पर एक बार फिर ध्यान खींचा है। जांच एजेंसियां अब तलाशी के दौरान जुटाए गए दस्तावेजों और अन्य जानकारियों का विश्लेषण करेंगी। इसके आधार पर तय होगा कि मामले में आगे पूछताछ, अतिरिक्त तलाशी या अन्य कानूनी कदम उठाए जाते हैं या नहीं।