बेंगलुरु। सिलिकॉन सिटी में नकली दवाओं के कथित अंतरराज्यीय नेटवर्क का मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था और दवा आपूर्ति श्रृंखला को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शहर की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की जांच में सामने आया है कि कथित तौर पर असली दवाओं के स्टॉक में नकली दवाएं मिलाकर बाजार में भेजी जा रही थीं, ताकि गुणवत्ता जांच और संदेह से बचा जा सके।

जांच अधिकारियों के अनुसार दवा वितरण व्यवस्था को इस तरह इस्तेमाल किया जा रहा था कि नकली दवाओं की पहचान सामान्य तौर पर आसानी से न हो सके। आरोप है कि असली दवाओं के बीच सीमित मात्रा में नकली दवाएं मिलाई जाती थीं और फिर पूरे स्टॉक को विभिन्न मेडिकल दुकानों तथा अन्य स्थानों तक पहुंचाया जाता था।

SIT की जांच में DM फार्मा नाम की दवा वितरण कंपनी की भूमिका भी सामने आई है। अधिकारियों के अनुसार इसी वितरण नेटवर्क के माध्यम से असली दवाओं के साथ कथित नकली दवाएं भी सप्लाई की जा रही थीं। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस नेटवर्क का विस्तार कितने राज्यों और शहरों तक था।

मामले में सबसे बड़ी चिंता उन दवाओं को लेकर है, जिनका उपयोग गंभीर बीमारियों या आपात स्थिति में किया जाता है। नकली या घटिया दवाओं का इस्तेमाल मरीजों के लिए गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकता है। ऐसी दवाओं में जरूरी सक्रिय तत्व कम मात्रा में हों या पूरी तरह अनुपस्थित हों तो इलाज का अपेक्षित असर नहीं मिल सकता।

जांच के दौरान यह भी पता लगाया जा रहा है कि कथित नकली दवाएं कहां तैयार की जाती थीं और उन्हें असली दवाओं जैसी पैकिंग किस स्थान पर दी जाती थी। पैकेजिंग, बैच नंबर, निर्माण तिथि और अन्य पहचान संबंधी विवरणों की भी जांच की जा रही है।

अधिकारियों का ध्यान इस बात पर भी है कि नकली दवाओं की खेप दवा वितरण श्रृंखला में किस स्तर पर मिलाई जाती थी। यदि यह काम किसी गोदाम या वितरण केंद्र पर किया जा रहा था तो वहां मौजूद कर्मचारियों और संबंधित लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।

नकली दवाओं का कारोबार सामान्य उपभोक्ताओं के लिए पहचानना मुश्किल हो सकता है, क्योंकि पैकिंग, ब्रांड नाम और दवा की बनावट अक्सर असली उत्पाद जैसी रखने की कोशिश की जाती है। इसी कारण इस तरह के मामलों में दवा आपूर्ति श्रृंखला की निगरानी बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।

SIT यह भी जांच रही है कि अस्पतालों, मेडिकल स्टोर और अन्य स्वास्थ्य संस्थानों तक कितनी मात्रा में ऐसी दवाएं पहुंचीं। संबंधित बिल, खरीद दस्तावेज, स्टॉक रजिस्टर और परिवहन से जुड़े रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं।

जांच एजेंसी उन लोगों से भी पूछताछ कर सकती है, जो DM फार्मा के माध्यम से दवाओं की खरीद या बिक्री से जुड़े रहे हैं। इससे सप्लाई चेन के शुरुआती और अंतिम बिंदु की पहचान करने में मदद मिल सकती है।

अधिकारियों के मुताबिक असली और नकली दवाओं को मिलाकर बेचने का तरीका इसलिए अपनाया गया हो सकता है ताकि एक ही खेप में सभी दवाएं संदिग्ध न दिखें। यदि स्टॉक में अधिकतर दवाएं असली हों और कुछ पैकेट नकली हों तो शुरुआती स्तर की जांच में गड़बड़ी पकड़ना कठिन हो सकता है।

इस पूरे मामले में दवाओं के नमूनों की प्रयोगशाला जांच महत्वपूर्ण होगी। लैब रिपोर्ट के आधार पर ही यह स्पष्ट किया जा सकेगा कि जब्त या संदिग्ध दवाओं में जरूरी तत्व मौजूद हैं या नहीं और वे निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरी उतरती हैं या नहीं।

SIT के सामने अब नेटवर्क से जुड़े अन्य राज्यों के संपर्कों की पहचान करने की भी चुनौती है। अंतरराज्यीय नेटवर्क की आशंका को देखते हुए दूसरे राज्यों की एजेंसियों से भी जानकारी साझा की जा सकती है।

जांच में वित्तीय लेनदेन भी महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है। नकली दवाओं की खरीद और बिक्री से जुड़े बैंक खातों, बिलों और भुगतान के रिकॉर्ड की जांच से यह पता लगाया जा सकता है कि कारोबार का पैमाना कितना बड़ा था।

स्वास्थ्य क्षेत्र के जानकारों के अनुसार मरीजों को हमेशा अधिकृत और विश्वसनीय फार्मेसी से ही दवा खरीदनी चाहिए। दवा का बिल लेना भी जरूरी है, क्योंकि किसी शिकायत या गुणवत्ता संबंधी समस्या की स्थिति में खरीद का रिकॉर्ड महत्वपूर्ण साबित होता है।

दवा के पैकेट पर बैच नंबर, निर्माण और एक्सपायरी तारीख, निर्माता का नाम तथा पैकिंग में किसी प्रकार की गड़बड़ी जैसी चीजों पर भी ध्यान देना जरूरी है। हालांकि केवल पैकिंग देखकर किसी दवा को नकली या असली घोषित नहीं किया जा सकता और संदेह होने पर अधिकृत जांच ही निर्णायक होती है।

मामला सामने आने के बाद शहर में दवा वितरण प्रणाली की निगरानी और मजबूत करने की जरूरत भी महसूस की जा रही है। खासकर थोक विक्रेताओं और बड़े वितरण केंद्रों से निकलने वाले स्टॉक का रिकॉर्ड व्यवस्थित रखने पर जोर बढ़ सकता है।

SIT की जांच अभी जारी है और नेटवर्क से जुड़े लोगों की पहचान, दवाओं के स्रोत तथा वितरण के पूरे रास्ते को समझने की कोशिश की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कथित तौर पर कितनी मात्रा में नकली दवाएं बाजार तक पहुंचीं और इसमें कितने लोग शामिल थे।

फिलहाल इस मामले ने दवा सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। SIT का फोकस अब इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने, नकली दवाओं के स्रोत तक पहुंचने और यह पता लगाने पर है कि इन दवाओं की आपूर्ति किन-किन अस्पतालों, मेडिकल स्टोर या अन्य संस्थानों तक की गई।

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