मंगलुरु। कर्नाटक के मंगलुरु स्थित मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (MRPL) प्लांट में बुधवार को हुए जोरदार धमाके के बाद भीषण आग लग गई। हादसे के बाद प्लांट परिसर में अफरा-तफरी मच गई और दूर से ही घना धुआं उठता दिखाई दिया। घटना की सूचना मिलते ही दमकल और आपातकालीन टीमें मौके पर पहुंचीं तथा आग पर काबू पाने की कार्रवाई शुरू की गई।
मंगलुरु पुलिस कमिश्नर सुधीर कुमार रेड्डी के मुताबिक हादसा प्लांट की हाइड्रो सल्फर ट्रीटमेंट यूनिट में हुआ। तेज धमाके के तुरंत बाद यूनिट में आग फैल गई। घटना में आठ लोग घायल हुए हैं। घायलों को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई और उन्हें इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया।
धमाका इतना तेज था कि आसपास के इलाकों में भी इसकी आवाज सुनाई दी। अचानक हुई तेज आवाज और इसके बाद प्लांट परिसर से उठते धुएं के कारण स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई। कुछ देर तक लोगों को यह स्पष्ट नहीं था कि प्लांट के अंदर क्या हुआ है और स्थिति कितनी गंभीर है।
घटना के बाद MRPL की आंतरिक सुरक्षा और फायर टीम भी सक्रिय हो गई। प्लांट की संवेदनशील प्रकृति को देखते हुए आग को आसपास की दूसरी यूनिटों तक फैलने से रोकने पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया गया। दमकल कर्मियों ने प्रभावित क्षेत्र को सुरक्षित करते हुए आग बुझाने का काम शुरू किया।
पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने भी घटनास्थल पर पहुंचकर हालात का जायजा लिया। प्लांट के भीतर आवाजाही को नियंत्रित किया गया और गैर-जरूरी लोगों को प्रभावित हिस्से से दूर रखा गया। राहत और बचाव दलों ने सबसे पहले घायल कर्मचारियों को सुरक्षित क्षेत्र में पहुंचाने की कार्रवाई की।
पुलिस कमिश्नर सुधीर कुमार रेड्डी ने बताया कि धमाका हाइड्रो सल्फर ट्रीटमेंट यूनिट में हुआ था। इसके बाद लगी आग के कारण आठ लोग घायल हुए। हादसे के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए तकनीकी जांच की जाएगी। जांच के बाद ही साफ हो सकेगा कि विस्फोट किसी मशीन में खराबी, दबाव बढ़ने या किसी अन्य तकनीकी कारण से हुआ।
प्लांट परिसर से उठ रहे घने धुएं की तस्वीरें और वीडियो भी सामने आए। इनमें रिफाइनरी के ऊपर धुएं का बड़ा गुबार दिखाई दिया। हादसे के बाद आसपास मौजूद लोग कुछ समय तक सुरक्षित स्थानों पर रहे और स्थिति सामान्य होने का इंतजार करते रहे।
MRPL जैसे बड़े औद्योगिक परिसर में कई ऐसी इकाइयां होती हैं जहां उच्च तापमान और दबाव पर काम किया जाता है। इसी कारण किसी भी तकनीकी खराबी की स्थिति में सुरक्षा प्रोटोकॉल तत्काल लागू किए जाते हैं। बुधवार के हादसे में भी आपातकालीन व्यवस्था सक्रिय की गई और फायर टीमों को प्रभावित यूनिट में भेजा गया।
घटना के बाद अधिकारियों का मुख्य ध्यान आग को नियंत्रित करने, घायलों के इलाज और प्लांट के बाकी हिस्सों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर रहा। इसके साथ यह भी देखा गया कि धमाके का असर किसी दूसरी यूनिट पर तो नहीं पड़ा है।
अधिकारियों की ओर से घटना के कारणों का विस्तृत विवरण जांच पूरी होने के बाद सामने आने की उम्मीद है। तकनीकी विशेषज्ञ प्रभावित उपकरणों और यूनिट की जांच कर यह पता लगाने की कोशिश करेंगे कि विस्फोट किस बिंदु से शुरू हुआ और उससे पहले कोई तकनीकी चेतावनी या खराबी दर्ज हुई थी या नहीं।
हादसे में घायल हुए लोगों की स्थिति को लेकर भी संबंधित अधिकारी नजर बनाए हुए हैं। प्लांट में मौजूद मेडिकल और इमरजेंसी सुविधाओं के साथ शहर के अस्पतालों को भी जरूरत के अनुसार तैयार रखा गया।
अचानक हुए इस विस्फोट के कारण प्लांट में काम कर रहे कर्मचारियों के बीच कुछ समय के लिए अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। सुरक्षा टीमों ने कर्मचारियों को प्रभावित क्षेत्र से हटाकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। इसके बाद घटनास्थल को जांच के लिए सुरक्षित किया गया।
औद्योगिक इकाइयों में इस तरह के हादसों के बाद सुरक्षा ऑडिट और तकनीकी जांच महत्वपूर्ण होती है। जांच के दौरान मशीनरी, प्रेशर सिस्टम, रखरखाव रिकॉर्ड और घटना से पहले दर्ज तकनीकी डेटा की पड़ताल की जा सकती है। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि दुर्घटना कैसे हुई और भविष्य में इस तरह की घटना रोकने के लिए क्या बदलाव किए जाने चाहिए।
मंगलुरु में स्थित MRPL देश की बड़ी रिफाइनरी सुविधाओं में शामिल है। ऐसे में प्लांट के भीतर हुए विस्फोट और आग की घटना ने औद्योगिक सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है। प्रशासन और कंपनी स्तर पर घटना के सभी पहलुओं की जांच की जाने की उम्मीद है।
फिलहाल पुलिस की ओर से आठ लोगों के घायल होने की जानकारी दी गई है। घटनास्थल पर राहत और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया है। हादसे के कारणों और प्लांट को हुए नुकसान का पूरा आकलन तकनीकी जांच के बाद ही सामने आएगा।
बुधवार की इस घटना ने कुछ ही पलों में MRPL परिसर और आसपास के क्षेत्रों में दहशत का माहौल पैदा कर दिया। तेज धमाका, उसके बाद लगी आग और आसमान में उठता घना धुआं हादसे की गंभीरता को दिखाता रहा। अब जांच का मुख्य फोकस यह पता लगाने पर रहेगा कि हाइड्रो सल्फर ट्रीटमेंट यूनिट में विस्फोट क्यों हुआ और भविष्य में ऐसी घटना को रोकने के लिए किन अतिरिक्त सुरक्षा उपायों की जरूरत है।
Tags: