बेंगलुरु। कर्नाटक राज्य ठेकेदार संघ ने राज्य सरकार से करीब ₹38,000 करोड़ के लंबित बिलों का भुगतान जल्द करने की मांग की है। संघ ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार को पत्र लिखकर दावा किया है कि 2021-22 से विभिन्न विकास कार्यों का भुगतान अटका हुआ है, जिसके कारण राज्यभर के ठेकेदार आर्थिक परेशानियों का सामना कर रहे हैं। संघ के अनुसार करीब 1.50 लाख ठेकेदार इस समस्या से प्रभावित हैं।
संघ के अध्यक्ष आर. मंजूनाथ और महासचिव जे.एम. नंदकुमार की ओर से लिखे गए पत्र में कहा गया है कि ठेकेदारों ने सरकारी विभागों के विकास कार्य तय समय के भीतर पूरे किए, लेकिन कई मामलों में तीन से चार साल गुजर जाने के बावजूद भुगतान नहीं हुआ। संघ का आरोप है कि बकाया राशि पाने के लिए ठेकेदारों को बार-बार संबंधित सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
पत्र में कहा गया है कि कांग्रेस सरकार के सत्ता में आने के बाद ठेकेदारों को उम्मीद थी कि लंबे समय से लंबित भुगतान की समस्या का समाधान होगा। संघ ने दावा किया कि सरकार की ओर से कई बार भुगतान कराने का आश्वासन दिया गया, लेकिन समस्या अभी भी बनी हुई है। ये संघ के आरोप हैं और ₹38,000 करोड़ का आंकड़ा भी ठेकेदार संगठन की ओर से बताया गया है।
ठेकेदार संघ ने इससे पहले 6 मार्च को बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में प्रदर्शन किया था। उस समय डी.के. शिवकुमार उपमुख्यमंत्री थे। उन्होंने प्रदर्शनकारी ठेकेदारों से कहा था कि उनकी समस्याओं पर तत्कालीन मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के साथ बैठक कराने की कोशिश की जाएगी। शिवकुमार ने उस समय सिंचाई विभाग में करीब ₹13,000 करोड़ और लघु सिंचाई विभाग में लगभग ₹3,000 करोड़ के लंबित बिलों का भी उल्लेख किया था और व्यापक समाधान की जरूरत बताई थी।
ठेकेदार संघ के ताजा पत्र में दावा किया गया है कि 30 जून 2026 को मुख्यमंत्री बनने के बाद डी.के. शिवकुमार ने संघ के पदाधिकारियों से बातचीत की थी और दो महीने के भीतर भुगतान की व्यवस्था करने की बात कही थी। संघ का कहना है कि यह समयसीमा गुजरने के बावजूद बकाये का पूरा भुगतान नहीं किया गया।
संघ ने सरकार से केवल लंबित बिल जारी करने की मांग नहीं की है, बल्कि टेंडर और भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता का मुद्दा भी उठाया है। संगठन का आरोप है कि लोक निर्माण विभाग और कुछ स्थानीय निकाय व्यवस्थाओं को छोड़कर कई विभागों में टेंडर और पुराने बिलों के भुगतान की प्रक्रिया पर्याप्त रूप से पारदर्शी नहीं है। संघ ने वित्त विभाग को आवश्यक राशि उपलब्ध कराने के लिए निर्देश देने की मांग की है।
ठेकेदारों ने पुराने टैक्स अंतर से जुड़ी राशि और सरकारी भुगतान प्रणाली से संबंधित कुछ प्रक्रियाओं में बदलाव की मांग भी रखी है। संघ ने 2017-18 और 2018-19 के VAT से GST में बदलाव से संबंधित अंतर राशि का मुद्दा उठाया है। इसके अलावा ई-प्रोक्योरमेंट प्लेटफॉर्म के कॉन्ट्रैक्ट मैनेजमेंट मॉड्यूल में जानकारी अपलोड किए बिना ट्रेजरी से भुगतान नहीं किए जाने से जुड़े आदेश पर भी पुनर्विचार की मांग की गई है।
बकाया भुगतान का मुद्दा नया नहीं है। पिछले वर्ष भी ठेकेदार संघ ने हजारों करोड़ रुपये के लंबित बिलों का मामला उठाया था और सरकार को भुगतान के लिए समयसीमा दी थी। उस समय संघ ने विभिन्न विभागों में लगभग ₹33,000 करोड़ के बकाये का दावा किया था। संगठन ने तब भी कहा था कि भुगतान में वरिष्ठता और पारदर्शिता का पालन किया जाना चाहिए।
राज्य की मौजूदा वित्तीय स्थिति भी इस विवाद की पृष्ठभूमि में महत्वपूर्ण है। हाल में कर्नाटक के वित्त विभाग ने सरकार को उपलब्ध वित्तीय संसाधनों को ध्यान में रखते हुए खर्च में सावधानी बरतने की सलाह दी थी। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने भी कहा था कि वित्त विभाग की सलाह सरकार के हित में है और राज्य को उपलब्ध संसाधनों के हिसाब से योजनाओं और खर्च का प्रबंधन करना होगा।
वित्त विभाग के नोट में नए विकास कार्यों की लंबित लागत और उपलब्ध फंड को लेकर यथार्थवादी दृष्टिकोण अपनाने की सलाह दी गई थी। इससे यह संकेत मिलता है कि राज्य सरकार के सामने ठेकेदारों के पुराने बिलों के साथ नई विकास योजनाओं और अन्य वित्तीय दायित्वों को संतुलित करने की चुनौती है। हालांकि ठेकेदार संघ का कहना है कि उनके द्वारा पहले ही पूरे किए जा चुके कार्यों का भुगतान और अधिक नहीं टाला जाना चाहिए।
संघ ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार लंबित बिलों पर जल्द ठोस कदम नहीं उठाती है तो ठेकेदार फिर से विरोध प्रदर्शन का रास्ता अपना सकते हैं। इससे पहले भी संगठन भुगतान की मांग को लेकर आंदोलन कर चुका है। संघ का कहना है कि लंबे समय तक पैसा अटका रहने से छोटे और मध्यम ठेकेदारों पर सबसे ज्यादा दबाव पड़ता है, क्योंकि उन्हें काम के दौरान मजदूरी, सामग्री और दूसरी लागतों का भुगतान पहले ही करना पड़ता है।
कर्नाटक राज्य ठेकेदार संघ ने अब मुख्यमंत्री से वित्त विभाग के साथ समन्वय कर लंबित राशि जारी कराने की मांग की है। संगठन चाहता है कि बकाया बिलों को चरणों में लंबा खींचने के बजाय जल्द भुगतान किया जाए और भविष्य में विकास कार्यों के लिए टेंडर जारी करते समय बजट उपलब्धता का भी ध्यान रखा जाए।
फिलहाल ₹38,000 करोड़ के लंबित भुगतान का आंकड़ा ठेकेदार संघ का दावा है। इस ताजा पत्र पर राज्य सरकार की विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि सरकार कुल बकाया राशि को कितना मानती है और भुगतान के लिए क्या समयसीमा या वित्तीय व्यवस्था तय की जाती है। ठेकेदारों की नजर अब मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और वित्त विभाग के अगले कदम पर है।