
बेंगलुरु। कर्नाटक में भूमि सुधार कानून को लेकर सत्तारूढ़ कांग्रेस के भीतर असंतोष खुलकर सामने आया है। आलंद से कांग्रेस विधायक और योजना आयोग के उपाध्यक्ष बी.आर. पाटिल ने पार्टी नेता राहुल गांधी को पत्र लिखकर कर्नाटक भूमि सुधार अधिनियम की धारा 79A, 79B और 79C को फिर से लागू कराने के लिए हस्तक्षेप की मांग की है। इन धाराओं को वर्ष 2020 में तत्कालीन भाजपा सरकार ने कानून में संशोधन के जरिए हटा दिया था।
बी.आर. पाटिल ने 29 सितंबर को राहुल गांधी को ईमेल और रजिस्टर्ड पोस्ट के जरिए पत्र भेजा। पत्र में उन्होंने कांग्रेस के 2023 विधानसभा चुनाव घोषणापत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि पार्टी ने भाजपा सरकार द्वारा लाए गए कथित “किसान-विरोधी कानूनों” को वापस लेने का वादा किया था। कांग्रेस के आधिकारिक घोषणापत्र में भाजपा सरकार द्वारा बनाए गए किसान-विरोधी कानूनों को रद्द करने की प्रतिबद्धता दर्ज थी।
पाटिल का कहना है कि कांग्रेस सरकार को सत्ता में आए तीन साल से अधिक समय हो चुका है, लेकिन भूमि सुधार अधिनियम की इन धाराओं को अब तक बहाल नहीं किया गया। उन्होंने यह मुद्दा पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के सामने उठाते हुए राहुल गांधी से हस्तक्षेप की मांग की है।
धारा 79A और 79B के तहत पहले कृषि भूमि की खरीद पर कुछ प्रतिबंध लागू थे। धारा 79A आय के आधार पर कृषि भूमि खरीदने की पात्रता तय करती थी, जबकि धारा 79B के तहत कृषि से अलग पेशे या संस्थाओं के लिए भूमि खरीद पर पाबंदियां थीं। धारा 79C इन प्रावधानों के उल्लंघन से संबंधित जांच और कार्रवाई की व्यवस्था से जुड़ी थी। 2020 के संशोधन ने इन तीनों धाराओं को समाप्त कर कृषि भूमि की खरीद के नियमों को काफी उदार बनाया था।
बी.आर. पाटिल ने इस बदलाव का विरोध करते हुए तर्क दिया है कि इन धाराओं के हटने के बाद कृषि भूमि का बड़े पैमाने पर हस्तांतरण हुआ है। उन्होंने दावा किया कि 2021 से अगस्त 2026 के बीच कर्नाटक में करीब 19.92 लाख एकड़ कृषि भूमि की बिक्री और हस्तांतरण हुआ। यह आंकड़ा पाटिल द्वारा उठाए गए मुद्दे का हिस्सा है और सरकार की ओर से इस दावे पर अलग से विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आना अभी बाकी है।
पाटिल का कहना है कि भूमि सुधार कानून का मूल उद्देश्य छोटे और सीमांत किसानों की जमीन की सुरक्षा करना था। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री देवराज उर्स के समय लागू किए गए भूमि सुधारों का उल्लेख करते हुए कहा कि ‘जोतने वाले को जमीन’ की नीति के तहत किसानों और काश्तकारों को अधिकार दिए गए थे। उनके अनुसार 79A, 79B और 79C जैसी धाराएं इसी व्यापक उद्देश्य का हिस्सा थीं।
दूसरी ओर इन धाराओं को हटाते समय तत्कालीन भाजपा सरकार का तर्क अलग था। 2020 में सरकार ने कहा था कि इन प्रावधानों से भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अड़चनें बढ़ रही थीं और किसानों को अपनी जमीन बेचने में मुश्किल होती थी। तत्कालीन सरकार ने कृषि भूमि की खरीद प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए कानून में बदलाव का बचाव किया था।
कांग्रेस ने उस समय इन संशोधनों का विरोध किया था। बाद में 2023 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने अपने घोषणापत्र में भाजपा सरकार द्वारा बनाए गए किसान-विरोधी कानूनों को रद्द करने का वादा किया। इसी वादे को आधार बनाते हुए अब पाटिल पार्टी सरकार पर दबाव बना रहे हैं।
पाटिल ने यह भी दावा किया है कि इन प्रावधानों को फिर लागू करने या इनमें उचित संशोधन करने का प्रस्ताव एक समय बजट के प्रारंभिक मसौदे में शामिल था, लेकिन अंतिम बजट पेश होने से पहले इसे हटा दिया गया। उन्होंने कहा कि इस विषय पर पहले मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से भी बातचीत हुई थी।
मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब राज्य के राजस्व विभाग ने विधानसभा में बताया कि सरकार के सामने फिलहाल धारा 79A, 79B और 79C को फिर से लागू करने का कोई प्रस्ताव नहीं है। इस स्थिति से असंतुष्ट पाटिल ने सीधे राहुल गांधी का दरवाजा खटखटाया है।
यह मुद्दा कांग्रेस सरकार के लिए राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण हो सकता है, क्योंकि पार्टी ने सत्ता में आने से पहले किसान हितों और भाजपा सरकार के कुछ पुराने कानूनों को बदलने की बात कही थी। अब अपने ही विधायक की ओर से चुनावी वादे की याद दिलाए जाने से सरकार पर इस विषय पर स्थिति स्पष्ट करने का दबाव बढ़ सकता है।
हालांकि यह कहना सही नहीं होगा कि कांग्रेस सरकार ने भाजपा शासन के सभी कानूनों को जस का तस रखा है। सरकार ने कृषि बाजार से जुड़े कुछ पुराने संशोधनों में बदलाव किए हैं, लेकिन भूमि सुधार अधिनियम की इन तीन धाराओं पर अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।
बी.आर. पाटिल पहले भी सरकार की नीतियों और प्रशासनिक फैसलों को लेकर सार्वजनिक रूप से असंतोष जता चुके हैं। इस बार उन्होंने भूमि सुधार जैसे संवेदनशील कृषि और संपत्ति से जुड़े मुद्दे को पार्टी हाईकमान तक पहुंचाया है।
अब नजर इस बात पर होगी कि राहुल गांधी या कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व इस पत्र पर क्या प्रतिक्रिया देता है। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया सरकार भूमि सुधार अधिनियम के इन प्रावधानों पर अपनी मौजूदा नीति में कोई बदलाव करती है या नहीं।
फिलहाल बी.आर. पाटिल के पत्र ने कर्नाटक कांग्रेस के भीतर इस मुद्दे पर मतभेद को सार्वजनिक कर दिया है। एक तरफ राज्य सरकार ने विधानसभा में इन धाराओं को बहाल करने का कोई प्रस्ताव नहीं होने की बात कही है, वहीं दूसरी तरफ पार्टी के वरिष्ठ विधायक इन्हें किसानों के हित में वापस लाने की मांग करते हुए केंद्रीय नेतृत्व से हस्तक्षेप चाहते हैं।





