उत्तराखंड, असम और गुजरात में यूसीसी लागू होने पर ओवैसी ने साधा निशाना, हिजाब पर फैसले को 'इस्लाम पर हमला' बताया
हैदराबाद: एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी की ओर से उत्तराखंड, असम और गुजरात में यूसीसी लागू किए जाने को लेकर सरकार पर जमकर निशाना साधा गया। उन्होंने हिजाब को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर भी अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी है।
मंगलवार को दारुस्सलाम में एआईएमआईएम हेडक्वार्टर में 'जलसा-ए-रहमतुल-लिल-आलमीन' की एक बड़ी सभा को संबोधित करते हुए ओवैसी यूसीसी कानून को मुसलमानों पर थोपे जाने की बात कही। उन्होंने कहा, "उत्तराखंड, असम और गुजरात में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू किया गया है। अगर लागू किए जा रहे कानून असल में हिंदू मैरिज एक्ट, हिंदू डिवोर्स एक्ट और हिंदू सक्सेशन एक्ट के प्रावधानों पर आधारित हैं, तो उन्हें वास्तव में यूनिफॉर्म सिविल कोड कैसे कहा जा सकता है? जब ये कानून हिंदू पर्सनल लॉ पर आधारित हैं, तो मुसलमानों पर इन्हें क्यों थोपा जाना चाहिए?"
ओवैसी ने कहा कि मुसलमानों को उनकी धार्मिक मान्यताओं से अलग करने की कोशिशें सफल नहीं होंगी और जो लोग इस्लाम को मानते हैं, वे कुरान और सुन्नत का पालन करते रहेंगे। उन्होंने कहा, "याद रखें, हमें हमारे विश्वास से दूर करने की कोशिशें, नाकाम होंगी। जो लोग इस्लाम में विश्वास रखते हैं, वे कुरान और सुन्नत की शिक्षाओं का पालन करते रहेंगे। हम अपने दीन (धर्म) को नहीं छोड़ेंगे।"
ओवैसी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले की कड़ी आलोचना की है, जिसमें प्रयागराज के एक स्कूल के नाबालिग छात्रा की याचिका खारिज कर दी गई थी। छात्रा ने तय स्कूल यूनिफॉर्म के साथ हिजाब पहनने की इजाजत मांगी थी। उन्होंने कोर्ट के फैसले को "इस्लाम पर हमला" बताया और सवाल उठाया कि क्या हाईकोर्ट को ऐसा आदेश देना चाहिए था। उन्होंने कहा कि सबरीमाला मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, जहां जरूरी धार्मिक प्रथाओं के मुद्दे पर विचार किया जा रहा है।
उन्होंने कहा, "मैं इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले से सहमत नहीं हूं, आज का फैसला भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 और 19 का उल्लंघन करता है। आप कौन होते हैं यह तय करने वाले कि इस्लाम के लिए क्या जरूरी है? लड़कियां हिजाब अपने सिर पर पहनती हैं, दिमाग पर नहीं। यह इस्लाम पर हमला है।"
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को कहा था कि याचिकाकर्ता कोई भी धार्मिक ग्रंथ या ऐसी सामग्री पेश करने में नाकाम रही जिससे यह साबित हो सके कि स्कार्फ पहनना उसके धर्म का "जरूरी" हिस्सा है, जिसके बिना उसकी आस्था पर बुरा असर पड़ेगा। कोर्ट ने यह भी बताया कि मामले में पेश की गई तस्वीरों में उसी धार्मिक समुदाय की दूसरी छात्राएं बिना स्कार्फ पहने स्कूल जाती हुई दिख रही थीं।
एआईएमआईएम प्रमुख ने भारत के प्रति अपनी प्रतिबद्धता पर भी जोर दिया और कहा कि मुसलमान अपने विश्वास के प्रति प्रतिबद्ध रहते हुए देश की रक्षा करना और भारत के विकास में योगदान देना जारी रखेंगे। उन्होंने कहा, "हम इस देश से प्यार करते हैं, हम इस देश की रक्षा करेंगे और अपने विश्वास के प्रति प्रतिबद्ध रहते हुए हम भारत को महाशक्ति बनाने के लिए काम करेंगे। भारत की आजादी की लड़ाई उन लोगों की भी है जिन्होंने देश के लिए अपनी जान दी, जिनमें तुर्रेबाज खान जैसे स्वतंत्रता सेनानी शामिल हैं। उनके बलिदानों को भुलाया नहीं जाना चाहिए।"
ओवैसी ने आरएसएस और भाजपा पर भी तीखा हमला किया और आरोप लगाया कि इन संगठनों ने ऐतिहासिक रूप से भारत के संविधान के बजाय मनुस्मृति को प्राथमिकता दी है। ओवैसी ने कहा, "मैं आरएसएस से जुड़े लोगों से मनुस्मृति के बारे में पूछ रहा हूं। क्या यह सच नहीं है कि 26 नवंबर 1949 को हमने संविधान अपनाया था? हालांकि, चार दिन बाद, 30 नवंबर को आरएसएस के एक मुखपत्र ने इसके खिलाफ शिकायत छापी, जिसमें कहा गया कि 'यह संविधान नहीं था और इसकी जगह मनुस्मृति होनी चाहिए थी'। उन्हें बाबासाहेब अंबेडकर द्वारा तैयार किए गए संविधान से दिक्कत थी।"