नई दिल्ली। पाकिस्तान की ओर से जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर को मोस्ट वांटेड आतंकियों की सूची में शामिल करने और उसकी गिरफ्तारी की सूचना देने वाले के लिए **70 लाख पाकिस्तानी रुपये** का इनाम घोषित करने पर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। भारत ने पाकिस्तान की इस कार्रवाई को आतंकवाद के खिलाफ वास्तविक कदम मानने से इनकार करते हुए इसे दिखावा और दुनिया की आंखों में धूल झोंकने की कोशिश करार दिया है।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान की तरफ से ऐसी घोषणाएं कोई नई बात नहीं हैं। भारत का कहना है कि अगर पाकिस्तान वास्तव में आतंकवाद के खिलाफ गंभीर है तो उसे केवल इनाम घोषित करने के बजाय मसूद अजहर के खिलाफ ठोस और विश्वसनीय कार्रवाई करनी चाहिए।
पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब अक्टूबर में Financial Action Task Force यानी FATF की महत्वपूर्ण बैठक होने वाली है। इसी टाइमिंग के कारण पाकिस्तान की कार्रवाई के मकसद पर सवाल उठ रहे हैं।
पाकिस्तान ने क्या किया?
पाकिस्तान की Federal Investigation Agency यानी FIA ने अपनी 2026 की नई 'Red Book' में मसूद अजहर को मोस्ट वांटेड भगोड़ों की सूची में शामिल किया है।
इसके साथ ही उस पर घोषित इनाम की रकम बढ़ाकर **70 लाख पाकिस्तानी रुपये** कर दी गई है।
मसूद अजहर पर पहले 50 लाख पाकिस्तानी रुपये का इनाम था। अब इसमें 20 लाख PKR की बढ़ोतरी की गई है।
FIA की Red Book में पाकिस्तान द्वारा वांछित घोषित किए गए आतंकवाद से जुड़े आरोपियों की जानकारी रखी जाती है।
पाकिस्तान इस कदम के जरिए यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि उसकी एजेंसियां मसूद अजहर को पकड़ने के लिए सक्रिय हैं।
लेकिन भारत इसी दावे पर सवाल उठा रहा है।
भारत ने बताया 'दिखावा'
भारत के विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान के कदम को भरोसेमंद कार्रवाई मानने से इनकार किया है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि इस तरह के हथकंडे नए नहीं हैं और केवल खोखली घोषणाओं से आतंकवाद के खिलाफ गंभीरता साबित नहीं होती।
भारत का कहना है कि पाकिस्तान को मसूद अजहर के खिलाफ वास्तविक और ठोस कार्रवाई करके दिखानी चाहिए।
भारत की आपत्ति का मुख्य आधार पाकिस्तान के पुराने दावों और मसूद अजहर के ठिकाने को लेकर पैदा हुआ विवाद है।
पाकिस्तान लंबे समय से यह कहता रहा है कि मसूद अजहर उसके यहां मौजूद नहीं है।
पाकिस्तान कहता है अफगानिस्तान में है अजहर
पाकिस्तान ने 2021 से दावा किया है कि मसूद अजहर देश छोड़कर अफगानिस्तान चला गया है।
इसी दौरान FIA ने उसके बारे में जानकारी देने के लिए 50 लाख पाकिस्तानी रुपये का इनाम रखा था।
अब पांच साल बाद यह रकम बढ़ाकर 70 लाख PKR कर दी गई है।
लेकिन मसूद अजहर के ठिकाने को लेकर पाकिस्तान के दावे पर लगातार सवाल उठते रहे हैं।
भारतीय खुफिया सूत्रों के हवाले से आई रिपोर्टों में दावा किया गया है कि मसूद अजहर पाकिस्तान में ही मौजूद है। दूसरी तरफ पाकिस्तान उसे अफगानिस्तान में बताता रहा है।
इसी विरोधाभास को लेकर भारत पाकिस्तान की नई घोषणा को संदेह की नजर से देख रहा है।
तालिबान भी खारिज कर चुका पाकिस्तान का दावा
पाकिस्तान के लिए परेशानी यह है कि अफगानिस्तान की तालिबान सरकार भी पहले मसूद अजहर की मौजूदगी से जुड़े पाकिस्तानी दावों को खारिज कर चुकी है।
यानी पाकिस्तान कहता रहा कि मसूद अजहर अफगानिस्तान में है, जबकि अफगान पक्ष इस दावे को स्वीकार नहीं करता।
ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर मसूद अजहर है कहां?
यही वजह है कि भारत और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की आतंकवाद विरोधी कार्रवाई की विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
FATF की बैठक से पहले क्यों बढ़ा इनाम?
पाकिस्तान के फैसले की टाइमिंग सबसे ज्यादा चर्चा में है।
अक्टूबर में FATF की प्लीनरी बैठक होने वाली है।
FATF एक अंतरराष्ट्रीय संस्था है जो मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण से निपटने के लिए देशों की व्यवस्थाओं का मूल्यांकन करती है।
पाकिस्तान पहले FATF की ग्रे लिस्ट में रह चुका है।
इसी वजह से मसूद अजहर पर इनाम बढ़ाने के फैसले को आगामी FATF समीक्षा से जोड़कर देखा जा रहा है।
रिपोर्टों में भारतीय सूत्रों ने इसे FATF के सामने आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई दिखाने की कोशिश बताया है।
2021 में भी घोषित किया था इनाम
यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान ने मसूद अजहर पर इनाम रखा है।
2021 में FIA ने उसके बारे में सूचना देने वाले के लिए **50 लाख पाकिस्तानी रुपये** का इनाम घोषित किया था।
अब 2026 में इसे बढ़ाकर 70 लाख पाकिस्तानी रुपये कर दिया गया है।
यानी नई घोषणा में मूल रूप से इनाम की राशि 20 लाख PKR बढ़ाई गई है।
यही तथ्य भारत की प्रतिक्रिया को महत्वपूर्ण बनाता है।
भारत पूछ रहा है कि अगर पांच साल से मसूद अजहर वांछित है तो उसके खिलाफ अब तक निर्णायक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
कौन है मसूद अजहर?
मसूद अजहर पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन **जैश-ए-मोहम्मद (JeM)** का संस्थापक और प्रमुख है।
भारत उसे लंबे समय से कई बड़े आतंकी मामलों में वांछित मानता है।
मसूद अजहर का नाम 2001 में भारतीय संसद पर हुए आतंकी हमले, 2016 के पठानकोट एयरबेस हमले और 2019 के पुलवामा आतंकी हमले से जोड़ा जाता रहा है।
पुलवामा हमले में 40 से अधिक CRPF जवान मारे गए थे।
इसी कारण मसूद अजहर भारत के सबसे वांछित आतंकियों में शामिल है।
संयुक्त राष्ट्र भी घोषित कर चुका वैश्विक आतंकी
मसूद अजहर केवल भारत की वांटेड लिस्ट में शामिल नाम नहीं है।
उसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की प्रतिबंध व्यवस्था के तहत वैश्विक आतंकवादी के रूप में सूचीबद्ध किया जा चुका है।
लंबे समय तक उसके वैश्विक आतंकी घोषित होने की प्रक्रिया अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में विवाद का विषय रही थी।
भारत लगातार मसूद अजहर और जैश-ए-मोहम्मद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्रवाई की मांग करता रहा है।
यही वजह है कि पाकिस्तान की ओर से अब उसे अपनी Red Book में भगोड़ा दिखाए जाने पर सवाल उठ रहे हैं।
भारत क्यों नहीं मान रहा पाकिस्तान की बात?
भारत के रुख को तीन प्रमुख बिंदुओं से समझा जा सकता है।
पहला—मसूद अजहर लंबे समय से पाकिस्तान आधारित जैश-ए-मोहम्मद का प्रमुख रहा है।
दूसरा—पाकिस्तान 2021 से उसके अफगानिस्तान चले जाने का दावा करता रहा है, जबकि इस दावे को लेकर विवाद मौजूद है।
तीसरा—नई घोषणा FATF की महत्वपूर्ण बैठक से ठीक पहले सामने आई है।
इन्हीं कारणों से भारत इसे केवल आतंकवाद के खिलाफ वास्तविक कार्रवाई के रूप में स्वीकार करने को तैयार नहीं है।
भारत चाहता है कि पाकिस्तान गिरफ्तारी, अभियोजन और आतंकी नेटवर्क के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई के रूप में परिणाम दिखाए।
केवल इनाम से क्या होगा?
किसी वांछित आरोपी पर इनाम घोषित करने का उद्देश्य आम तौर पर उसके बारे में सूचना हासिल करना होता है।
लेकिन मसूद अजहर का मामला सामान्य भगोड़े से अलग है।
वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जाना-पहचाना आतंकी सरगना है और उसके संगठन का नाम दशकों से सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी में रहा है।
इसलिए भारत का तर्क है कि केवल इनाम बढ़ाना पर्याप्त नहीं है।
असल सवाल यह है कि पाकिस्तान की सुरक्षा और जांच एजेंसियां उसके खिलाफ जमीन पर क्या कार्रवाई करती हैं।
पाकिस्तान की Red Book में और भी नाम
FIA की नई Red Book में केवल मसूद अजहर का नाम नहीं है।
रिपोर्टों के मुताबिक इसमें 26/11 मुंबई आतंकी हमलों से जुड़े कई आरोपियों के नाम भी शामिल हैं।
19 लोगों को मुंबई हमलों से जुड़े मामलों में सूचीबद्ध किए जाने की जानकारी सामने आई है। इनमें समुद्री रास्ते की व्यवस्था, वित्तीय मदद और दूसरी कथित भूमिकाओं से जुड़े नाम शामिल बताए गए हैं।
पाकिस्तान इस सूची को आतंकवाद के खिलाफ अपनी कार्रवाई के प्रमाण के तौर पर पेश कर सकता है।
लेकिन भारत का जोर सूची बनाने से ज्यादा उसके बाद होने वाली कार्रवाई पर है।
FATF क्यों है पाकिस्तान के लिए महत्वपूर्ण?
FATF की निगरानी किसी देश की वैश्विक वित्तीय छवि पर असर डाल सकती है।
अगर किसी देश की मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फाइनेंसिंग रोकने की व्यवस्था में गंभीर रणनीतिक कमियां पाई जाती हैं तो उसे बढ़ी हुई निगरानी यानी 'ग्रे लिस्ट' में रखा जा सकता है।
इससे अंतरराष्ट्रीय बैंकों, निवेशकों और वित्तीय संस्थानों की जोखिम संबंधी सतर्कता बढ़ सकती है।
पाकिस्तान पहले कई वर्षों तक FATF की ग्रे लिस्ट में रहा है।
इसीलिए अक्टूबर की समीक्षा से पहले मसूद अजहर पर इनाम बढ़ाए जाने को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
क्या फिर ग्रे लिस्ट में जा सकता है पाकिस्तान?
इस समय यह निश्चित रूप से कहना सही नहीं होगा कि पाकिस्तान को दोबारा FATF की ग्रे लिस्ट में डाल दिया जाएगा।
इसका फैसला FATF की मूल्यांकन प्रक्रिया और सदस्य देशों के बीच होने वाली चर्चा पर निर्भर करता है।
लेकिन पाकिस्तान के आतंकवाद वित्तपोषण विरोधी ढांचे पर अंतरराष्ट्रीय निगरानी बनी हुई है।
इसी संदर्भ में उसकी नई Red Book और मसूद अजहर पर बढ़ाया गया इनाम चर्चा में है।
₹70 लाख नहीं, PKR 70 लाख
इस खबर में एक तथ्य का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।
पाकिस्तान ने मसूद अजहर पर **70 लाख पाकिस्तानी रुपये** का इनाम रखा है।
इसे केवल '70 लाख रुपये' लिखने से भारतीय पाठक इसे 70 लाख भारतीय रुपये समझ सकते हैं।
इसलिए खबर में **70 लाख पाकिस्तानी रुपये (PKR 7 million)** लिखना ज्यादा सटीक होगा।
इसी तरह यह भी स्पष्ट रहना चाहिए कि इनाम शून्य से 70 लाख नहीं हुआ है।
पहले से मौजूद 50 लाख PKR के इनाम को 20 लाख बढ़ाकर 70 लाख PKR किया गया है।
भारत ने मांगी ठोस कार्रवाई
भारत का संदेश साफ है कि आतंकवाद से लड़ने की गंभीरता घोषणाओं से नहीं बल्कि कार्रवाई से साबित होगी।
नई दिल्ली ने पाकिस्तान से प्रतीकात्मक कदमों के बजाय मसूद अजहर के खिलाफ वास्तविक और ठोस कार्रवाई करने को कहा है।
यानी भारत की नजर अब इस बात पर होगी कि Red Book में नाम डालने और इनाम बढ़ाने के बाद पाकिस्तान वास्तव में क्या करता है।
क्या मसूद अजहर को तलाशने के लिए कोई प्रभावी ऑपरेशन होता है?
क्या उसके नेटवर्क और वित्तीय ढांचे के खिलाफ कार्रवाई होती है?
और सबसे बड़ा सवाल—क्या पाकिस्तान उसके वास्तविक ठिकाने को लेकर विश्वसनीय जानकारी सामने रखता है?
FATF बैठक तक बढ़ेगा दबाव
अक्टूबर में होने वाली FATF प्लीनरी तक पाकिस्तान पर इन सवालों का दबाव बने रहने की संभावना है।
मसूद अजहर पर इनाम बढ़ाकर पाकिस्तान ने अपनी तरफ से आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई का संदेश देने की कोशिश की है, लेकिन भारत ने इस कदम को तुरंत खारिज करते हुए इसे दिखावटी कार्रवाई बताया है।
फिलहाल सबसे बड़ा विरोधाभास मसूद अजहर के ठिकाने को लेकर है।
पाकिस्तान उसे भगोड़ा बताकर अफगानिस्तान से जोड़ता रहा है, जबकि भारतीय सूत्रों के हवाले से रिपोर्टों में उसके पाकिस्तान में मौजूद होने का दावा किया गया है।
ऐसे में केवल **70 लाख PKR का इनाम** इस विवाद को खत्म नहीं करता।
भारत का रुख यही है कि अगर पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ अपनी प्रतिबद्धता साबित करना चाहता है तो उसे घोषणाओं से आगे बढ़कर कार्रवाई करनी होगी। आने वाली FATF बैठक के मद्देनजर मसूद अजहर का मामला एक बार फिर पाकिस्तान की आतंकवाद विरोधी नीति की परीक्षा बन गया है।
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