मंडी। मनरेगा कामगारों के 28 दिनों के बाद भी काम नहीं मिला है। बालीचौकी में ग्राम पंचायत सुधरानी के सैकड़ों मनरेगा कामगारों ने काम न मिलने पर अब प्रशासन का दरवाजा खटखटाया है। कामगारों ने उपमंडलाधिकारी, बालीचौकी को लिखित ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि उन्हें नियमानुसार कार्य उपलब्ध कराया जाए तथा निर्धारित समय सीमा में काम न मिलने के कारण बेरोजगारी भत्ता दिया जाए। कामगारों के अनुसार उन्होंने 29 जनवरी 2026 को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के तहत पंचायत सचिव के माध्यम से काम के लिए आवेदन किया था। कामगारों का कहना है कि आवेदन किए हुए 28 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक उन्हें कोई कार्य आवंटित नहीं किया गया है। जबकि मनरेगा कानून के तहत पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग को 15 दिनों के भीतर काम उपलब्ध कराना अनिवार्य होता है। यदि तय समय सीमा में काम उपलब्ध नहीं कराया जाता, तो संबंधित कामगार कानूनन बेरोजगारी भत्ते के हकदार बनते हैं। ग्रामीणों में इस मुद्दे को लेकर गहरी नाराजगी देखी जा रही है। उनका कहना है कि मनरेगा जैसी योजना का उद्देश्य ही ग्रामीण परिवारों को रोजगार की सुरक्षा देना है, लेकिन जब समय पर काम नहीं मिलता तो परिवारों की आजीविका पर सीधा असर पड़ता है।