परिसीमन पर इमरान मसूद ने सरकार को घेरा

Update: 2026-08-09 16:59 GMT
Uttar Pradesh उत्तर प्रदेश। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने परिसीमन को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने दावा किया कि परिसीमन के नाम पर देश में राजनीतिक और क्षेत्रीय असंतुलन की स्थिति पैदा हो सकती है। उन्होंने कहा कि यदि किसी तरह की अलगाववादी भावना पैदा होती है तो यह देश की एकता और अखंडता के लिए गंभीर खतरा हो सकता है। इमरान मसूद ने कहा कि सरकार को देश के व्यापक हितों को ध्यान में रखते हुए परिसीमन के मुद्दे पर विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि वर्ष 2027 की जनगणना के आधार पर परिसीमन लागू किया जाता है तो उत्तर भारत के राज्यों की लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ सकती है, जबकि दक्षिण भारत के राज्यों की सीटें घट सकती हैं।
कांग्रेस सांसद ने कहा कि सीटों के इस संभावित बदलाव से देश के विभिन्न क्षेत्रों के बीच राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर असंतुलन पैदा हो सकता है। उनके मुताबिक, इससे दक्षिण भारत में असंतोष की भावना जन्म ले सकती है और यह स्थिति देश के लिए ठीक नहीं होगी। उन्होंने कहा कि भारत की ताकत उसकी एकता और अखंडता में है। ऐसे किसी भी निर्णय से बचना चाहिए जिससे देश के अलग-अलग क्षेत्रों के बीच दूरी बढ़े। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि परिसीमन के बहाने देश में अराजकता फैलाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।
इमरान मसूद ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में देशहित को प्राथमिकता देती है तो उसे परिसीमन के संभावित प्रभावों पर व्यापक चर्चा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि उत्तर और दक्षिण भारत के बीच राजनीतिक प्रतिनिधित्व का संतुलन बनाए रखना जरूरी है। कांग्रेस सांसद ने परिसीमन को केवल सीटों की संख्या बढ़ाने या घटाने का विषय नहीं बताया, बल्कि इसे देश के संघीय ढांचे और राजनीतिक संतुलन से जुड़ा मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि किसी भी फैसले से पहले सभी राज्यों और राजनीतिक दलों के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया जाना चाहिए।
परिसीमन को लेकर देश में राजनीतिक बहस पहले से जारी है। संभावित सीट पुनर्विन्यास को लेकर अलग-अलग राज्यों और राजनीतिक दलों की अपनी चिंताएं हैं। उत्तर भारत की बढ़ती आबादी के कारण वहां लोकसभा सीटों में संभावित बढ़ोतरी और दक्षिणी राज्यों के प्रतिनिधित्व पर असर को लेकर बहस होती रही है। इमरान मसूद ने इसी संदर्भ में कहा कि यदि प्रतिनिधित्व में बड़ा बदलाव होता है तो उससे पैदा होने वाली राजनीतिक और सामाजिक भावनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने सरकार से इस मुद्दे पर सावधानीपूर्वक कदम उठाने की अपील की।
Tags:    

Similar News