Delhi दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एशियन गेम्स 2026 में पुरुष मैराथन में ऐतिहासिक रजत पदक जीतने वाले भारतीय धावक सावन बरवाल को बधाई दी है। बरवाल ने इस उपलब्धि के साथ नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी बनाया। उन्होंने 42.195 किलोमीटर की मैराथन 2 घंटे 11 मिनट 37 सेकंड में पूरी की। प्रधानमंत्री मोदी ने सावन बरवाल की उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि पुरुष मैराथन में उनका रजत पदक ऐतिहासिक है। उन्होंने कहा कि चार दशक से अधिक समय के बाद भारत को इस स्पर्धा में पदक मिला है। बरवाल की उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि एशियन गेम्स की मैराथन स्पर्धा में भारत का यह पहला पदक है, जो देश के बाहर जीता गया है।
पीएम मोदी ने सावन बरवाल के धैर्य और दृढ़ संकल्प की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनकी इस उपलब्धि ने देश को गौरवान्वित किया है। प्रधानमंत्री ने भारतीय धावक को आगे की यात्रा के लिए शुभकामनाएं भी दीं। सावन बरवाल के रजत पदक ने पुरुष मैराथन में भारत का 44 साल लंबा इंतजार समाप्त कर दिया। इससे पहले भारत को एशियन गेम्स की पुरुष मैराथन में पिछला पदक 1982 के दिल्ली संस्करण में मिला था। इस लिहाज से बरवाल की सफलता भारतीय एथलेटिक्स के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बन गई है।
बरवाल ने मैराथन में 2:11:37 का समय निकालकर अपना व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के साथ नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया। वह जापान के इचिटाका यामाशिता के बाद दूसरे स्थान पर रहे। यामाशिता ने 2:10:49 के समय के साथ स्वर्ण पदक जीता, जबकि चीन के पेइयोउ फेंग ने 2:12:13 के साथ कांस्य पदक हासिल किया। इस प्रदर्शन के साथ बरवाल ने अपना ही राष्ट्रीय रिकॉर्ड बेहतर किया। इससे पहले उन्होंने अप्रैल 2026 में रॉटरडैम मैराथन में 2:11:58 का समय दर्ज कर राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया था। एशियन गेम्स में उन्होंने इसमें और सुधार करते हुए 2:11:37 का समय निकाला।
भारत ने एशियन गेम्स की पुरुष मैराथन में इससे पहले 1951 में स्वर्ण और कांस्य पदक जीते थे, जबकि 1982 में कांस्य पदक मिला था। ये तीनों पदक नई दिल्ली में आयोजित एशियन गेम्स में आए थे। इसी कारण सावन बरवाल का रजत पदक इस स्पर्धा में भारत के बाहर जीता गया देश का पहला एशियन गेम्स मैराथन पदक है। प्रधानमंत्री मोदी ने बरवाल की उपलब्धि को उनके धैर्य और दृढ़ संकल्प का परिणाम बताते हुए भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। बरवाल के इस प्रदर्शन ने राष्ट्रीय रिकॉर्ड के साथ भारतीय पुरुष मैराथन के चार दशक से अधिक लंबे पदक इंतजार को भी खत्म कर दिया।