Sarangarh-Bilaigarh. सारंगढ़-बिलाईगढ़। तंबाकू और इससे जुड़े उत्पादों के सेवन से होने वाले नुकसान को देखते हुए सरकार की ओर से तंबाकू नियंत्रण के लिए कई कानूनी प्रावधान किए गए हैं। सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम, 2003, जिसे आम तौर पर कोटपा एक्ट (COTPA Act) कहा जाता है, के तहत सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान, तंबाकू उत्पादों के विज्ञापन, नाबालिगों को तंबाकू उत्पाद बेचने और शैक्षणिक संस्थानों के आसपास तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया गया है। राष्ट्रीय तंबाकू
नियंत्रण कार्यक्रम
के तहत लोगों और व्यापारियों को इन नियमों की जानकारी देने का उद्देश्य तंबाकू के सेवन को कम करना और समाज को तंबाकू मुक्त बनाना है। सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम के तहत लोगों और व्यापारियों को कोटपा एक्ट के प्रावधानों की जानकारी दी जा रही है। प्रशासन की ओर से खास तौर पर तंबाकू उत्पादों के विक्रेताओं, पान दुकानदारों और होटल संचालकों को कानून के विभिन्न प्रावधानों का पालन करने की अपील की जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक नियमों की जानकारी होने से व्यापारी अनजाने में होने वाले उल्लंघन से बच सकते हैं और कानूनी कार्रवाई से भी बचाव हो सकता है।
कोटपा एक्ट की धारा 4 के तहत सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान प्रतिबंधित है। सार्वजनिक स्थानों की श्रेणी में अस्पताल, स्वास्थ्य संस्थान, शैक्षणिक संस्थान, पुस्तकालय, कार्यालय, न्यायालय भवन, रेलवे स्टेशन, बस स्टॉप, हवाई अड्डे, सार्वजनिक वाहन, सिनेमा घर, शॉपिंग मॉल, रेस्तरां, होटल, जलपान गृह, मनोरंजन केंद्र और अन्य सार्वजनिक स्थान शामिल हैं। सार्वजनिक स्थान पर धूम्रपान करते पाए जाने पर 200 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। धारा 5 के तहत सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों के प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष विज्ञापन पर रोक है। तंबाकू उत्पादों का प्रचार करने वाले विज्ञापन या प्रचार सामग्री के प्रदर्शन को कानून के तहत अपराध माना जाता है। उल्लंघन की स्थिति में पहली बार अपराध पर जुर्माना या कारावास और दोबारा उल्लंघन पर अधिक कठोर दंड का प्रावधान है। इसलिए तंबाकू उत्पाद बेचने वाले दुकानदारों को दुकान और प्रतिष्ठान पर किसी भी तरह का प्रतिबंधित विज्ञापन प्रदर्शित करने से बचना चाहिए।
धारा 6 के तहत 18 वर्ष से कम आयु के व्यक्ति को सिगरेट या अन्य तंबाकू उत्पाद बेचने या बिक्री के लिए उपलब्ध कराने पर प्रतिबंध है। इसका उद्देश्य बच्चों और किशोरों को तंबाकू की लत से दूर रखना है। धारा 6 के दूसरे महत्वपूर्ण प्रावधान के तहत किसी भी शैक्षणिक संस्थान के 100 गज के दायरे में सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों की बिक्री प्रतिबंधित है। नियमों का उल्लंघन करने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ जुर्माने की कार्रवाई की जा सकती है। तंबाकू उत्पादों की पैकिंग को लेकर भी कोटपा एक्ट में महत्वपूर्ण प्रावधान हैं। धारा 7 के तहत तंबाकू उत्पादों के पैकेट पर निर्धारित स्वास्थ्य चेतावनी और सचित्र चेतावनी प्रदर्शित करना जरूरी है। इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं को तंबाकू सेवन से होने वाले स्वास्थ्य नुकसान के बारे में जागरूक करना है। नियमों का उल्लंघन होने पर निर्माता के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और निर्धारित दंड का प्रावधान है। कुछ परिस्थितियों में विक्रेता और वितरक भी कार्रवाई के दायरे में आ सकते हैं।
सार्वजनिक स्थानों के मालिक, प्रबंधक, संचालक और पर्यवेक्षकों की भी जिम्मेदारी तय की गई है। उन्हें अपने परिसर में धूम्रपान प्रतिबंधित होने की जानकारी स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करनी होती है। प्रवेश द्वार और आवश्यक स्थानों पर धूम्रपान निषेध क्षेत्र का बोर्ड लगाया जाना चाहिए। बोर्ड पर संबंधित मालिक या जिम्मेदार व्यक्ति का नाम और संपर्क नंबर जैसी जानकारी प्रदर्शित करने का प्रावधान है। पान दुकानों और होटल जैसे प्रतिष्ठानों में भी नियमों के पालन पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। परिसर में धूम्रपान को बढ़ावा देने वाली व्यवस्था नहीं होनी चाहिए। नियमों के तहत माचिस, लाइटर, ऐशट्रे जैसी वस्तुओं की उपलब्धता और इस्तेमाल को लेकर भी निर्धारित प्रावधानों का पालन करना आवश्यक है। किसी भी प्रतिष्ठान के मालिक या प्रबंधक की जिम्मेदारी है कि वह अपने परिसर में सार्वजनिक धूम्रपान प्रतिबंधित रखने के लिए जरूरी व्यवस्था करे।
यदि किसी होटल या अन्य पात्र प्रतिष्ठान में नियमानुसार स्मोकिंग जोन बनाने की अनुमति लागू होती है, तो उसे निर्धारित नियमों और स्पष्ट संकेतों के साथ अलग स्थान के रूप में प्रदर्शित करना आवश्यक है। आम लोगों को भी यह समझना जरूरी है कि सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान करने से केवल धूम्रपान करने वाले व्यक्ति पर ही असर नहीं पड़ता, बल्कि आसपास मौजूद लोगों को भी धुएं के कारण नुकसान हो सकता है। शैक्षणिक संस्थानों के लिए तंबाकू मुक्त परिसर बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया है। स्कूल और अन्य शैक्षणिक संस्थानों में ‘तंबाकू मुक्त शैक्षणिक संस्थान’ का बोर्ड प्रदर्शित किया जाना चाहिए। इसमें यह जानकारी भी दी जानी चाहिए कि संस्थान के 100 गज के दायरे में सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों की बिक्री प्रतिबंधित है और उल्लंघन करने पर कार्रवाई हो सकती है। संबंधित संस्था प्रभारी का नाम, पदनाम और मोबाइल नंबर भी प्रदर्शित करने का प्रावधान बताया गया है।
तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम का उद्देश्य केवल जुर्माना लगाना नहीं, बल्कि लोगों को तंबाकू सेवन से होने वाले नुकसान के प्रति जागरूक करना भी है। कम उम्र में तंबाकू की शुरुआत आगे चलकर गंभीर लत का रूप ले सकती है। इसलिए बच्चों और युवाओं को तंबाकू उत्पादों से दूर रखना जरूरी है। इसी उद्देश्य से नाबालिगों को तंबाकू उत्पाद बेचने और शिक्षण संस्थानों के आसपास इनकी बिक्री पर रोक लगाई गई है। प्रशासन ने व्यापारियों और प्रतिष्ठान संचालकों से अपील की है कि वे कोटपा एक्ट के प्रावधानों का पालन करें। दुकानदार
प्रतिबंधित विज्ञापन
न लगाएं, 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को तंबाकू उत्पाद न बेचें और शैक्षणिक संस्थानों के आसपास निर्धारित दूरी के नियम का पालन करें। वहीं सार्वजनिक स्थानों के मालिक और प्रबंधक अपने परिसर में धूम्रपान निषेध व्यवस्था सुनिश्चित करें। कोटपा एक्ट के नियमों का पालन करना केवल कानूनी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि स्वस्थ समाज बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। तंबाकू के सेवन से होने वाली बीमारियों और इसके सामाजिक प्रभावों को कम करने के लिए प्रशासन, व्यापारी और आम नागरिकों को मिलकर जिम्मेदारी निभानी होगी। नियमों का सही तरीके से पालन होने पर बच्चों और युवाओं को तंबाकू से दूर रखने में मदद मिलेगी और तंबाकू मुक्त समाज की दिशा में प्रभावी कदम उठाया जा सकेगा।
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